आस्ट्रेलियाई सेना में बच्चों का यौन शोषण

Image caption रिपोर्ट के अनुसार आस्ट्रेलिया में बच्चों का शोषण 1950 के दशक में शुरु हो गया था

आस्ट्रेलिया की प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड अपने देश के सेना में बच्चों के साथ हुए यौन शोषण की घटना के बारे में सुनकर सदमें में हैं.

दशकों से चल रहे बाल यौन शोषण के दस्तावेजों के प्रकाश में आने के बाद आस्ट्रेलिया की प्रधानमंत्री ने कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो रॉयल कमीशन का गठन किया जा सकता है.

सिडनी डक्क्न केनेडी के रिपोर्ट के मुताबिक सेना में 13 साल के बच्चों के साथ यौन शोषण किया जाता रहा है.

रिपोर्ट में बाल यौन शोषण के लगभग 850 मामले दर्ज कराए गए हैं. रिपोर्ट के अनुसार बाल यौन शोषण घटना की शुरुआत 1950 के दशक में हो गई थी जो सत्तर के दशक तक और संभवतः अस्सी के दशक तक चलता रहा था.

बच्चों के साथ यौन शोषण की घटनाएं इसलिए होती रही क्योंकि उस समय आस्ट्रेलिया में 13 साल की उम्र में ही बच्चों को सेना में शामिल किया जाता था.

आरटीआई से जानकारी

बच्चों के यौन शोषण की विस्तृत जानकारी आस्ट्रिलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन ने सूचना के अधिकार कानून के तहत प्राप्त किया है.

सिडनी डक्कन केनेडी के रिपोर्ट के अनुसार प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड ने इस जानकारी को ‘पीड़ादायक’ बताया है. प्रधानमंत्री गिलार्ड ने कहा, “मैं इस रिपोर्ट का अध्ययन कर रही हूं और मैं यह भी चाहूँगी कि इस मामले पर रॉयल कमीशन का गठन भी किया जाए.”

रिपोर्ट के अनुसार पीडोफाइल यानी बच्चों का यौन शोषण करने वाले जानबूझकर सेना में भर्ती हुए होगें जिससे कि वे बच्चों तक उसी तरह पहुंच पाए जिस तरह चर्च और अनाथालयों में वे पहुंचते रहे हैं.

रिपोर्ट के अनुसार बच्चों का यौन शोषण करनेवाले कुछ लोग तो अब वरिष्ठ पदों पर पहुंच गए होगें. लेकिन उनमें से कुछ ही लोगों को दोषी ठहराया गया है.

रक्षा मंत्रालय ने सेना में यौन शोषण की जांच करने का आदेश उस वक्त दिया था जब ‘स्काइप स्कैंडल’ हुआ था. इस ‘स्कैंडल’ में एक जवान अपनी क्लासमेट के साथ सेक्स करते हुए दिखाई पड़ता है और इसे दूसरे कमरे में मौजूद उनके सहयोगी जवान देख रहे होते हैं.

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