पाक प्रशासित कश्मीर से आए सिराज बने भारतीय नागरिक..

सिराज खान
Image caption सिराज खान पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर से वर्ष 1995 में भाग कर भारत आ गए थे और यहीं बस गए थे.

अगर भारत में रह रहा कोई शख्स पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर का रहने वाला हो, तो भारत सरकार की नज़र में वो पाकिस्तानी नागरिक समझा जाएगा या भारतीय ?

और अगर ये इंसान खुद ये स्वीकार करे की वो अवैध तरीके से भारत में रह रहा है और अदालत से आग्रह करे की उसे वापिस पाकिस्तान भेज दिया जाए तो ऐसे में सरकार के सामने क्या विकल्प हो सकते हैं ?

सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में महाराष्ट्र सरकार के सामने यही सवाल उठाया गया. राज्य के एडवोकेट जनरल ने मुंबई में गैरकानूनी तौर पर लंबे अर्से से रह रहे, पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के निवासी सिराज खान को भारतीय घोषित कर दिया.

अदालत ने सिराज खान के उपर लगाए गए अवैध पाकिस्तानी नागरिक होने का इल्ज़ाम भी वापस ले लिया है.

सिराज अब भारतीय पासपोर्ट बनाने की तैयारी कर रहे हैं ताकि वो भारतीय नागरिक की हैसियत से मनशेरा जाकर अपने माता-पिता से मिल सकें.

महाराष्ट्र सरकार के एडवोकेट जनरल का तर्क था कि पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर भारतीय संविधान के अनुसार भारत का एक अभिन्न हिस्सा है, इस लिहाज़ से 30 साल के सिराज खान को भारत की नागरिकता दे दी गई है.

खुशी के लम्हें

अदालत के इस फैसले के बाद बीबीसी हिंदी डॉट-कॉम से बातचीत करते हुए सिराज ने कहा, "आज के फैसले से मैं बहुत खुश हूं, हमें तीन साल के बाद राहत मिली है."

सिराज खान को मुंबई से प्यार है लेकिन उनका पूरा परिवार मनशेरा में है और वो जल्द से जल्द अपने घर के लोगों से मिलने वहां जाना चाहते हैं.

सिराज के अनुसार, "मुझे ऐसा लगता है मैं दोनों देशों का शहरी हूँ. मेरे मां बाप, मेरा पूरा परिवार मनशेरा में हैं और मैं भारतीय पासपोर्ट पर वहां जाकर उन सबसे मिलना चाहता हूं."

सिराज के वकील एजाज़ नक़वी के अनुसार सिराज अब एक भारतीय नागरिक हैं. उनका कहना था, "आज के केस की सबसे बड़ी उपलब्धि ये थी कि सिराज को एक हिन्दुस्तानी करार दे दिया गया है. उनके खिलाफ़ अवैध तौर पर पाकिस्तानी होते हुए यहाँ रहने के जो भी मामले थानों में दर्ज थे वो अब खारिज हो गए हैं."

सिराज खान वर्ष 1995 में नौ साल की उम्र में मनशेरा से भाग कर भारत चले आए थे.

सिराज पहले बनारस में रहे और उसके बाद मुंबई आ गए जहां उन्हें एक भारतीय मुसलमान लड़की से प्यार हो गया और साल 2003 में उन्होंने उसी भारतीय लड़की से शादी कर ली. सिराज अब तीन बच्चों के पिता हैं.

उपलब्धि

सिराज खान लंबे समय से पाकिस्तान जाना चाहते थे. इस कोशिश में वे वाघा सीमा तक भी गए लेकिन पाकिस्तान नहीं जा पाए.

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Image caption भारत-पाक सीमा पर तैनात भारतीय सुरक्षा बल के सैनिक

वे कई बार दिल्ली स्थित पाकिस्तानी दूतावास भी गए लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली. उन्होंने मुंबई सीआईडी से भी कहा की उन्हें पाकिस्तान भेज दिया जाए लेकिन किसी ने उनकी एक भी नहीं सुनी.

अंत में करीब तीन साल पहले उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया और अदालत के सामने गुहार लगाई कि उन्हें पाकिस्तान भेज दिया जाए.

एक सप्ताह पहले मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने महाराष्ट्र सरकार को डांट लगाते हुए कहा कि आखिर उन्होंने एक अवैध नागरिक को अब तक मुंबई में रहने की इजाज़त कैसे दे दी थी.

अदालत के अनुसार इस तरह की लापरवाही देश के लिए खतरा बन सकती है.

अदालत ने राज्य सरकार के एडवोकेट जनरल को बुलाकर कहा, "'पाक प्रशासित कश्मीर के मनशेरा इलाके के निवासी सिराज को एक भारतीय नागरिक स्वीकार कर लेना चाहिए क्योंकि पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर भारत का एक अटूट हिस्सा है.''

सरकार ने सिराज के खिलाफ़ दर्ज सभी केस वापस ले लिए हैं. इस फैसले से सिराज तो खुश हैं ही, वकीलों के अनुसार इससे राज्य सरकार का सरदर्द भी खत्म हो गया है.

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