मिस्र में संसद भंग, लोगों में नाराजगी

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Image caption इस्लामिक गुटों ने देश में निष्पक्ष चुनाव ना होने की सूरत में मिस्र में दूसरे जन-विद्रोह की चेतावनी दी है.

मिस्र की सत्ताधारी सैनिक परिषद ने देश की संसद को भंग करने का ऐलान कर दिया है.मिस्र के सबसे बड़े राजनीतिक गुट मुस्लिम ब्रदरहुड ने बयान जारी कर संसद भंग किए जाने को गैर कानूनी बताया है.

ब्रदरहुड की फ्रीडम एंड जस्टिस पार्टी ने कहा है कि परिषद को ऐसा करने का कोई हक नहीं है.

दरअसल गुरुवार को मिस्र के सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया था कि जिस कानून के तहत मिस्र में पहली बार चुनाव हुए वो असंवैधानिक है. इसी फैसले के बाद सैन्य परिषद ने संसद भंग की है.

इसका सीधा असर मिस्र में राष्ट्रपति पद के लिए किए जा रहे मतदान पर पड़ा है.

शनिवार को लोगों ने मतदान किया था और रविवार को वोटिंग का आखिरी दिन है. शनिवार को मतदान केंद्रों पर लोगों की तादाद बहुत कम दिखी.

मिस्र की राजधानी काहिरा में मौजूद ‘द हिन्दू’ अखबार के पश्चिमी एशिया संपादक अतुल अनेजा के मुताबिक मतदान के पहले चरण के उत्साह से उलट इस आखिरी चरण में, मतदान केंद्रों में सेना की तैनाती और मतदाताओं की चुप्पी दिखी.

अतुल अनेजा ने बताया, “लोगों में चुनाव प्रक्रिया के प्रति अविश्वास पैदा हो गया है, वो इस चुनाव के बहिष्कार के लिए मुहिम चला रहे हैं और जन-विद्रोह के दूसरे चरण की बात कर रहे हैं.”

सैनिक परिषद का वर्चस्व?

पिछले वर्ष करीब तीन दशकों तक मिस्र के राष्ट्रपति रहे होस्नी मुबारक को जनता के विरोध के आगे अपना पद त्यागना पड़ा था.

उसके बाद संसदीय चुनाव हुए थे जिनमें मुस्लिम ब्रदरहुड को बहुमत मिला था.

राष्ट्रपति पद की दौड़ में भी आखिरी मुकाबला मुस्लिम ब्रदरहुड के मोहम्मद मोर्सी और मुबारक के कार्यकाल में प्रधानमंत्री रहे अहमद शफीक के बीच है. कहा जा रहा है कि लोग इन दोनों ही उम्मीदवारों को लेकर खास उत्सुक नहीं हैं.

एक ओर जहाँ मोहम्मद मोर्सी को इस्लामिक उम्मीदवार माना जा रहा है तो अहमद शफीक को पुराने शासनकाल का ही नुमाइंदा माना जा रहा है.

राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे एक हफ्ते में आने की उम्मीद है. लेकिन नए राष्ट्रपति को अब नई संसद के चुने जाने और उसके द्वारा संविधान बनाने का इंतजार करना होगा.

इसी संविधान के तहत राष्ट्रपति की शक्तियों को निर्धारित किया जाएगा.

अतुल अनेजा बताते हैं कि राजधानी काहिरा में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के ‘निष्पक्ष’ ना होने और उसके पीछे सैनिक परिषद का दबाव होने की चर्चा आम हो गई है.

अनेजा के मुताबिक राष्ट्रपति चुनाव के मतदान के आखिरी चरण से पहले संसद भंग किए जाने के फैसले से लोगों में सैन्य परिषद के दोबारा देश में वर्चस्व बनाने का खतरा लग रहा है.

अदालत के फैसले के बाद राजदानी काहिरा के तहरीर चौक पर लोगों ने जमकर प्रदर्शन किया था.

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