रूस: अदालती 'भ्रष्टाचार' से तंग व्यापारी

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Image caption हाल के दिनों में रूस की अदालतों पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे हैं

रूस में हाल के दिनों में आपराधिक न्याय प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर सड़कों पर काफी प्रदर्शन हुए हैं. इन प्रदर्शनों में व्यापारी वर्ग के भी तमाम लोग शामिल हुए हैं.

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कानून व्यवस्था नीचे से लेकर ऊपर तक पूरी तरह से भ्रष्ट है और उन्हें हर समय गलत तरीके से आपराधिक मामले में फंसाए जाने का डर बना रहता है.

मॉस्को की जिला अदालत के बाहर एक महिला ने जज से अपने पति की खराब सेहत का हवाला देते हुए जमानत देने की अपील की है.

स्तानिस्लाव कांकिया नाम के उसके पति एक अमीर व्यापारी थे, लेकिन इस वक्त वो कैदी हैं. जालसाजी के मामले में पिछले दो सालों से वो जेल में बंद हैं और अदालत के फैसले का इंतजार कर रहे हैं.

बहुत संभव है कि वो दोषी साबित कर दिए जाएं क्योंकि रूस में इस तरह के मुकदमों में महज एक प्रतिशत ही ऐसे मामले होते हैं जिनमें अभियुक्त दोषी साबित न हों और छूट जाएँ.

अभियोग

स्तानिस्लोव को जेल के भीतर पांच बार मस्तिष्क आघात हो चुका है.उनकी जबान लड़खड़ाती है और अक्सर वो कुछ समझ भी नही पाते हैं.

स्तानिस्लोव का कहना है कि उन पर उस अपराध को करने का अभियोग है जो उन्होंने किया ही नहीं है.

स्तानिस्लाव का मामला इस तरह का अकेला नहीं है बल्कि इस तरह के मामले रूस में आम है. उनका आरोप है कि उनके एक व्यापारिक प्रतिद्वंद्वी ने उन्हें गिरफ्तार करने के लिए पुलिस को पैसे दिए थे.

ठीक इसी तरह व्लादिमीर पेरेवेज़िन को दोषी ठहराया गया और वो सात साल से भी ज्यादा का वक्त जेल में बिता चुके हैं.

व्लादिमीर उन लाखों रूसी व्यापारियों में से हैं जिन्हें पिछले दस साल में जेल भेजा जा चुका है. व्लादिमीर का कहना है कि इनमें से ज्यादातर लोगों को जानबूझकर फँसाया गया है और ये काम इनके व्यापार को हथियाने के षड्यंत्र के तहत किया गया है.

व्लादिमीर कहते हैं, "अर्थव्यवस्था पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगी क्योंकि हमारे देश में व्यापारी सुरक्षित नहीं हैं. वो यहां पैसा लगाने में डरते हैं क्योंकि रूस में कोई भी व्यक्ति खुद को सुरक्षित नहीं समझता. यहां अदालतें भी कानून के तहत काम नहीं करतीं."

आलोचकों का कहना है कि कागज पर चाहे जो हो, व्यवहार में अदालतें अपराध के अनुमान पर ही काम करती हैं.

गलत फैसले

भ्रष्टाचार के मुद्दे पर रूस के एक पूर्व पुलिस अधिकारी मरात खिसामुत्दिनोव का कहना है, "यदि कोई व्यक्ति पुलिस के पास बतौर संदिग्ध लाया जाता है तो उसे अदालत से कोई बहुत उम्मीद नहीं रहती और अदालत उसे दोषी करार देता है. यह तय है और ऐसा ही होता है."

कुछ महीने पहले वरिष्ठ क्षेत्रीय जज के पद से इस्तीफा दे चुके सरगेई ज्लोबिन का कहना हैं कि उन्होंने अपने 15 साल के सेवाकाल में हजारों मामलों की सुनवाई की और इस दौरान सिर्फ दो मामलों में अभियुक्त को निर्दोष ठहराया.

सरगेई कहते हैं, "व्यवस्था ऐसी है कि कई बार मुझे भी ऊपर से आए आदेश का पालन करना पड़ा. लेकिन अब मुझे महसूस होता है कि मैंने जो भी किया वो ठीक नहीं था. यही नहीं, वो गैरकानूनी भी था और मुझे इसका बेहद अफसोस है."

पूर्व न्याय मंत्री और सत्तारूढ़ पार्टी के सांसद पावेल क्रशिन्निकोव कहते हैं, "मुझे अपनी व्यवस्था में कोई गड़बड़ी नहीं दिखती. पुलिस के पास नए सुधारों की केवल शुरुआत भर होती है लेकिन जांचकर्ता कई चरणों में अपना काम करते हैं. यदि कोई जज गलती करता है तो उसे बर्खास्त कर दिया जाना चाहिए. या फिर खुद उसे ही जेल भेज देना चाहिए."

हाल ही में राष्ट्रपति पुतिन ने इसके लिए ऑम्बुड्समैन यानी लोकपाल की नियुक्ति की थी. उनका कहना था कि ये लोकपाल इस पर नजर रखेगा कि क्यों इतनी संख्या में व्यापारी जेल में हैं. लेकिन व्यापारियों की नजर में अदालती व्यवस्था में परिवर्तन बेहद जरूरी है और इसे जल्द ही होना चाहिए.

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