दो दशक बाद स्वदेश लौटीं बहुमूल्य कलाकृतियां

कलाकृतियां
Image caption ये मूर्तियां अफगानिस्तान में चले गृह युद्ध के दौरान चोरी हो गई थी

अफगानिस्तान से लगभग 22 साल पहले सैकडों की संख्या में चोरी की गई पुरातात्त्विक कलाकृतियों को रविवार को एक समारोह के दौरान नेशनल म्यूजियम को लौटा दिया गया है.

अफगानिस्तान में वर्ष 1990 के दौरान हुए गृह युद्ध के दौरान 843 कलाकृतियों को लूटा गया था.

अफगानिस्तान नेशनल म्यूजियम के मुख्य निरीक्षक फहीम रहीमी इन कलाकृतियों की वापसी का कई महीनों से इंतजार कर रहे थे.

फहीमी ने उन तीन बड़ी नारंगी रंग की पेटियों की डिलीवरी ली.

जब इसमें से एक पेटी खोली गई तो उसमें सबसे पहले बुद्ध की प्रतिमा दिखाई दी .

चोरी किए गए इन सामनों में गौतम बुद्ध की प्रतिमा, हाथियों के दांत पर बनी गहन नक्काशी की कलाकृतियां शामिल है जो करीब 4000 वर्ष पुरानी है.

लंदन में मौजूद ब्रिटिश संग्रहालय के मदद से इन कलाकृतियों की वापसी हो पाई है.

चोरी की गई इन कलाकृतियों की वापसी ब्रितानी सीमा बल और पुलिस ने बरामद की थीं जबकि अन्य चीज़ो को कुछ निजी स्तर पर इन्हें इकट्ठा करने वालो से प्राप्त किया गया.

फहीम का कहना था, '' मैं बहुत खुश हूं लेकिन केवल पुरातात्त्विद होने के नाते ही नहीं.''

राष्ट्रीय गर्व

उनका कहना था, ''मैं एक अफगान होने के नाते खुश हूं. ये सभी कलाकृतियां बहुत अहम है हमारे इतिहास और संस्कृति के लिए जो अब हमारे पास वापस आ गई हैं.''

इसमें से एक गौतम बुद्ध की प्रतिमा करीब 1800 वर्ष पुरानी है जो काबुल के म्यूजियम से चोरी की गई थी और जापान में बरामद की गई.

ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने इन कलाकृतियों को वापस अफगानिस्तान भेजा था.

अफगानिस्तान के पुरातत्व विभाग का कहना है कि पुरातात्त्विक दृष्टि से जिन अमूल्य कलाकृतियों को खोया हुआ मान लिया गया था ,ये कलाकृतियां राष्ट्रीय गर्व की स्रोत हैं.

गृह युद्ध के दौरान नेशनल म्यूजियम की दो तिहाई कलाकृतियों को चुरा लिया गया था या बर्बाद कर दिया गया था.

काबुल में मौजूद बीबीसी के संवाददाता अलीम मकबूल का कहना है कि अफगानिस्तान के भविष्य को लेकर जिस तरह की अस्थिरता घेरे हुए है ऐसे में इन कलाकृतियों के भविष्य को लेकर चिंता बनी रहेगी.

लेकिन अफगानिस्तान में पुरातत्त्विद का कहना है कि बहुमूल्य कलाकृतियों का वापस आना बेशक एक राष्ट्रीय गर्व की बात है.

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