आठ सेकेंड में भारत पर हमला:पाकिस्तान

Image caption टोनी ब्लेयर के पूर्व संचार प्रमुख रहे हैं कैंपबेल

ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमत्री टोनी ब्लेयर के पूर्व संचार प्रमुख अलास्टियर कैंपबेल ने कहा है कि पाकिस्तानी सेना के एक जनरल ने वर्ष 2001 में दावा किया था कि उनका देश आठ सेकेंड में भारत पर परमाणु हमला कर सकता है.

कैंपबेल की उस डायरी को ब्रिटेन के अखबार गार्डियन में सिलसिलेवार प्रकाशन किया जा रहा है.

पाकिस्तान की धमकी को लेकर ब्रिटेन इतना चिंतित हो गया था कि ब्लेयर ने अपने विदेश नीति सलाहकार सर डेविड मैनिंग को एक चिठ्ठी लिखकर चेताया भी था कि पाकिस्तान परमाणु बम बनाने जा रहा है.

साथ ही, पाकिस्तानी जनरल ने ब्रिटेन को लगभग धमकाने के अंदाज में भारत को यह बात याद दिलाने के लिए कहा था.

डायरी में दावा

कैंपबेल ने अपनी किताब ‘द बर्डेन ऑफ पावरः कंटडॉउन टू इराक’ में दावा किया है कि पाकिस्तानी जनरल ने भारत पर परमाणु हमले की धमकी उस समय दी थी जब 9/11 के हमले के बाद ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर भारतीय उपमहाद्वीप की यात्रा पर आए थे.

कैंपबेल ने अपनी डायरी में लिखा है कि पाकिस्तानी जनरल ने भारत पर आठ सेकंड में परमाणु हमले की धमकी इस्लामाबाद में रात्रि भोज के दौरान पांच अक्टूबर, 2001 को दी थी. यह भोज तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने दी थी.

रात्रि भोज पर बातचीत

टोनी ब्लेयर के पूर्व संचार प्रमुख अलास्टियर कैंपबेल ने लिखा है, “रात्रि भोज के दौरान मैं दो जनरलों के बीच बैठा था. दोनों इस बात के लिए आश्वस्त लग रहे थे कि भारत पाकिस्तान के उपर हमले जरूर करेगा.”

कैंपबेल के अनुसार, “जब रात्रि भोज खत्म हुआ और वहां से निकलने लगे तो एक जनरल ने आकर बताया कि पाकिस्तान भारत पर आठ सेंकड में परमाणु हमले कर सकता है.”डॉउनिंग स्ट्रीट के पूर्व संचार निदेशक का कहना है कि पाकिस्तानी जनरल का यह कहना बिल्कुल ही ‘अप्रत्याशित’ था.

इराक पर हमला

इसके अलावा किताब में रुपर्ट मर्डोक द्वारा टोनी ब्लेयर को तीन बार फोन किए जाने की जानकारी भी है.

इसी तरह पूर्व संचार प्रमुख अलास्टियर कैंपबेल ने कहा है कि रुपर्ट मर्डोक ने ब्लेयर से अपील की थी कि इराक पर हमला करने में थोड़ी देर करे.

Image caption जब परवेज मुशर्रफ राष्ट्रपति थे तब इंगलैंड के प्रधानमंत्री से सम्मान में रात्रि भोज दिया गया था

कैंपबेल ने अपनी डायरी में खुलासा किया है कि मर्डोक ने 2003 के मार्च में जब इराक पर हमले के लिए हाउस ऑफ कॉमंस में वोट डाले जाने की तैयारी हो रही थी, उससे एक हफ्ता पहले उन्होंने ब्लेयर को तीन बार फोन किया था.

कैंपबेल ने अपनी किताब में लिखा है कि एक फोन कॉल में तो मर्डोक ने तत्कालीन प्रधानंमत्री टोनी इराक में सैनिक हस्तक्षेप बढ़ाने के लिए दवाब भी डाला था.

पूर्व संचार प्रमुख का कहना है कि 11 मार्च 2003 को कैंपबेल ने प्रधानमंत्री ब्लेयर को लिखा था, “मर्डोक ने फोन करके मुझे इराक पर हमले के समय के बारे में कहा और यह भी लोभ दिया कि अगर ब्रिटेन हमला करता है तो न्यूज इंटरनेशनल उसे किस रूप में मदद करेगा.”

अशिष्ट कूटनीति

कैंपबेल के अनुसार, “हम दोनों, टीबी (टोनी ब्लेयर) और मुझे लगा कि वह अमरीका के दवाब में ऐसा कर रहे हैं और यह अशिष्ट कूटनीति है. निश्चित रुप से मर्डोक रिपब्लिकन कार्ड खेल रहे थे. हम जितनी देर करते, मुश्किल लगातार बढ़ती ही जाता. टीबी को लगा कि मर्डोक का फोन काफी विचित्र था, न कि चतुराई से.”

मर्डोक ने इससे पहले लेवसन जांच के दौरान बताया था कि उन्होंने कभी भी ‘प्रधानमंत्री से कुछ नहीं मांगा था.’

लेकिन इस हफ्ते के शुरु में सर जॉन मेजर ने लेवसन जांच के दौरान बताया था कि मर्डोक ने नीतिगत फैसले के लिए कई बार दवाब डाला था, जब वो 90 के दशक में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री थे.

तब्दीली

जॉन मेजर ने कहा था कि मीडिया मुगल मर्डोक ने उनसे यूरोप के बारे में भी कंजरवेटिव पार्टी के रवैये में तब्दीली लाने के लिए कहा था.

मेजर के अनुसार मर्डोक ने उन्हें धमकी दी थी कि अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो उनका अखबार उन्हें समर्थन करना बंद कर देगा.

उसके अगले साल कंजरवेटिव पार्टी चुनाव हार गई और टोनी ब्लेयर के नेतृत्व में लेबर पार्टी सत्ता में आ गई जिसका समर्थन सन अखबार ने किया था.

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