लीबिया: चुनाव में उदारवादियों का बोलबाला

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Image caption महमूद जिब्रील के गठबंधन को सबसे अधिक 39 सीटें मिली हैं

लीबिया में कर्नल गद्दाफी का तख्तापलट के बाद हुए पहले संसदीय चुनावों में उदारवादी दलों के गठबंधन नेशनल फोर्सेज एलायंस को सबसे अधिक सीटें मिली हैं.

इसे लीबिया में पिछले कुछ दशकों में हुए पहले स्वतंत्र चुनाव बताया जा रहा है. वर्ष 1969 में सत्ता में आए कर्नल गद्दाफी का वर्ष 2011 में जनांदोलन और विद्रोह के बाद तख्तापलट हुआ था.

गद्दाफी की मौत और लीबिया में विद्रोह

पूर्व अंतरिम प्रधानमंत्री महमूद जिब्रील के नेतृत्व वाले नेशनल फोर्सेज एलायंस ने राजनीतिक दलों के लिए आरक्षित 80 सीटों में से 39 पर जीत हासिल की है जबकि मुस्लिम ब्रदरहुड की राजनीतिक शाखा को 17 सीटें मिली हैं.

लीबियाई संसद में 200 सीटें हैं और बाकी की सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों को मिली हैं जिनकी राजनीतिक विचारधारा फिलहाल स्पष्ट नहीं है.

त्रिपोली में बीबीसी संवाददाता राणा जवाद के मुताबिक, "मतदाताओं में अधिकतर युवा हैं और नतीजों से पता चलता है कि युवाओं ने उन उम्मीदवारों के खिलाफ वोट दिया है जिनका धार्मिक एजेंडा है. इन नतीजों के खिलाफ अपील करने के लिए दो हफ्ते का समय है. इन चुनावों में 30 महिला सांसद भी चुनकर आई हैं. संसद अब नई अंतरिम सरकार और संविधान के मसौदे पर काम करेंगी."

छिटपुट हिंसा, 62 प्रतिशत मतदान

वर्ष 1952 में लीबिया की स्वतंत्रता के ठीक बाद पहली और आखिरी बार स्वतंत्र चुनाव हुए थे. 1965 में आखिरी बार राष्ट्रीय चुनाव का आयोजन हुआ जब राजनीतिक पार्टियों को हिस्सा लेने की इजाजत नहीं थी.

यूरोपीय चुनाव पर्यवेक्षकों का कहना है कि सात जुलाई के चुनाव आम तौर पर शांतिपूर्ण रहे हालाँकि कई जगहों से तकनीकी कारणों से देरी और छिटपुट हिंसा की खबरें आती रही हैं.

चुनाव आयोग के मुताबिक 62 प्रतिशत वोटरों ने अपने अधिकार का इस्तेमाल किया.

राष्ट्रीय चुनाव आयोग के प्रमुख नूरी अल अबारे ने एक प्रेसवार्ता में चुनावी नतीजों की जानकारी दी.

उन्होंने कहा, "नेशनल फोर्सेज अलायंस को 39 सीटें मिली हैं. इसके अलावा जस्टिस एंड कंस्ट्रक्शन पार्टी को 17 सीटें, नेशनल फोर्स पार्टी को तीन, वैली लाइफ अलायंस फॉर डेमोक्रेसी एंड डेवलपमेंट को दो और यूनियन फॉर होमलैंड को दो सीटें मिली हैं."

दर्जनों निर्दलीय सांसद

दो सौ सदस्यों वाली राष्ट्रीय एसेंबली में दर्जनों आजा़द सदस्य होंगे. इसीलिए पूरी एसेंबली में क्या सोच सबसे ज्यादा जगह बना पाएगी, ये अभी साफ नहीं है.

Image caption दशकों बाद हुए स्वतंत्र चुनावों में 30 महिलाएँ भी जीती हैं

ये भी देखना दिलचस्प होगा कि 120 आजाद उम्मीदवार किसे अपना समर्थन देते हैं या फिर किसी ओर झुकते हैं.

इस चुनाव में 100 से ज्यादा दलों ने हिस्सा लिया. इनमें से ज्यादातर पार्टियों का गठन हाल ही कुछ महीनों में हुआ है.

राष्ट्रीय एसेंबली को वैधानिक अधिकार होंगे और उम्मीद की जा रही है कि इसका गठन जल्द ही हो जाएगा.

चुनाव आयोग के मुताबिक 62 प्रतिशत वोटरों ने अपने अधिकार का इस्तेमाल किया.

पिछले हफ्ते बीबीसी को दिए गए साक्षात्कार में जिब्रील ने पार्टियों से कहा था कि वो एक संयुक्त सरकार बनाने के लिए काम करें.

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