तत्काल में कुछ नहीं तत्काल

Image caption रेल में इस तरह सफर करना कोई नई बात नहीं है.

भारतीय रेल ने मंगलवार से तत्काल टिकट बुकिंग के लिए नए नियम लागू किए हैं जिसके तहत ऑनलाइन और स्टेशनों पर टिकट बुकिंग के लिए विशेष सुविधाएं मुहैया करवाने का दावा किया गया है. हमारे सहयोगी जितेंद्र कुमार ने इंटरनेट के माध्यम से टिकट बुक करने की कोशिश की. वहीं संवाददाता स्वाति अर्जुन पहुंची नई दिल्ली रेलवे स्टेशन. उनके तजुर्बे उन्हीं की जुबानी.

जितेंद्र कुमार, इंटरनेट पर

रेलवे के नए नियमों से उत्साहित, मैंने 9 बजकर 58 मिनट पर भारतीय रेल की वेबसाइट आईआरसीटीसी डॉट को डॉट इन (irctc.co.in) में लॉग इन करने की प्रक्रिया शुरू कर दी. बड़ी राहत मिली, जब वेबसाइट हमेशा की तरह सुबह के समय लॉग-इन करते समय क्रैश नहीं हुई. ये कहना भी गलत होगा कि वो फौरन लॉग-इन हो गई लेकिन दो-तीन मिनट में ही खुल जाना भी कोई मामूली बात नहीं थी.

मुझे दिल्ली से इलाहाबाद के लिए टिकट खरीदनी थी.

लेकिन मामला अटका स्टेशनों के नाम के जिक्र में. टिकट खरीदते समय वेवसाइट में पहले से तैयार सूची में ये भरना होता है कि किस स्टेशन से कहां तक का सफर करना है.

निर्देशानुसार रिक्त स्थान में स्टेशन का पूरा नाम नहीं बल्कि कोड का जिक्र करना होता है. उदाहरण के लिए अगर नई दिल्ली से इलाहाबाद जाना है तो सबसे पहले अंग्रेजी में न्यू डेल्ही लिखना पड़ेगा.

न्यू डेल्ही लिखने के देढ़ से दो मिनट के बाद न्यू देल्ही नाम के साथ इसका कोड एनडीएलएस आता है. उसी तरह इलाहाबाद टाइप करने के बाद लगभग एक मिनट के बाद एएलवाई आता है.

इस प्रक्रिया ने हमेशा की तरह लंबा वक्त लिया. हालांकि अगर आप निजी वेबसाइटों जैसे 'मेक माई ट्रिप' पर जाएंगें तो पहला शब्द डालते ही उस अक्षर से शुरू होने वाले कई विकल्प आ जाते हैं. आप उनमें से एक को चुन सकते हैं खाली जगह में भरने के लिए.

इस प्रक्रिया को पूरा करने में ही 10 बजकर 17 मिनट तक का समय गुजर गया. जिस दौरान प्रयाग राज एक्सप्रेस में स्लीपर क्लास की दो टिकट बची हुईं थीं.

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Image caption भारतीय रेल पर ऐसी यात्रा को आदर्श कह सकते हैं

चूंकि रिसेट का विकल्प 'एक्सपायर' हो गया था इसलिए एक दूसरी टिकट खरीदने के लिए मुझे फिर से लॉग-इन करना पड़ा. टिकट लेनी थी दरभंगा से दिल्ली तक की.

इस बार लॉग-इन करने में 14 मिनट से ज्यादा समय लगा. कई बार तो मन किया कि छोड़ो बाद में कोशिश कर लेंगे.

स्टेशनों का नाम भरने वगैरह में स्लो नेटवर्क पर सात और कीमती मिनट निकल गए और जब मैं टिकट सूची तक पहुंच पाया तो तो मेरा प्रतीक्षा सूची नंबर 110 था.

यही हाल भारत के रेल मंत्री के राज्य पश्चिम बंगाल से दिल्ली आने वाली ट्रेनों का था. सियालदह राजधानी में थर्ड एसी में मामला प्रतीक्षा सूची पर पहुंच गया था जबकि द्वितीय श्रेणी में वेटिंग नंबर था 11.

रेलवे ने कहा है कि ऑनलाइन बुकिंग वेबसाइट सुबह दो घंटों - दस से बारह बजे तक, सिर्फ आम यात्रियों के लिए खुली रहेगी. यानी बुकिंग एजेंट उस पर टिकट खरीदी का काम नहीं कर सकेंगे.

स्वाति अर्जुन, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर

सुबह 10 बजे जब मैं नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंची तो रिजर्वेशन काउंटर पर आम दिनों की तुलना में कम भीड़ नजर आई.

तत्काल टिकटों के लिए कोई अलग से लाइन नहीं दिखी.

नई सुविधाओं के तहत रेलवे ने स्टेशनों पर स्थित बुकिंग काउंटरों में से एक काउंटर सिर्फ तत्काल सेवा चाहने वाले यात्रियों के लिए खोलने का दावा किया है.

वहीं पांच सौ मीटर के लंबे हॉल में में तीन निगरानी कैमरे लगाए गए थे.

काफी लोगों को नए नियम-कायदों के बारे में नहीं पता था. जो लोग अपने पहचान-पत्र की स्वप्रमाणित कॉपी लेकर आए थे उनसे ऑरिजिनल मांगा गया और जो ऑरिजिनल लेकर आए थे उन्हें कहा गया कि जिनके नाम पर टिकट करानी है उन्हें लेकर आएं.

गौतम राय को इसलिए टिकट नहीं दी गई क्योंकि वे ऑरिजिनल पहचान पत्र नहीं लाए थे.

तत्काल टिकट खरीदने के लिए आए काफी यात्री सामान्य लाइनों में लगे थे. जब तक वो बुकिंग कलर्क के पास पहुंचे टिकटें खत्म हो चुकी थीं, वेटिंग खरीदने के अलावा कोई चारा नहीं था.

रेलवे ने नियमो कायदों की जानकारी मुहैया कराने और वहां किसी गड़बड़ी पर नजर रखने के लिए सुपरवाईजर तैनात थे लेकिन उनका वक्त मीडिया पर नजर रखने में ज्यादा लगता दिखाई दे रहा था.

ऐसे ही एक सुपरवाईजर ने कहा कि नियम कायदे तो प्रबंधन बनाता है लेकिन इससे कितना फर्क पड़ेगा ये कहना मुश्किल है.

उन्होंने अपना नाम न बताने की शर्त पर हमसे ये बात कही थी.

एक यात्री सुंदरलाल ने कहा कि अगर सीट 30 हों और दावेदार 3000 तो सबको टिकट कैसे मिलेगी?

उनका मानना था कि एजेंटों पर रोक लगाने से किसी का भला नहीं होने वाला क्योंकि एजेंटों से उन्हें मदद ही मिलती थी.

झारखंड, चाईबासा से वैष्णो देवी यात्रा पर निकलीं निर्मला मिश्रा कहती हैं कि उन्हें 30 वेटिंग मिल रहा है. ऐसे में जितनी थकान यहां हो गई ऐसे में वो आगे यात्रा क्या खाक करेंगी?

लेकिन दिल्ली से हैदराबाद जा रहे श्रीनिवास के मुताबिक पहले के मुकाबले नए नियम बेहतर है. हालांकि वे कहते हैं कि तत्काल के लिए अलग से काउंटर होना जरूरी है.

रेलवे द्वारा अधिकृत एजेंट बालमुकुंद कहते हैं कि उन्हें ना पहले कोई खास फायदा था ना अब नुकसान है. उनका दावा है कि जो भी नुकसान होगा वो पब्लिक का होगा क्योंकि नए समय में लोग काम पर जाने की बजाए टिकट की लाइन में खड़े होने को मजबूर होंगे.

ट्रैवल एजेंट संदीप शर्मा कहते हैं कि रेलवे को ज्यादा ट्रेनें चलानी चाहिए.

उनके अनुसार, "पहले छुट्टियों के मौसम में स्पेशल ट्रेनें चलती थीं जो इस बार नहीं चलीं. इनके मुताबिक गैर-मान्यता प्राप्त एजेंटों की गलती का नुकसान भी इन्हीं को उठाना पड़ता है. अगर सरकार गंभीर है तो उन्हें स्लीपर क्लास के आरक्षण के लिए भी पहचान पत्र लगाना जरूरी करना चाहिए तभी जनता को फायदा होगा और टिकटों की कालाबाजारी पर नकेल लगेगी."

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