चोर के हाथ काटना चाहता था इस्लामी गुट...

माली (फ़ाइल) इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption माली के कुछ हिस्से पर कट्टरपंथियों के कब्ज़े का लगातार विरोध हो रहा है.

ख़बरों के मुताबिक अफ्रीकी देश माली के उत्तरी क्षेत्र में सैकड़ों लोगों ने एक चोर के हाथ काटे जाने के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया है.

क्षेत्र में मौजूद एक कट्टरपंथी इस्लामी गुट जुर्म के लिए चोर के हाथ काटना चाहता था लेकिन विरोध के बाद सज़ा को टाल दिया गया है.

चरमपंथी गुट से तालुक्क़ रखने वाले बंदूक़धारियो ने एक रेडियो प्रस्तुतकर्ता को इसलिए पीटा क्योंकि उसने गाओ शहर के नागरिकों से कहा था कि वो हाथ काटे जाने की सज़ा का विरोध करें. लेकिन इससे डरने की बजाए लोगों का ग़ुस्सा और पनपा और वो फिर से सड़कों पर आ गए.

मार्च में देश में हुए फौजी विद्रोह के बाद इस इलाक़े पर इस्लामी कट्टरपंथी गुटों और धर्म-निरपेक्ष टूआरेग विद्रोहियों का क़ब्ज़ा हो गया था. लेकिन बाद में कट्टरपंथियों और टूआरेग में मतभेद पैदा हो गए.

'हम परवाह नहीं करते'

क्षेत्र के तीन प्रमुख शहरों - गाओ, टिंबक्टू और किदाल पर इस्लामी गुटों का क़ब्ज़ा है.

गुट ने टिंबक्टू स्थित कुछ धार्मिक स्थलों को हाल में क्षति पहुंचाई थी. पिछले हफ़्ते एक जोड़े को पत्थर मारकर मौत की सज़ा सुनाई गई थी. इस जोड़े ने विवाह के बिना शारीरिक संबंध क़ायम किया था.

मानवधिकार संगठनों ने इन घटनाओं की कड़े शब्दों में निंदा की है.

मूवमेंट फ़ॉर वननेस एंड जिहाद इन वेस्ट अफ़्रीका ने अपने ही एक साथी - अब्दुल मलिक मैगा, को इसलिए मौत की सज़ा सुनाई थी क्योंकि उसने हथियार चुराकर बेचने का जुर्म किया था.

समाचार एजेंसी एएफ़पी ने एक नागरिक के हवाले से कहा है, "हमें नहीं मालूम कि इस नौजवान ने क्या किया था, लेकिन हम उसके हाथ काटे जाने को बर्दाश्त नहीं करेंगे."

गाओ के अस्पताल के चिकित्सकों ने एएफ़पी को बताया है कि अब्दुल मलिक मैगा को अब होश आ गया है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स का कहना है कि मूवमेंट के प्रवक्ता ने कहा है कि वो धर्म-निरपेक्षता, प्रजातंत्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की परवाह नहीं करते हैं.

प्रवक्ता का कहना था कि लोगों को समझ लेना चाहिए कि चाहे उन्हें पसंद हो या न हो शरिया का़नून को लागू किया जाएगा.

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