जानवरों से भविष्यवाणी कराने पर नाराजगी

Image caption दो साल पहले विश्व कप में भविष्यवाणी करने वाले पॉल आक्टप्स ने काफी ख्याति पाई थी

यूरो 2012 में मैचों के परिणामों का पता करने के लिए जानवरों के प्रयोग को लेकर जर्मनी के कार्यकर्ता काफी दुखी हैं.

दो साल पहले विश्व कप फुटबॉल में भविष्यवाणी करने वाले पॉल ऑक्टोपस ने काफी ख्याति पाई थी. बाद में उसकी मौत हो गई थी. उसी से प्रभावित हो कर कई तरह के जानवरों का इस्तेमाल फुटबाल के मैचों के नतीजों का पता लगाने में किया जा रहा है.

हालांकि जानवरों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाले कार्यकर्ता यवोनी गाय, भेड़ जैसे पशु ऐल्पैक और बुलडॉग जावेर के इस्तेमाल को लेकर काफी दुखी हैं.

ऐसी ही संस्था तिराशबे ने कहा है कि यूरो 2012 के दौरान इन विभिन्न जानवरों का ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है.

देश के कई टीवी और रेडियो चैनल ऐसी भविष्यवाणियों की नाकामी और कामयाबी के बीच टूर्नामेंट में परिणामों का अनुमान लगाने के लिए जानवरों का इस्तेमाल कर रहे हैं.

इस्तेमाल

संस्था के मारियस टंटे ने बीबीसी से कहा, “इन दिनों ऐसा लग रहा है कि जिनके पास भी कोई जानवर है, वो उसे कैमरे के सामने खड़ा कर रहा है. हर स्टेशन के पास अपना जानवर है.”

बीबीसी के बर्लिन संवाददाता स्टीफन इवांस के अनुसार संस्था ने खासकर इंटरनेट रेडियो स्टेशन का हवाला दिया जो परिणामों का अनुमान लगाने के लिए अजगर का इस्तेमाल कर रहा है.

रेडियो स्टेशन ने अजगर के सामने दो चूहे पेश किए. एक चूहे के पट्टी बांधी गई थी जिस पर जर्मनी लिखा गया. बिना पट्टी वाला चूहा डेनमार्क के लिए था.

संस्था ने कहा. “महज मजे के लिए जानवरों कर अत्याचार किए जा रहे हैं.”

यवोनी गाय का इस्तेमाल हारने का ज्यादा संभावना वाली टीम को जिताने के लिए किया जा रहा है.

जिन अन्य जानवरों का इस्तेमाल किया जा रहा है उनमें एमा नामक सुअर, नेवला, उदबिलाव और बकरी भी है जो बावेरियन रेडियो स्टेशन भविष्यवाणी कर रही है.

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