आईआईटी दिल्ली चला कानपुर की राह

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Image caption आईआईटी कानपुर की तरह दिल्ली ने भी सिब्बल की योजना को खारिज कर दिया

आईआईटी कानपुर की तर्ज पर अब आईआईटी दिल्ली ने भी मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल के देश भर के इंजीनियरिंग कॉलेजों के लिए कॉमन इंट्रेस प्रोग्राम (एकल दाख़िला प्रक्रिया) के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है.

उन्होंने ये तय किया है कि अगले साल से वे अपनी प्रवेश परीक्षा करवाऐंगें.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार आईआईटी दिल्ली की सीनेट की एक बैठक में ये फैसला लिया गया.

इस सीनेट के सदस्य के हवाले से कहा जा रहा है कि आईआईटी दिल्ली की सीनेट का मानना है कि प्रस्तावित परीक्षा संस्थान की स्वायतत्ता के उपर चोट है और संस्थान इस प्रस्ताव को खारिज करता है.

अब निगाहें इस बात पर है कि बाकी संस्थान आईआईटी कानपुर और दिल्ली के इस फैसले के बाद क्या रूख अपनाते हैं.

प्रस्ताव कमजोर

संकेत है कि सीनेट वर्तमान में आईआईटी जेईई प्रवेश परीक्षा के समर्थन में है.

सीनेट का ये फैसला कपिल सिब्बल के उस बयान के बाद आया है जब सिब्बल ने कहा कि अगले साल से सिंगल ऐंट्रेंस टेस्ट की योजना की सोच में कोई बदलाव नहीं है.

आईआईटी कानपुर ने इस महीने की शुरूआत में इस योजना को हर स्तर पर कमजोर कह कर खारिज कर दिया है.

उनका कहना था कि यह प्रस्ताव अनुचित है और प्रौद्योगिकी संस्थान अधिनियम (1961) तथा आईआईटी कानपुर अध्यादेश का उल्लंघन है.

28 मई को सरकार ने घोषणा की थी कि अगले साल से आईआईटी और इंजीनियरिंग के केन्द्रीय संस्थानों में प्रवेश के लिए एक ही परीक्षा देनी होगी जिसमें बारहवीं कक्षा के अंको को भी महत्व दिया जाएगा.

इस घोषणा के बाद से ही देश में बहस छिड़ गई है और आईआईटी संस्थानों के साथ साथ लोग भी इस मुद्दे पर अलग अलग खेमों में खड़े हो गए है.

बात इतनी बढ़ी है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) को विश्वास दिलाना पड़ा है कि उनकी स्वायत्तता के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी.

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