कोलंबिया: कर्ज उतना जितना चुकाया जा सके

जूयान गोनज़ालेज़, फल विक्रेता
Image caption जूयान जल्द ही अपने घर में रहने लगेंगे.

अब तक आपने जाना की कैसा है हाल माइक्रो फ़ाइनेंस का भारत के कुछ राज्यों में लेकिन अब जानते हैं कि विदेशों में माइक्रो फ़ाइनेंस की स्थिति क्या है. इसी कड़ी में कोलंबिया की जानकारी दे रहे हैं बीबीसी संवाददाता आर्टुरो वॉलेस.

बोगोटा की सड़कों पर 20 वर्षो से भी अधिक समय तक फल बेचने वाले जूयान डे जीजज़ गोनज़ालेज़ जल्द ही अपने घर के मालिक बनने वाले हैं.

अपनी इस सफलता पर ख़ुशी व्यक्त करते हुए गोनज़ालेज़ कहते हैं, ''मेरा घर अगले सप्ताह तक तैयार हो जाएगा.''

सात साल पहले उन्होंने फ़ंडेसियन मुंडो मुजेर नाम की एक माइक्रो फ़ाइनेंस कंपनी से तीन सौ डॉलर क़र्ज़ लिया था और उसे अपने कारोबार में लगा दिया.

आज उनके पास फल बेचने की तीन दुकानें हैं और उन्होंने अपने क़र्ज़ की क़िस्तों को हमेशा समय पर चुकाया जिसके कारण उन्हें बैंक से बड़ी आसानी के साथ लोन मिल गया.

माइक्रो फ़ाइनेंस कंपनी के एक कर्मचारी जेम पोरास कहते हैं, ''कारोबार को धीर-धीरे आगे बढ़ाना बहुत महत्वपूर्ण है लेकिन उससे भी ज़्यादा अहम ये है कि आप अपने ग्राहकों को ठीक से जानें.''

माइक्रो फ़ाइनेंस कंपनी

कोलंबिया के दक्षिणी प्रांत कॉका के पोपायन शहर में गठित फंडेसियन मुंडो मुजेर आज कोलंबिया की सबसे बड़ी माइक्रो फ़ाइनेंस कंपनियों में से एक है.

इस कंपनी की देश भर में 112 शाखाएं हैं और क़र्ज़ देने के लिए कंपनी के पास लगभग 37 करोड़ डॉलर है लेकिन किसी भी ग्राहक को एक हज़ार डॉलर से ज्यादा क़र्ज़ नहीं दिया जाता है.

माइक्रो फ़ाइनेंस बहुत तेज़ी से कोलंबिया में एक बड़ा व्यापार बनता जा रहा है. माइक्रो फ़ाइनेंस उद्योग के संगठन 'एसोमाइक्रोफ़ाइनेंसेज़' के अनुसार फिलहाल माइक्रो फ़ाइनेंस के ज़रिए 445 अरब डॉलर का व्यापार किया जाता है जो पिछले साल की तुलना में 20 प्रतिशत अधिक है.

एसोमाइक्रोफ़ाइनेंसेज़ की कार्यकारी अध्यक्ष मारिया क्लारा होयोज़ के अनुसार अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में कोलंबिया के बेहतरीन प्रदर्शन को इसका एक कारण कहा जा सकता है लेकिन स्थानीय माइक्रो फ़ाइनेंस संस्थाओं के ज़रिए अपनाए गए तरीक़े सफलता की सबसे बड़ी वजह है.

Image caption फंडेसियन मुंडो मुजेर कोलंबिया के सबसे बड़े माइक्रो फ़ाइनेंस कंपनियों में से एक है

होयोज़ ने बीबीसी से बातचीत करते हुए कहा, ''माइक्रो फ़ाइनेंस कंपनियां इस बात को सुनिश्चित करती हैं कि ग्राहकों को उतना क़र्ज़ नहीं दिया जाए जितनी उनकी मांग होती है बल्कि उन्हें उतना ही क़र्ज़ दिया जाए जितना वो चुकाने की क्षमता रखते हैं.''

भारत में माइक्रो फ़ाइनेंस के बारे में होयोज़ का कहना था, ''माइक्रो फ़ाइनेंस एक विशेषज्ञता है. भारत में समस्या ये है कि वहां माइक्रो फ़ाइनेंस कंपनियों को क़र्ज़ देने के लिए मजबूर किया गया और बहुत सारे लोगों को पता ही नहीं था कि उसे कैसे किया जाए. ये तरीक़ा सही नहीं था.''

सशक्त नियामक संस्था

होयोज़ के अनुसार कोलंबिया की सभी माइक्रो फ़ाइनेंस कंपनियों को एक तयशुदा दिशानिर्देश का पालन करना पड़ता है.

कोलंबिया में माइक्रो फ़ाइनेंस कारोबार की कामयाबी का एक बड़ा कारण वहां की सशक्त वित्तीय संस्थाएं और काफ़ी मज़बूत नियामक संस्थाएं हैं.

क़र्ज़ देने वाले साहूकारों पर निगरानी रखने के लिए सूदख़ोरी विरोधी क़ानून बना हुआ है और ब्याज की अधिकतम दर तय है.

इसीलिए शायद भारत की तुलना में कोलंबिया से माइक्रो फ़ाइनेंस के बारे में अच्छी ख़बरें आती हैं लेकिन इसके बावजूद माइक्रो फ़ाइनेंस के मामले में दक्षिण अमरीकी देशों में कोलंबिया का नंबर सबसे पहले आने वालों देशों में नहीं है.

द इकॉनोमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट के ज़रिए तैयार किए गए माइक्रो फ़ाइनेंस इंडेक्स के अनुसार कोलंबिया का नाम सांतवें नंबर पर है.

इस इंडेक्स में पेरू और बोलीविया का नाम सबसे पहले है.

लेकिन इसके बावजूद कोलंबिया में माइक्रो फ़ाइनेंस से जुड़ी ज़्यादातर ख़बरें बहुत सुखद हैं और अपने मकान के बारे में बात करते समय जूयान डे जीजज़ गोनज़ालेज़ के चेहरे पर आने वाली मुस्कुराहट इस बात का सबूत है.

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