'हमारी छत पर न लगाएं मिसाइलें'

 मंगलवार, 10 जुलाई, 2012 को 11:50 IST तक के समाचार

निवासियों का कहना है कि योजना लागू करने से पहले उनकी राय नहीं ली गई.

लंदन में ओलंपिक के दौरान सुरक्षा के लिए कुछ घरों के उपर मिसाइल तैनात करने की योजना को कानूनी चुनौती मिल रही है.

अधिकारियों का कहना है कि ओलंपिक के दौरान आतंकवादी हमलों से बचने के लिए इस तरह के उपाय जरूरी हैं, लेकिन स्थानीय निवासियों का कहना है कि योजना को लागू करने से पहले उनकी राय नहीं ली गई.

इस महीने लंदन में शुरु हो रहे ओंलपिक खेलों के दौरान वहां घरों की छत पर जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को लगाने की योजना के खिलाफ पूर्वी लंदन के निवासी अदालत का दरवाजा खटखटा रहे हैं.

रक्षा मंत्रालय का कहना है कि इन मिसाइलों का इस्तेमाल ओलंपिक स्थलों पर आसमान से आंतकवादी हमलों के खतरे को रोकने के लिए किया जाएगा.

लेकिन इन इमारतों में रहने वाले लोगों का कहना है कि इससे उनकी सुरक्षा को खतरा है और इस कदम के लिए उनसे ठीक से मशवरा नहीं लिया गया था.

इन लोगों के वकील, मामले की सुनवाई तक, मिसाइलों की तैनाती के खिलाफ निषेधाज्ञा लेने की कोशिश कर रहा हैं.

सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार लेयटंस्टन के फ्रेड विग टॉवर की छत पर मिसाइल लगाने की योजना है जिसके विरोध में वहां के निवासियों ने न्यायालय से गुहार लगाई है.

लोगों में डर

वकील मार्क विलियर्स का कहना है कि जिन घरों के उपर ये मिसाइल लगाए जाएंगे वो खुद आतंकवादियों के हमले का निशाना बन सकते हैं क्योंकि आतकंवादी उन पर हमला कर अपनी बुरी मंशा जाहिर कर सकते हैं.

विलियर्स ने अदालत में न्यायधीश से कहा कि इन निवासियों का डर जायज है कि ऐसा किए जाने के बाद ये इमारत ही आतंकवादियों के हमले का मुख्य निशाना बन जाएगा.

उन्होंने कहा कि अलग टॉवर बनाकर उन पर मिसाइलें लगाई जा सकती हैं.

साथ ही विलियर्स ने ये भी चेतावनी दी कि अगर टॉवर पर से मिसाइल छोड़ी जाती है, तो कहीं उसका निशाना आसपास के दूसरे भवन और मकान न बन जाए.

उनका कहना था कि मिसाइल के टुकड़े आसपास फैल सकते हैं, राहगीरों पर गिर सकते हैं और आग लगने का खतरा भी बना रह सकता है.

प्रधानमंत्री

वहीं रक्षा मंत्रालय के वकील ने कहा कि मिसाइल को तैनात करने का फैसला बहुत सोच समझ कर लिया गया है और उस फैसले में प्रधानमंत्री भी शामिल थे.

रक्षा मंत्रालय के वकील फोर्सडिक ने कहा कि नागरिक और सैन्य सुरक्षा के अधिकारियों ने ये आश्वासन दिया है कि इन इमारतों पर सुरक्षा का कोई खतरा नहीं है.

लेकिन इस बीच इन इलाकों में रह रहे लोगों ने निषेध्याज्ञा की मांग करते हुए कहा है कि जब तक अदालत अपना फैसला नहीं सुना देती है, तब तक सुरक्षा के ये कदम न उठाए जाएं.

उनका कहना है कि अधिकारियों के ये भी देखना चाहिए की विक्लांग लोगों की जरूरतों को भी बराबरी से ध्यान में रखते हुए कोई फैसला लिया जाए. वहीं सरकारी पक्ष के वकील का कहना है कि सरकार के पास ये अधिकार है कि जरूरत पड़ने पर वो सुरक्षा के हर वो कदम उठाए जिसे वो जरूरी समझती है.

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