मिस्र में राष्ट्रपति का संसद बहाली का आदेश रद्द

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Image caption मिस्र में 30 जून को चुने गए नए राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी ने संसद की बैठक बुलाई थी

मिस्र में देश के सुप्रीम संवैधानिक कोर्ट ने नवनिर्वाचित राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी के संसद बहाली के आदेश को रद्द कर दिया है.

इससे पहले मंगलवार को देश की सैन्य परिषद के संसद को भंग करने के फैसले के बावजूद, राष्ट्रपति मुर्सी के आदेश पर संसद की बैठक हुई थी.

कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने संसद को भंग करने का फैसला सुना चुका था जिससे देश की सैन्य परिषद भी सहमत है.

मंगलवार को हुई बैठक में सांसदों ने कोर्ट के फैसले पर कानूनी सलाह लेने पर सहमति जताई थी और मिस्र के कई वकीलों ने संभावना जताई थी कि हो सकता है कि बैठक में सांसदों ने संसद के फैसले लेने के अधिकार राष्ट्रपति मुर्सी को हस्तांतरित कर दिए हों.

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सैन्य परिषद ने कहा था कि कि संवैधानिक कोर्ट के फैसले का पालन होना चाहिए. इसे कई पर्यवेक्षक एक हफ्ते पहले राष्ट्रपति पद के लिए चुने गए मुर्सी को चुनौती और चेतावनी के रूप में देख रहे हैं.

ऐसा भी कहा जा रहा है कि मुर्सी के चुनाव के बाद ये सेना और राष्ट्रपति के बीच टकराव की पहली स्थिति है.

'अब सड़कों पर नहीं, अदालत में संघर्ष'

बीबीसी के काहिरा संवाददाता जोन लेयन का कहना है कि संसद की बैठक राष्ट्रपति और सैन्य परिषद के बीच चल रही राजनीतिक तनातनी में एक और घटना है और ये खींचतान कई महीने तक चल सकती है.

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क्या है मुस्लिम ब्रदरहुड ?

जोन लेयन के अनुसार, "संसद की बैठक बुलाने से राष्ट्रपति ने सैन्य परिषद के आदेश का सीधा उल्लंघन किया है, जिसने संसद भंग की थी. वे अपने नए अधिकारों का प्रयोग कर रहे हैं लेकिन हो सकता है कि निर्रथक साबित हो. यदि संसद कोई नए कानून बनाती है तो उन्हें चुनौती मिल सकती है और कोर्ट उन्हें खारिज भी कर सकता है."

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Image caption बीबीसी संवाददाता के अनुसार मुर्सी और सैन्य परिषद के बीच खींचतान कई महीने तक चल सकती है

उनका ये भी कहना है, "शाययद सभी के हितों के लिए ये अच्छा हो कि नए संविधान पर सहमति बनने के बाद संसद भंग हो और नए चुनाव हों. इस बीच दोनों - नए राष्ट्रपति और सैन्य परिषद - ये दिखाना चाहेंगे कि सत्ता उनके हाथ में है. फर्क ये है कि यह संघर्ष इस बार सड़कों पर नहीं लेकिन राजनीतिक अखाड़े में और अदालत में होगा."

मंगलवार को हुई बैठक में साद अल-कातात्नी ने कहा कि सांसदों ने आदेश का उल्लंघन नहीं किया बल्कि वे ऐसी प्रक्रिया शुरु करने पर विचार कर रहे हैं जिससे सम्मानित अदालत के आदेश का पालन किया जा सके.

गौरतलब है कि 30 जून को मुस्लिम ब्रदरहुड समर्थित पार्टी के उम्मीदवार को रूप में मोहम्मद मुर्सी चुनाव जीत गए थे.

लेकिन उनके निर्वाचन से पहले सेना ने खुद को व्यापक अधिकार दिए थे जिनसे राष्ट्रपति का सेना को आदेश देने का अधिकार, सैन्य कमांडरों को कानूनी बनाने का अधिकार और नए संविधान को खारिज करने यानी वीटो का अधिकार शामिल थे.

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