महिलाओं को गाड़ी चलाने का हक हो: कार्यकर्ता

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Image caption मनाल अल-शरीफ को गाड़ी चलाने के जुर्म में जेल में रखा गया था

सऊदी अरब में महिलाओं के अधिकारों से जुड़ी एक कार्यकर्ता ने देश के शाह को पत्र लिखकर महिलाओं को गाड़ी चलाने की अनुमति देने की माँग की है.

मनाल अल-शरीफ ने पिछले एक साल से इस बारे में अभियान चला रखा है कि महिलाओं के ड्राइविंग पर लगा प्रतिबंध हटाया जाए.

मनाल अल-शरीफ ने सऊदी अरब के शाह अब्दुला बिन अब्दुल अजीज के नाम लिखी खुली चिठ्ठी में मांग की है कि जिन महिलाओं के पास विदेशी ड्राइविंग लाइसेंस है, उन्हें गाड़ी चलाने की इजाजत दें.

मनाल अल-शरीफ वही महिला है जिन्हें सऊदी अरब के खोबर शहर में गाड़ी चलाती हुए अपनी तस्वीर यूट्यूब पर डालने के जुर्म में जेल में डाल दिया गया था.

मनाल की यह चिठ्ठी उस दिन आई है जिससे ठीक एक साल पहले सैकड़ों सऊदी महिलाओं ने वुमन2ड्राइव नाम से एक इंटरनेट अभियान शुरू किया था. शरीफ की गिरफ्तारी के बाद महिलाओं की ड्राइविंग के समर्थन में ये अभियान शुरू हुआ था.

तारीफ

मनाल अल शरीफ ने महिलाओं की हालत सुधारने की दिशा में उठाए गए शाह के कुछ कदमों की इस चिठ्ठी में तारीफ भी की है.

मनाल ने यह भी लिखा है कि महिलाओं को ड्राइविंग सीट पर न बैठने देना सामाजिक रीति-रीवाज का हिस्सा है जिसका अल्लाह से कुछ भी नहीं लेना-देना है.

सऊदी अरब के शाह ने 2005 में गद्दी संभाली था और उन्हें सुन्नी बहुल इस्लामी देश में महिलाओं की जिंदगी में सुधार लाने की कोशिश कर रहे शाह के तौर पर देखा जाता है.

पिछले साल सितंबर में उन्होंने वहां की महिलाओं को नगरपालिका के चुनाव में हिस्सा लेने की इजाजत भी दी थी.

जिन महिलाओं ने इस याचिका पर हस्ताक्षर किए हैं उनमें वो महिला भी शामिल है जिन्हें जेद्दा में गाड़ी चलाने के जुर्म में दस कोड़े मारने की सजा सुनाई गई थी. बाद में शाह ने हस्तक्षेप कर उस फैसले को बदल दिया था.

ह्यूमन राइट्स वॉच जैसे मानवाधिकार संगठनों ने सऊदी अरब के अस्पष्ट कानून की आलोचना की है और कहा है कि वहां बिना खास वजह के कठोर सजा दी जाती है.

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