अमरीका को आत्म-मंथन की ज़रूरत: ओबामा

Image caption मारे गए लोगों के शव अभी तक परिवारजनों को नहीं सौंपे गए हैं

अमरीका के विस्कॉन्सिन राज्य के गुरुद्वारे में हुए हमले पर राष्ट्रपति ओबामा ने चिंता व्यक्त की है और कहा है कि अमरीकियों को आत्म-मंथन करने की ज़रूरत है.

उन्होंने अमरीका में बंदूक से किए जाने वाले हमलों को रोकने के लिए कदम उठाने की बात भी कही है.

बराक ओबामा ने कहा, “मैं पहले भी कह चुका हूं कि इस तरह के हमलों में में कई तत्वों का हाथ होता है. मैं चाहता हूं कि कानून की सख्ती के साथ-साथ समुदायों, धार्मिक गुरुओं और निर्वाचित अधिकारियों के साथ मिल कर ये तय किया जाए कि हम हिंसा रोकने में कैसे कामयाब हों.”

इस बीच अमरीकी जांच एजेंसी एफ़ बी आई ने करीब 32 घंटों की जांच पड़ताल के बाद ये मान लिया है कि हमला करने वाला अकेला आदमी था.

हमलावर का नाम वेड माईकल पेज था, जो 40 वर्ष का श्वेत अमरीकी था. पेज पूर्व सैनिक था जो 1992 से 1998 तक अमरीकी सेना में शामिल था.

पेंटागन का कहना है कि पेज मनोवैज्ञानिक अभियानों का विशेषज्ञ था मगर उसे 1998 में पद्दोन्नति ‎के बाद सेना से निवृत्त कर दिया गया था.‎

नस्लीय हमला?

कुछ खबरें ऐसी भी आ रही हैं कि पेज नस्ल के आधार पर भेदभाव करने वाले गुटों के साथ भी शामिल था.

लेकिन अधिकारिक तौर पर इस बात की पुष्टि नहीं की गई है कि ये हमला नस्ल के आधार पर भेदभाव से प्रेरित था.

फिलहाल एफ़ बी आई इस मामले में जांच कर रही है औऱ इसको संभावित आंतरिक आतंकवाद के तौर पर जांच रही है.

एफ़बीआई की अधिकारी टेरेसा कार्लसन ने कहा,“एफ़बीआई फ़िलहाल जाँच कर रही है कि कहीं ‎ये घटना घरेलू आतंकवाद की एक घटना तो नहीं. मगर अभी इसके पीछे के उद्देश्य के बारे में ‎कोई जानकारी नहीं है.”

इस सिलसिले में पेज के घरवालों औऱ उसके दोस्त और जानने वालों से गहन पूछताछ जारी है.

सिखों के खिलाफ़ इस हमले के नस्ल के आधार पर प्रेरित होने के शक पर अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “अभी हम पूरी तरह नहीं जानते कि इस हमलावर ने क्यों हमला किया. लेकिन अगर ये साफ़ हो जाता है, जैसा कि कुछ खबरों में कहा गया, कि ये हमला उस गुरुद्वारे के लोगों के खिलाफ़ नस्ल से प्रेरित है, तो मुझे लगता है कि अमरीकी लोग इसे एक घृणत हरकत की तरह देखेंगे. हमारे लिए बहुत ज़रूरी होगा कि हम फिर इस बात पर ज़ोर दें कि इस देश में हमारा चाहे कोई भी रंग हो, नस्ल हो, या लोग जिस धर्म को भी मानने वाले हों इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता. हम सब एक हैं और एक-दूसरे का सम्मान करते हैं.”

पेज का घर गुरुद्वारे से कुछ मील दूर है और उनके घर की तलाशी ली गई है, जहां से कई सुराग पुलिस के हाथ लगे हैं.

शवों का इंतज़ार

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Image caption भारत में हमले के विरोध में सिखों ने सड़कों पर अपना आक्रोश प्रदर्शित किया

एफ़बीआई ने बताया कि इस हमलावर ने 9 मिलिमीटर की हैंडगन से हमला किया था. इस बंदूक में विभिन्न प्रकार की मैगज़ीन लगाई जा सकती हैं जिससे तेज़ी से गोलियां चलाई जाती हैं.

इस हमले में मारे जाने वालों में 5 पुरूष औऱ एक महिला शामिल हैं. इनमें से 4 लोग भारतीय नागरिक थे.

मारे जाने वालों में गुरूद्वारे के अध्यक्ष सतवंत सिहं कलेका भी शामिल हैं.

हमले के समय गुरूद्वारे के अंदर फंसे लोगों ने बाद में बताया कि सतवंत सिंह ने लोगों क जान बचाने के लिए हमलावर को पकड़ने की कोशिश की लेकिन उसने उन्हें गोली मार दी.

जो तीन लोग घायल हैं, उनमें एक पुलिस वाला भी शामिल है जिसने सबसे पहले हमलावर का सामना किया. इस पुलिसकर्मी के शरीर में नौ गोलियां लगी हैं.

उधर हमले की जांच कर रही एफ़बीआई ने मरने वालों की लाशें उनके परिवार वालों को अभी तक नहीं दी हैं जिससे लोगों में बेचैनी है.

विस्कॉन्सिन में एक सिख संस्था ‘य़ूनाईटेड सिख’ के कुलदीप सिंह कहते हैं, “इतना बड़ा हादसा हुआ है, लोग अभी भी बहुत परेशान हैं और रो रहे हैं. खासकर मरने वालों के परिवारजन अभी भी अपने मृतकों की अंत्येश्टि करने का इंतेज़ार कर रहे हैं.”

पूरे अमरीका में सिखों के गुरूद्वारों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है.

इस बीच विसकॉन्सिन में हमले के एक दिन बाद मिशिगन राज्य के जोपलिन शहर में एक मसजिद में आग लगी जिससे मस्जिद पूरी तरह ध्वस्त हो गई है.

कुछ स्थानीय मुसलमान इसको कथित तौर पर नस्ल भेदी हमला बता रहे हैं. अभी इस मामले में एफ़ बी आई की जांच जारी है.

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