बांग्लादेश में विद्रोही सैनिकों की प्रताड़ना: ह्यूमन राइट्स वॉच

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Image caption बांग्लादेश में फरवरी 2009 में हुए बांग्लादेश राइफ़ल्स के विद्रोह के दौरान मारे गए एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी की शवयात्रा

मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने वर्ष 2009 में हुए सीमा बल में विद्रोह के दौरान गिरफ्तार किए गए छह हज़ार सैनिकों के सामूहिक मुकदमें पर रोक की मांग की है.

अपनी नई रिपोर्ट में संस्था ने अधिकारियों पर संदिग्ध सैनिकों की प्रताड़ना का भी आरोप लगाया है. लेकिन बांग्लादेश की गृह मंत्री ने रिपोर्ट को सिरे से खारिज करते हुए तर्कविहीन बताया है.

साल 2009 में हुए बांग्लादेश के सीमा बल में विद्रोह के दौरान सत्तर लोगों की जान गई थी. इन सैनिकों ने अपने उच्च अधिकारियों पर तनख्वाह और काम करने के माहौल के विरोध में विद्रोह किया था.

'जघन्य अपराध'

मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि कुछ संदिग्धों को बिजली का करंट देकर प्रताड़ित किया गया है और अब तक हिरासत में 47 लोगों की मौत हो गई है.

रिपोर्ट के अनुसार प्रताड़ना झेल चुके सैनिकों में कुछ का गुर्दा खराब हो गया है और कुछ को लकवा मार गया है.

वर्ष 2009 के विद्रोह के लिए चार हज़ार से अधिक सैनिक जेलों में बंद है और अन्य दो हज़ार पर मुकदमा चल रहा है.

ह्यूमन राइट्स वॉच के एशिया के निदेशक ब्रैड एडम्स कहते हैं कि सामूहिक मुकदमें में न्याय नहीं मिल सकता.

ब्रैड एडम्स ने कहा, “हम चाहते हैं कि दोषियों को इन अपराधों की सज़ा मिले. ये जघन्य अपराध हैं. छह हज़ार लोगों पर केस दर्ज है. कभी-कभी 800 लोगों को एक ही बार अदालत में पेश किया जाता है. उनके पास वकीलों की कमी है और अपने केस के बारे में भी कम जानकारी है. उन्हें अपने खिलाफ सबूतों के बारे में भी पता नहीं है. ये गलत है.”

'रिपोर्ट तर्कविहीन'

लेकिन बांग्लादेश की सरकार ने प्रताड़ना के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. देश की गृह मंत्री सहरा खातून ने सीमा बल के गार्डों पर चलाए जा रहे मुकदमों को सही करार दिया है.

सहरा खातून ने बीबीसी को बताया, “ये केस पारदर्शी तरीके से दर्ज किए गए हैं. पुलिस ने गहन जांच की है. मुकदमा जांच के आधार पर चल रहा है. वो जो कुछ कह रहे हैं हमें मंजूर नहीं है. ये रिपोर्ट तर्कविहीन है.”

ये विद्रोह बांग्लादेश राइफ़ल्स के ढाका स्थित मुख्यालय में भड़का था जिसके बाद ये देश के कई हिस्सों में तैनात सीमा बल के सैनिकों के बीच फैल गया था. इस उपद्रव के दौरान कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों समेत 70 लोग मारे गए थे.

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