कोलंबियाई लेखक मार्केज़ को डिमेन्शिया

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Image caption 1982 के नोबेल साहित्य पुरस्कार विजेता मार्केज़ की याददाश्त को लेकर कुछ अर्से से अफ़वाहें चल रही थीं

नोबेल पुरस्कार विजेता कोलंबियाई लेखक गैब्रिएल गार्शिया मार्केज़ के भाई ने कहा है कि मार्केज़ को सोचने-समझने और याददाश्त पर असर डालनेवाली बीमारी डिमेन्शिया हो गई है.

महान लेखक के भाई जेइमी गार्शिया मार्केज़ ने कार्टागेना शहर में एक लेक्चर के दौरान छात्रों से कहा कि उनके भाई, जो अब 85 वर्ष के हो गए हैं, अक्सर उन्हें फ़ोन कर मामूली बातें पूछा करते हैं.

उन्होंने कहा,”मैं कई बार रोता हूँ क्योंकि मुझे लगता है मैं अपने बड़े भाई को खो रहा हूँ.“

उन्होंने बताया कि मार्केज़ ने लिखना पूरी तरह छोड़ दिया है.

कोलंबिया स्थित बीबीसी संवाददाता आर्टुरो वैलेस का कहना है कि कुछ समय से मार्केज़ को याददाश्त को लेकर समस्याएँ होने को लेकर अफ़वाहें चल रही थीं.

जेइमी गार्शिया मार्केज़ उनके परिवार के पहले सदस्य हैं जिन्होंने खुलकर इस बारे में कोई बात कही है.

उन्हें उनके बड़े भाई ‘गाबो’ के साथ उनके संबंधों के बारे में बात करने के लिए बुलाया गया था जिस नाम से कोलंबिया में लोग अपने लेखक को स्नेहवश पुकारते हैं.

उन्होंने कहा,”वे शरीर से बिल्कुल ठीक हैं मगर वे काफ़ी समय से डिमेन्शिया से पीड़ित हैं. हालाँकि वो अभी भी पहले की तरह खुशमिजाज़ रहते हैं.“

पारिवारिक बीमारी

मार्केज़ की 1967 की कृति – वन हंड्रेड ईयर्स ऑफ़ सॉलिच्युड – एक ऐसे परिवार की कहानी से शुरू होती है जो अपने बूढ़े होते जा रहे पिता की देखभाल नहीं कर पा रहा.

जेइमी गार्शिया मार्केज़ ने कहा,"ये बीमारी हमारे परिवार में रही है."

गैब्रिएल गार्शिया मार्केज़ अभी मेक्सिको में रहते हैं और हाल के वर्षों में वे सार्वजनिक रूप से बिल्कुल नहीं बोले हैं.

उनके उपन्यासों में – लव इन द टाइम ऑफ़ कॉलेरा, क्रॉनिकस ऑफ़ अ डेथ फ़ोरटोल्ड और द जेनरल इन हिज़ लैबिरिन्थ – प्रमुख हैं.

उन्हें सबसे अधिक ख्यातिय – वन हंड्रेड ईयर्स ऑफ़ सॉलिच्युड – से मिली जिसकी तीन करोड़ से अधिक प्रतियाँ बिक चुकी हैं और इसका 30 से अधिक भाषाओं में अनुवाद हुआ है.

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