कलाम के पक्ष में दिखने की कोशिश में नीतीश

Image caption रिश्ते में गर्मजोशी तो है, लेकिन यह एक रणनीति भी है

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की तरफ अपना रुझान जाहिर किया है.

पटना में गुरुवार को उन्होंने अब्दुल कलाम के स्वागत में जितना बढ़-चढ़ कर उत्साह दिखाया, उससे भी यही संकेत मिलता है.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का अब्दुल कलाम के पक्ष में खुलकर खड़ा हो जाना भी नीतीश कुमार को अपनी रणनीति के अनुकूल लगा होगा.

वैसे भी, ममता बनर्जी से उनकी राजनीतिक मैत्री जगजाहिर है. लेकिन अब्दुल कलाम के प्रति नीतीश कुमार के पुराने भक्ति-भाव में पिछले साल ब्रेक लग गया था.

रिश्ते में ब्रेक

ब्रेक इसलिए लगा था क्योंकि नालंदा अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति चयन और प्रबंधन संबंधी कई मुद्दों पर उभरे विवादों से कलाम दुखी हो गए थे.

उन्होंने खुद को इस विश्वविद्यालय से पूरी तरह अलग कर लिया था, जो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पसंद नहीं आया था और सम्बन्ध में खटास आ गई थी.

अब उसी खटास को ख़त्म करने में सक्रिय दिख रहे नीतीश कुमार ने राष्ट्रपति चुनाव में अब्दुल कलाम के प्रति अपने समर्थन का संकेत दिया है.

रणनीति साफ

रणनीति साफ है कि भारतीय जानता पार्टी अगर असहमत हुई और इस कारण अब्दुल कलाम भी अपनी उम्मीदवारी से पीछे हट गये तो नीतीश इसके दोषी नहीं माने जायेंगे.

हालांकि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से अपनी दूरी दिखाने के क्रम में नीतीश कुमार ने भाजपा से तौबा कर लेने तक की धमकी दे रखी है.

उन्होंने इशारे में नहीं बल्कि खुलकर कह दिया है कि इस देश को साम्प्रदायिक नहीं, बल्कि धर्मनिरपेक्ष प्रधानमंत्री चाहिए. जाहिर है कि वो नरेंद्र मोदी पर तीर चलाते हुए अपनी दावेदारी बढ़ाना चाहते हैं.

इसी सिलसिले में वो ख़ुद को एपीजे अब्दुल कलाम का पक्षधर दिखाकर अपनी राजनीतिक छवि संतुलित करना चाहते हैं.

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