सीरिया के खिलाफ प्रस्ताव पर रूस और चीन का वीटो

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Image caption रूस-चीन के वीटो की पश्चिमी देश निंदा कर रहे हैं

सीरिया के खिलाफ और ज्यादा प्रतिबंध लगाने वाले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव पर रूस और चीन ने वीटो कर दिया है.

रूस का कहना है कि पश्चिमी देशों के समर्थन वाला ये प्रस्ताव अस्वीकार्य है क्योंकि इसे सैन्य कार्रवाई के जरिए भी लागू किया जा सकता है.

सीरिया पर प्रतिबंधों के मामले में रूस और चीन, दो बार पहले भी वीटो कर चुके हैं.

पश्चिमी देशों के समर्थन वाली प्रतिबंधों की इस योजना में कहा गया था कि सीरिया की सरकार आबादी वाले इलाकों से अपने भारी हथियारबंद सैनिकों को वापस नहीं बुलाती तो उसके खिलाफ संयुक्त राष्ट्र के चैप्टर सात के तहत असैन्य प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं.

वीटो की वजह

रूस ने चैप्टर सात के इस्तेमाल की वजह से ही इस प्रस्ताव का विरोध किया है. संयुक्त राष्ट्र में रूस के राजदूत विताली चुर्किन ने तर्क दिया कि इससे सीरिया के घरेलू मामलों में बाहरी सैन्य हस्तक्षेप का रास्ता खुल सकता है.

लेकिन अमरीकी राजदूत सुज़ेन राइस का कहना है कि सीरिया की सरकार पर दबाव बढ़ाने के लिए अमरीकी सरकार अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के दायरे से बाहर निकलकर काम करेंगी.

वहीं जर्मनी जैसे देशों ने रूस और चीन की आलोचना की है. बर्लिन में जर्मनी के विदेश मंत्री गुइडो वेस्टरवेले ने वीटों पर अपनी निराशा जाहिर की है.

उन्होंने कहा, ''न्यूयॉर्क में जो फैसला हुआ, वो खेदजनक है. मैं रूस और चीन के वीटो की भर्त्सना करता हूं. इस वीटो से उन्हें मजबूती मिलेगी जो सीरिया में हिंसा को और बढ़ाना चाहते हैं.''

उन्होंने ये भी कहा कि विश्व ने सीरिया के लोगों को निराश किया है लेकिन वे समाधान की लगातार तलाश करते रहेंगे.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को अभी ये तय करना है कि सीरिया में संयुक्त राष्ट्र मिशन की मीयाद बढ़ाई जाए या नहीं जिसकी अवधि शुक्रवार को खत्म हो रही है.

बताया जाता है कि ब्रिटेन वीटो हो चुके प्रस्ताव का प्रारूप बदल रहा है जिसमें इसे 30 दिनों के लिए बढ़ाने की बात कही गई है.

हमले की कार्रवाई तेज

इसबीच सीरिया की राजधानी दमिश्क में सैनिकों ने विद्रोहियों के खिलाफ हमले की कार्रवाई तेज कर दी है.

सीरिया के सरकारी टेलीविज़न पर दिखाया गया है कि राष्ट्रपति बशर अल असद की सेना टैंको, हेलीकॉप्टरों और भारी हथियारों की मदद से विपक्षी लड़ाकों को निशाना बना रही है.

राष्ट्रपति असद के खिलाफ 16 महीने पहले शुरु हुई बगावत के बाद से राजधानी दमिश्क में इस तरह की कार्रवाई पहली बार हो रही है.

खबरें हैं कि हमले की इस कार्रवाई में विद्रोहियों को बहुत नुकसान पहुंचा है.

खबरें ये भी हैं कि लड़ाकों ने सीरिया की सीमाओं पर कई बॉर्डर-पोस्ट पर नियंत्रण कर लिया है. सूत्रों ने बीबीसी को बताया कि तुर्की-सीरिया सीमा पर फ्री सीरियन आर्मी ने इदलिब प्रांत के दो रास्तों पर नियंत्रण कर लिया है.

वहीं पूर्वी सीमा पर इराकी अधिकारियों का कहना है कि विद्रोहियों ने ईरान और सीरिया के बीच स्थित अबु कमाल सीमा पर कब्जा कर लिया है.

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