इटली: मुसोलीनी का बंकर, सुरक्षा की तलाश

मुसोलीनी का बंकर
Image caption मौत की डर से मुसोलीनी ने बंकर बनाने का आदेश दिया.

इटली के शासक मुसोलिनी ने हवाई हमले से बचने के लिए अपने घर के नीचे एक बंकर बनवाया था जिससे पता चलता है कि अपने आख़िरी दिनों में वे कितने भयभीत थे.

मुसोलिनी अपने परिवार के साथ लगभग 18 साल तक राजधानी रोम के टोरलोनिया विला में रहते थे. इसी घर में उन्होंने अपनी ज़िदंगी के सारे उतार चढ़ाव देखे.

इस शानदार विले को अब एक मुज़ियम बना दिया गया है और अंदर-बाहर से इसकी शानदार बनावट को देखकर कहा जा सकता है कि मुसोलिनी ने वहां बहुत आराम की ज़िंदगी गुज़ारी होगी.

बंगले के अंदर मुसोलिनी के जीवन से जुड़ी कई ऐतिहासिक तस्वीरें भी लगीं हुई हैं.

इसी बंगले में मुसोलिनी की मुलाक़ात भारत के महात्मा गांधी से हुई थी.

मुसोलिनी का डर

लेकिन दूसरे विश्व युद्ध में जैसे-जैसे इटली का पलड़ा कमज़ोर होने लगा, मुसोलिनी को अपने परिवार वालों के जीवन की चिंता सताने लगी.

वे सोचने लगें कि अगर मित्र राष्ट्र उनके निवास स्थान को हवाई हमलों का निशाना बनाते हैं तो उस परिस्थिति में उनके परिवार वालों को कैसे बचाया जाए.

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Image caption मुसोलीनी और हिटलर एक बैठक के दौरान

इटली की वायु सेना ने 1935 में ख़ुद तत्कालीन एबीसीनिया के विरूद्द हवाई हमला करके वहां बम बरसाए थे.

अब मुसोलिनी को ये डर सताने लगा था कि वे भी हवाई हमले के शिकार हो सकते हैं.

इसी कारण उन्होंने अपने बंगले के अंदर एक मज़बूत बंकर बनाने का हुक्म दिया.

मुसोलिनी को इस बात का भी डर था कि मित्र राष्ट्र की सेना उनके ख़िलाफ़ गैस बम का इस्तेमाल कर सकती है इसलिए बंकर को चारों तरफ़ से सील कर दिया गया ताकि हवा अंदर ना आ सके.

लेकिन इन सबके बावजूद मुसोलिनी को पूर्ण सुरक्षा का विश्वास नहीं हो रहा था इसलिए उन्होंने ज़मीन से कई मीटर नीचे एक और बंकर बनाने का आदेश दिया.

आज उस बंकर में जाते समय ऐसा लगता है कि आप किसी पंडुब्बी में चले जा रहे हैं, बंकरों को और अधिक मज़बूती प्रदान करने के लिए उनके रास्तों को बेलनाकार बनाया गया था.

बंकर के काम में देरी हो रही थी और उनके दुश्मन और क़रीब आ रहे थे. इस बारे में मुसोलिनी ने अपनी डायरी में लिखा है कि उन्होंने इस बात की चिंता सताए जा रही थी कि बंकर समय पर तैयार नहीं हो सकेंगे.

मुसोलिनी की बात सही साबित हुई क्योंकि जुलाई 1943 तक जब मुसोलिनी अपनी सत्ता छोड़ने पर मजबूर हुए, उस समय तक ये बंकर बनकर तैयार नहीं हो सका था.

यहां तक कि उन्हें मिलान शहर में गोली मार दी गई और उनका शव कई दिनों तक सड़कों पर पड़ा रहा.

लेकिन आज भी वो बंकर उसी तरह है जिस समय यहां काम बंद किया गया था.