कंडोम और गर्भनिरोधकों के लिए ब्रिटेन की मदद

 बुधवार, 11 जुलाई, 2012 को 17:52 IST तक के समाचार
गर्भनिरोधक

विकाशील देशों में महिलाओं के लिए गर्भनिरोधकों की उपलब्धता एक बड़ी समस्या है

ब्रितानी सरकार का कहना है कि वो गरीब देशों में गर्भनिरोधक को बढ़ावा देने के लिए दो अरब डॉलर ख़र्च करेगी.

ब्रितानी सरकार ने यह घोषणा लंदन में परिवार नियोजन पर आयजित एक सम्मलेन में की. इस सम्मलेन में ब्रितानी सरकार के साथ बिल और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन सह आयोजक थे. ऐसी अपेक्षा है कि बिल और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन भी गर्भ निरोधकों के प्रसार के लिए बड़ी रकम की घोषणा करेगा.

मेलिंडा गेट्स में इस मौके पर बोलते हुए कहा कि उनका संस्थान जो भी रकम घोषित करेगा वह कम से कम उतनी तो होगी ही जितनी वह मलेरिया, एड्स और टीबी जैसी बीमारियों से लड़ने के लिए खर्चा करता है.

मेलिंडा गेट्स ने कहा कि उनका फाउंडेशन यह चाहते है कि विकाशीक देशों में महिलाएं गर्भनिरोधकों तक पहुँच चाहती हैं, साथ ही वो इस तरह के गर्भनिरोधक चाहती हैं जो इंजेक्शन के ज़रिये लिए जा सकें.

मेलिंडा गेट्स ने कहा " हम यह चाहते हैं कि साल 2020 तक 12 करोड़ महिलाओं को हम गर्भनिरोधक उपलब्ध करा पाएं. हमारे साथ हमारे सभी सहियोगी मौजूद हैं. हम वितरण की दिक्कतों से तो निपटना चाहते ही हैं लकिन साथ ही हम इस दिशा में नए शोध भी करना चाहते हैं जो महिलाओं को नए तरह के ज़्यादा चलने वाले गर्भनिरोधक उपलब्ध करा पाएं."

फाउंडेशन के परिवार नियोजन डिविज़न के के प्रमुख गैरी डार्मस्टेड ने विकाशील देशों की दिक्कतों के बारे बात करते हुए कहा " सबसे बड़ी समस्या है फंडिंग की, दूसरी समस्या है राजनीतिक इच्छाशक्ति की खास तौर पर उन देशों जो अपने परिवार नियोजन कानून के लिए केवल खुद की ख़र्च करना चाहते हैं."

डार्मस्टेड ने यह भी कहा कि अगर गर्भनिरोधक किसी विकासशील देश में पहुँच भी जाते हैं तो तो वो सप्लाई चेन में दिक्कत के कारण ज़रूरतमंद महिलाओं तक नहीं पहुच पाते. डार्मस्टेड के अनुसार इस काम में दानदाताओं की बीच में समन्वय, जानकारी और गर्भनिरोधकों की कमी भी समस्या का एक बड़ा कारण है.

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