फ्रांस चुनावों में सोशलिस्टों को पहली बढ़त

फ्रांस इमेज कॉपीरइट ELVIS
Image caption चुनावों में 4.6 करोड़ मतदाता हिस्सा ले रहे हैं.

फ्रांस के गृह मंत्रालय के आंकड़ो के मुताबिक संसदीय चुनाव के लिए हुए पहले चरण के मतदान में राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांड के सोशलिस्ट और समर्थक दलों को 46 प्रतिशत जबकि मध्यमाग्री और दक्षिणपंथी दलों 34 फीसद वोट हासिल हुए हैं.

संसदीय चुनाव के नतीजे तय करेंगे कि राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांड अपने उन चुनावी घोषणाओं को लागू करने में किस हद तक कामयाब होंगे जिनकी घोषणा उन्होंने कुछ महीनों पहले हुए राष्ट्रपति चुनावों के दौरान की थी.

फ्रांस्वा ओलांड उन कटौतियों औप वित्तीय निर्णयों के खिलाफ हैं जो कर्ज संकट झेल रहे यूरोजोन देशों में तेजी से लागू हो रही हैं या करने की कोशिश की जा रही हैं और जिसे फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति निकोला सरकोजी का समर्थन प्राप्त था.

अगले चरण के मतदान आने वाले सप्ताह में होंगे.

इस चरण में 57 प्रतिशत वोटरों ने हिस्सा लिया. फ्रांस के 4.6 करोड़ मतदाता 577 सीटों के लिए अपने प्रतिनिधियों का चुनाव कर रहे हैं.

कई मतदान सर्वेक्षकों के अनुसार इस चुनावों में सत्तासीन सोशलिस्ट और उसकी समर्थक पार्टियों को 283 से 347 सीटें ही मिलेंगी लेकिन पूंजीवाद विरोधी वामपंथी दलों को मिलने वाली 13 से 20 सीटों को मिलाकर सत्ताधारी दल को बहुमुत हासिल हो जाएगा.

दक्षिणपंथियों को समर्थन

इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption दक्षिणपंथियों को भी पहले से अधिक वोट मिले हैं लेकिन उन्हें अधिक सीटे शायद न मिलें.

चुनावों में लगभग दक्षिणपंथी दल नेशनल फ्रंट को 14 फीसद वोट मिले हैं. साल 2007 संसदीय चुनाव के दौरान ये आंकड़ा चार प्रतिशत था. हालांकि उन्हें अधिक से अधिक तीन सीटें ही मिल पाएंगी.

बीबीसी संवाददाता क्रिस्टियन फ्रेज़र का कहना है कि यह जबतक अगले हफ्ते होने वाले मतदान के नतीजे नहीं आ जाते ये कह पाना मुश्किल है कि आखिर में किसके हिस्से कितनी सीटें आ पाएंगी. कई चुनाव क्षेत्रों मे मुकाबली तीन तरफा है.

चुनावों में हिस्सा ले चुके एक मतदाता फ्रैंक मारेलो के अनुसार, ''ये चुनाव काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि ये इस बात का फैसला करेंगे कि हमारा सांसद कौन होगा क्योंकि वो ही ये तय करेंगे कि अगले पांच सालों में देश में कौन से कानून बनेंगे.''

फ्रांस में सीनेट पहले ही सोशलिस्ट पार्टी के नियंत्रण में है और ऐसा प्रतीत हो रहा है कि सहयोगियों के समर्थन से ही सही लेकिन ओलांड निचले सदन में भी बहुमत हासिल कर लेंगे जिससे वे अपने सुधार कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ा पाएंगे.

ओलांद की सरकार को अगले महीने संसद में अपना संशोधित बजट पेश करना है और संसदीय चुनाव के नतीजे सुधारों की रफ्तार तय करेंगे.

संबंधित समाचार