लीबिया में युवा और उदारवाद

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Image caption लीबिया की नई पीढ़ी ने इस्लामियों के खिलाफ मतदान किया था न कि किसी खास व्यक्ति या उसकी पार्टी के खिलाफ.

पिछले दिनों लीबिया में आधी शताब्दी में पहली बार चुनाव हुए जबकि सारा विश्व नज़रे गढ़ाए देख रहा था, और मिस्र और ट्यूनीशिया में भी ऐसा ही होने की उम्मीद कर रहा था. नतीजों में सामने आया है कि मतदाताओं ने धार्मिक मंच से प्रचार न करने वाले दलों की तलाश में मतदान किया और उत्तरी अफ्रीका के रुझानों का विरोध किया था.

तो फिर कौन हैं वो वोटर जो उदारवाद की मांग कर रहे हैं?

लीबिया के लोगों के चुनावों में फैसलों को समझने के लिए हम यहां एक नया प्रचलन देखने आए हैं.

यह नया रेडियो स्टेशन है जिसे कम तजुर्बे या बिना किसी तजुर्बे वाले युवा लोग चलाते हैं और देश के युवाओं के दिलों तक पहुंचता है.

स्वागत कक्ष में एक युवक सुस्ती से सोफे पर बैठा है और गिटार बजा रहा है. मॉडल की तरह दिखने वाली एक पतली 18 वर्षीय लड़की अपने सहयोगी के साथ इस्लाम और उदारवाद के बीच बहस कर रही है.

युवा पीढ़ी

जैसे जैसे आप इसे सुनते हैं आप जानते हैं कि लीबिया की नई पीढ़ी ने इस्लामियों के खिलाफ मतदान किया था न कि किसी खास व्यक्ति या उसकी पार्टी के खिलाफ. कुछ यहां काम करने वाले करीम की तरह

वे कहते हैं, ''लीबिया के 80 प्रतिशत लोगों ने उदारवादी पार्टियों को चुना. कोई भी जो बहुत धार्मिक है या फिर आपको डराता है, या कहता है कि वो आपको पीटेगा, इन लोगों से डर लगता है.''

इस चुनाव में लड़ने वाली हर पार्टी ने दावा किया था कि वो शरिया कानून को केवल विधेयक बनाने के लिए एक रेफरेंस के तौर पर देखेगी, या फिर कानून के अकेले स्रोत की तरह.

चुनाव में कई पार्टियों ने हिस्सा लिया जिनमें से कुछ बाकियों से अधिक उदारवादी थीं. मुसलमान ब्रदरहुड की जस्टिस और कंस्ट्रक्शन पार्टी के कुछ सदस्यों के लिए कुछ अहसास है कि वो क्यों इतना अच्छा नहीं कर पाए.

पार्टी के सलेह शिलवी बताते हैं: ''हमने लोगों के अपनी बात साफ करने की कोशिश की थी. लेकिन कुछ और लोग समाज के लिए समस्या पैदा कर रहे हैं. गलियों में वो सबको एक ही समझते हैं. इसी वजह से वोटों का नुक्सान हुआ. वे मुस्लिम ब्रदरहुड और बाकियों के बीच फर्क नहीं कर पाए.''

वापस रेडियो स्टेशन पर दो युवा आधुनिक ख्याल की महिलाएं निलोफर और अमरिया अपने महिलाओं के कार्यक्रम की शुरुआत कर रही हैं.

धर्म और सरकार

निलोफर कहती हैं, ''मैने गैर-इस्लामी पार्टी के लिए मतदान किया. धर्म आपके और खुदा के बीच है न कि आपके और सरकार के बीच.''

अमरिया ने कहा, ''मैं देर तक काम करती हूं और मर्दों के साथ भी काम करती हूं. मैं और पढ़ना चाहूंगी. लोग अत्याचार से तंग आ चुके हैं और अब किसी तानाशाह से दबना नहीं चाहते. सरकारें ऐसी काम नहीं करती.''

परिभाषाओं पर हर जगह अलग अगल राय है. उदारवादी खुद को धर्मनिरपेक्ष की तरह नहीं देखना चाहते और उदारवादी इस्लामी खुद को कट्टरपंथियों की तरह नहीं देखना चाहते. बहरहाल, रुढ़िवादी संगठनों को कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई उनके बारे में क्या सोचता है.

तो अपने आप को मुसलमान मानने वाले लीबिया के वोटरों ने आखिर में नीति बनाने वालों के लिए मतदान किया बजाय उनके जो उपदेशक हैं और जिनके बारे में डर है कि वो उन्हें उसी ओर भेज सकते हैं जिनके बदलाव के लिए उन्होंने बगावत की थी.

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