मृत्युदंड की प्रतीक्षा करते कैदी की आशा

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टेक्सस स्थित लिविंग्स्टन के ठीक बाहर, ऐलन बी पोलुंस्की युनिट, एक डरावनी जगह है.

और जब ये एक ऐसी जेल हो, जहाँ राज्य में मौत की सज़ा सुनाए जानेवाले सभी बंदी मौजूद हों, तो इसमें कोई हैरानी भी नहीं होती.

जेलों में पहरे के लिए बनी मीनारें और कँटीली तारें तो हैं ही, ये पूरी इमारत ही अलग लगती है, बक्सों जैसी, जिसमें कोई खिड़की नहीं, और वो सबसे डरावनी चीज़ है.

और ध्यान से देखें, तो दिखता है कि खिड़कियाँ हैं, बहुत पतली, दीवार में दरारों की तरह जिनसे बाहर शायद ही कुछ देखा जा सके.

एक बार फिर, हैरानी वाली कोई बात नहीं.

मैं जब मौत की सज़ा की प्रतीक्षा कर रहे एक क़ैदी का इंटरव्यू करने जेल पहुँचा तो रिसेप्शन पर बैठे लोग बड़े मिलनसार, विनम्र और जानकार लगे.

भीतर ना मोबाइल फ़ोन, ना कंप्यूटर, ना हथियार ले जाने की अनुमति है, ना ही नकद, क्रेडिट कार्ड और चेकबुक.

ऐसा कोई सामान नहीं जो कि किसी भी तरह से किसी बंदी के काम आ सकता हो, यदि आपका उससे संपर्क हुआ तो, जो कि आप नहीं कर सकते.

उत्साहित बंदी

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Image caption आइवान कांटु अपने भाई की हत्या के दोषी पाए गए हैं जिससे वो इनकार करते हैं

कई इलेक्ट्रॉनिक दरवाज़ों और अतिथि केंद्र से होता हुआ, और रिकॉर्डिंग के लिए अपना माइक्रोफ़ोन सौंपता हुआ. जिसपर कि दूसरी तरफ़ की रिकॉर्डिंग होगी, मैं इधर-उधर देखता हूँ और सोचता हूँ कि आइवन ऐब्नर कांटु किधर है.

टेक्सस अपराध न्यायालय के प्रवक्ता जेसन क्लर्क कहते हैं, वो वहाँ है. ये कहते हुए वो एक आदमी की ओर इशारा करते हैं जिसके चेहरा बगल से नज़र आ रहा है.

और तभी, जबकि मैं एक सीट पर बैठता हूँ, एक मोटे शीशे के पार, जब कांटू मेरी ओर मुड़ता है और मुस्कुराता है.

अगले एक घंटे तक कहीं और देखना मुश्किल था. उस बूथ की दोनों दीवारें बहुत नज़दीक थीं जिससे मुझे मृत्युदंड की प्रतीक्षा कर रहे एक व्यक्ति के अतिरिक्त और कुछ नहीं दिखाई दिया.

कांटू की निगाह में इतनी गहराई थी कि इंटरव्यू के दौरान बीच-बीच में आँखें नीचे कर आवाज़ का लेवल चेक करने जैसा काम भी एक बहुत बड़ी बात हो गई थी.

मैं उससे फ़ोन पर बात करता हूँ और भला हो वायरलेस माइक का कि उसकी आवाज़ सीधे मेरे कान में आ रही थी और वो जितना नज़दीक था उससे कहीं अधिक निकट लग रहा था.

ये वो आदमी था जो बात करने के लिए मरा जा रहा है, जो दुनिया में किसी भी और चीज़ से अधिक बस आपका साथ चाहता था.

उसने बताया कि एक अजनबी के साथ मिलना उसके जीवन में पिछले कितने ही वर्षों की सबसे बड़ी घटना थी.

कांटू को 2001 में मौत की सज़ा सुनाई गई थी, इसके एक साल पहले अपने चचेरे भाई की हत्या करने के लिए. उसे इससे पहले अपने भाई की गर्लफ़्रेंड की हत्या का भी दोषी ठहराया गया था मगर इस बारे में कोई मुक़दमा नहीं चला.

वो हमेशा अपने आप को निर्दोष बताता रहा, और कहता रहा कि उसे फँसाया गया है, डीएनए टेस्ट ना होने के कारण और सरकार की ओर से दिए गए वकीलों के ठीक से काम नहीं करने के कारण.

पिछले साल, उसकी सज़ा को अमल में लाए जाने में बस एक महीने का समय बचा था, जब इसपर रोक लग गई. अब उसके मामले की समीक्षा हो रही है और कांटू का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि एक दिन वो रिहा हो जाएँगे.

विस्मृति

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Image caption खिड़कियों की जगह दीवारों में दरारें हैं जिनमें कचरा जमा होने के कारण देखना मुश्किल है

मगर रिहाई का वो दिन जब तक नहीं आता, तबतक उसे मृत्युदंड की प्रतीक्षा करते हुए कालकोठरी में रहना है, दिन के 22 घंटे तक छोटे कमरे में, अपना रेडियो सुनते या पढ़ते. उसके पास कोई टीवी नहीं है.

वो बहुत अच्छे से बात करता है, मगर उसने जो कहा वो मैंने पहले कभी नहीं सुना – कि उसे अपने आप को व्यक्त करने में कठिनाई आती जा रही है.

जमकर पढ़ाई करने के बावजूद, किसी के साथ नियमित रूप से बातचीत नहीं करने से, उसे लगता है कि उसकी संवाद की शक्ति समाप्त हो रही है.

उसने मुझसे कहा, कि मृत्युदंड एक ऐसी दुनिया है जिसमें कोई रंग नहीं. जेल का रंग धूसर और भूरा है, उसके कपड़े सफ़ेद. खिड़की की दरारें इतनी गंदी हैं कि उनसे कुछ भी देखना मुश्किल है.

जब कोई पत्रिका यहाँ पहुँचती है तो उसके रंग पन्नों से बाहर निकल सैर करने लगते हैं.

और हालाँकि जेल की कोठरी में वो अकेला है, इससे वो शांत नहीं हो जाती. वहाँ लगातार शोर सुनाई देता है, बंदी झगड़ रहे हैं, टाइपराइटरों की आवाज़ें (कंप्यूटरों की नहीं), जेलों की घोषणाएँ और बीच-बीच में लड़ाईयाँ.

आत्महत्याएँ और अपने आप को नुक़सान पहुँचाने जैसी घटनाएँ भी होती रहती हैं. कांटु एक बंदी के बारे में बताता है जिसे लोग गिलहरी कहते थे और उसे एक मनोचिकित्सा केंद्र में भर्ती करवाया गया जब उसने अपनी बाईं आँख निकालकर खा ली.

कांटु बताता है कि कैसे उसने अपने एक बंदी साथी को उस्तुरे से खुद को काटने के बाद विस्मृति में चले जाते हुए देखा.

वो कहता है कि उसका भी मूड बदलता रहता है मगर उसके लिए अपने आप को उत्साहित रखना आसान है क्योंकि उसे पता है कि उसके मामले की अभी समीक्षा हो रही है.

वो अपनी पत्नी टैमी की भी बात करता है जो उनका सहारा हैं. उन्होंने 2007 में शादी की थी मगर दोनों ने अभी तक एक-दूसरे को स्पर्श तक नहीं किया है.

हमारी बात का समय समाप्त हो गया, मगर कांटू बात करते रहना चाहता है.

मैं अपना सामान समेटता हूँ, वो मुझे इशारे से फ़ोन उठाने के लिए कहता है.

और जैसे ही मैं भारी दरवाज़े की ओर जाकर. पलटकर उसे देखता हूँ, मैं उसे देखता हूँ, उसकी छाया, जो हाथ हिलाकर विदा कह रही है.

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