सिंगापुर के यादगार लम्हे

पूर्वी देश सिंगापुर की यात्रा करके लौटे बीबीसी संवाददाता उमर फ़ारूक़ को लगा कि अपेक्षा से कहीं ज्यादा खूबसूरत और साफ़-सुथरा देश है यह.

जब एक पर्यटक के रूप में सिंगापुर की यात्रा पर निकला तो केवल इतना पता था कि पूर्वी एशिया का यह छोटा सा देश बहुत ही सुंदर है लेकिन जब में शहर के चांगी एयरपोर्ट पर उतरा तो वह मेरी अपेक्षाओं और अंदाज़ से कहीं ज्यादा खूबसूरत और किसी दर्पण की तरह साफ़-सुथरा मिला.

सिंगापुर में हर कदम पर जो चीज़ आप को अचंभे में डाल देती है वह है वहां की सफाई और हरी भरी सुन्दरता.

ऊंची ऊंची और चकाचौंध कर देने वाली अजीब-ओ-गरीब डिजाईन की इमारते और हर तरफ बिखरी मुस्कुराहटें आप को बताती हैं कि आखिर सिंगापुर विश्व के सब से खुशहाल और संपन्न देशों में क्यों गिना जाता है.

सिटी स्टेट

सिंगापुर एक सिटी स्टेट या एक ही नगर में बसा देश है जिस की कुल आबादी 50 लाख के आस पास है, यानी मेरे शहर हैदराबाद की आधी.

इस की लंबाई- चौड़ाई बस इतनी है कि अगर एक-डेढ़ घंटा लगातार यात्रा करें तो डर है कि कहीं पडोसी देशों मलेशिया या इंडोनीशिया में न घुस पड़ें.

लेकिन 1963 में ब्रिटिश राज से आज़ाद हुआ यह छोटा देश आज एशिया और दुनिया की सब से प्रसिद्द अर्थव्यवस्थाओं में से एक है.

चौड़ी चिकनी सड़कें, ऊंचे पुलों, गहरी सुरंगों और उन पर कम से कम एक सौ बीस किलोमीटर प्रति घंटे की गति से दौड़ती शानदार कारें.

हरे भरे बाग़, दुनिया की सब से बेहतरीन मेट्रो रेल व्यवस्था, बहुमंजिला भूमिगत ट्रेन स्टेशनों का जाल - इन सब के बीच मुझे दो चीज़ें बड़ी अजीब लगीं.

न पुलिस और न भिखारी

सिंगापुर में जो एक सप्ताह गुज़ारा उस अवधि में मुझे कहीं भी एक पुलिस वाला, नेता और भिखारी नहीं दिखाई दिया, न सड़क पर, न रेलवे स्टेशनों पर.

रेलवे स्टेशनों पर तो रेलवे कर्मी भी नहीं दिखे क्योंकि वहां सारा काम स्वचालित मशीनों से ही होता है.

मशीन में पैसे डालिए, जहाँ जाना हो वहां का टिकट मिलेगा, और छुट्टा भी पूरा वापस मिलेगा.

Image caption सिंगापुर में दुनिया भर के पर्यटक दिखते हैं.

एक डॉलर गारंटी के तौर पर मशीन रखेगी, जिस स्टेशन पर उतरेंगे वहां की मशीन में टिकट वापस डालिए एक डालर वापस.

यह इसलिए कि आपने जो टिकट खरीदा उसे आप कचरे में न डालें क्योंकि उसी टिकट को मशीन दोबारा इस्तेमाल करेगी.

सफाई रहने के मामले का एक और भी राज़ है.

थूकने और कचरा फेंकने की सजा है लगभग एक हज़ार डालर या हमारे पचास हज़ार रुपये या फिर छह महीने की कैद.

नेताओं का अभाव

पुलिसवाले तो दूर दूर तक नहीं दिखते लेकिन इसके बाद भी अपराध अगर बिलकुल न के बराबर हैं तो उसका कारण वह लाखों कैमरे हैं जो हर सड़क, हर गली, हर नुक्कड़ और हर सरकारी और निजी भवन पर लगे हुए हैं. कोई चीज़ किसी से छुपी नहीं है.

पुलिस न हो तब भी कोई वहां लाल सिग्नल तोड़कर नहीं जाता वरना उस का लाइसेंस निलंबित हो जाएगा, जुर्माना अलग.

क़ानून का आदर और अनुशासन, यही दो चीज़ें हैं जो सिंगापुर को सिंगापुर बनाती हैं.

पुलिस वालों की तरह कोई नेता भी मुझे सिंगापुर में दिखाई नहीं दिया.

यानी ऐसा नेता जिस के लिए ट्रैफिक रोकना पड़े, लोगों को रुक कर उसे रास्ता देना पड़े, जिस के लिए ट्रैफिक पुलिस सीटियाँ बजाती फिरे और जिस के लिए किसी एम्बुलेंस को भी इंतज़ार करना पड़े.

सिंगापुर है तो एक लोकतांत्रिक देश लेकिन वहां हमेशा एक ही दल, पीपल्स एक्शन पार्टी, का ही दबदबा रहा है. इसकी व्यवस्था पूँजीवाद पर आधारित है.

शायद यही वजह है कि सिंगापुर पश्चिमी देशों का पसंदीदा है.

भ्रष्टाचार नदारद

भ्रष्टाचार का न होना भी सिंगापुर की एक बड़ी खूबी है. ट्रांसपेरेंसी इंटरनैशनल ने सिंगापुर को विश्व के दस सब से कम भ्रष्ट देशों में शामिल किया है.

शायद इस का एक कारण यह है कि सत्ता चलने वालों का वेतन बहुत अच्छा है.

प्रधानमंत्री की तनख्वाह 31 लाख डालर यानी अमरीका के राष्ट्रपति के वेतन से पांच गुना ज्यादा है.

सिंगापुर की अर्थव्यवस्था उद्योग, आयात-निर्यात और वित्तीय सेवाओं से चलती है.

सिंगापुर में अमरीका, जापान और यूरोप की सात हज़ार बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ और चीन और भारत की डेढ़-डेढ़ हज़ार कम्पनियाँ अपना व्यपार चलाती है.

वैसे सिंगापुर से लौटने के बाद अब मैं पीने के पानी का ज्यादा आदर करने लगा हूँ और जब भी पानी पीता हूँ, सोंचता हूँ कि सिंगापुर में अगर होता तो इस के लिए सौ रुपये देने पड़ते.

कहीं कूड़ा करकट देखता हूँ या किसी को थूकता देखता हूँ तो सोंचता हूँ कि किसी ने अभी एक हज़ार डालर या पचास हज़ार रुपये का नुकसान किया है.

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