खतना पर प्रतिबंध रद्द करने की तैयारी

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Image caption जर्मनी में लड़कों का खतना करने पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद बहस छिड़ गई है कि क्या माता पिता को अपने बच्चों के लिए ये फैसला लेना का अधिकार है.

जर्मनी के निचले सदन में गुरुवार को सभी पार्टियों के सांसद बच्चों का खतना करवाए जाने के अधिकार को सुरक्षित रखने का प्रस्ताव पारित करनेवाले हैं.

एक जिला अदालत ने देश में छोटे लड़कों का खतना करने पर प्रतिबंध लगाया था जिसका यहूदी और मुस्लिम समुदाय ने कड़ा विरोध किया.

यहूदी और मुस्लिम समुदाय में खतना को धार्मिक श्रद्धा का आधार माना जाता है.

विदेश मंत्री गुइडो वेस्टरवेल ने कहा कि ये प्रस्ताव दर्शाता है कि जर्मनी एक सहनशील देश है.

उन्होंने कहा, “अगर जर्मनी ने यहूदी नागरिकों के अपने बेटों का खतना करवाने पर रोक लगा दी तो दुनिया में ये किसी को भी समझाया नहीं जा सकेगा.”

अदालत के प्रतिबंध लगाने के फैसले के बाद जर्मन चांसलर एंगला मर्केल ने कहा था कि इससे उनका देश दुनिया के लिए मखौल का पात्र बन सकता है.

‘यहूदी धर्म पर हमला’

पर अदालती फैसले के बाद जर्मनी के डॉक्टरों की सबसे प्रमुख समिति ने अपने सदस्यों को खतना करने से मना किया है. उसे डर है कि इसे गैरकानूनी मानकर डॉक्टरों को सजा दी जाएगी.

जर्मनी में मुसलमान समुदाय के लोग ज्यादा हैं, इसलिए खतना भी ज्यादा मुसलमान बच्चों पर ही किया जाता है.

लेकिन इस फैसले से यहूदी भी नाराज हैं. एक यहूदी धर्मगुरू यानि रब्बी का कहना है कि यूरोप में हिटलर के समय किए गए यहूदियों के नरसंहार के बाद, अब ये फैसला उनके धर्म पर घातक हमला है.

इतने विरोध के बाद अब जर्मनी की सभी पार्टियों के सांसद एकजुट हो ये संकेत देना चाहते हैं कि कानून में बदलाव लाया जाएगा.

हालांकि जर्मनी में किए गए एक सर्वेक्षण के मुताबिक देश की जनता में प्रतिबंध पर मत विभाजित है.

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