यूरोजोन में गिरावट से संकट गहराने के आसार

 बुधवार, 15 अगस्त, 2012 को 04:23 IST तक के समाचार
यूरो की मुश्किलें

यूरोप के कर्ज संकट ने यूरो की मुश्किलें बढ़ा दी हैं

यूरो मुद्रा का इस्तेमाल करने वाले 17 देशों में पिछली तिमाही के दौरान आर्थिक विकास की दर में 0.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है.

इससे पहले की तिमाही यानी जनवरी से मार्च माह के दौरान यूरोजोन में विकास दर शून्य थी.

यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जर्मनी में विकास दर 0.3 फीसदी पर ठहर गई तो फ्रांस की अर्थव्यवस्था में गतिहीनता की स्थिति बरक़रार है.

फ्रांस की अर्थव्यवस्था में पिछली दो तिमाहियों में भी विकास दर शून्य के आंकड़े पर रही थी.

गिरावट का साया

बेरेनबर्ग बैंक के क्रिश्चियन शूल्ज़ का कहना है, "जर्मनी ने यूरोज़ोन से बाहर के मुल्कों में निर्यात को बढ़ाकर अपनी स्थिति में बेहतरी कर ली है."

जर्मनी में अर्थव्यवस्था पर शोध करने वाली एक संस्था के प्रमुख मर्सेल फ्रैटज़र का कहना है, "बाज़ार को भी 0.3 फीसदी के आंकड़े की उम्मीद थी, इसलिए ये बुरी ख़बर नहीं मानी जा रही. बुरी खबर ये है कि जर्मन अर्थव्यवस्था में धीमेपन का दौर शुरू हो रहा है. दूसरों की तरह मुझे भी नहीं लगता कि यहां मंदी शुरू हो रही है लेकिन धीमेपन के हालात ज़रूर पैदा हो गए हैं. और ये दूसरी तिमाही में भी जारी रहेगा."

"बाज़ार को भी 0.3 फीसदी के आंकड़े की उम्मीद थी, इसलिए ये बुरी ख़बर नहीं मानी जा रही. बुरी खबर ये है कि जर्मन अर्थव्यवस्था में धीमेपन का दौर शुरू हो रहा है. दूसरों की तरह मुझे भी नहीं लगता कि यहां मंदी शुरू हो रही है लेकिन धीमेपन के हालात ज़रूर पैदा हो गए हैं. और ये दूसरी तिमाही में भी जारी रहेगा."

मर्सैल फ्रैटज़र, अर्थव्यवस्था के जानकार

यूरोजोन के अन्य देशों में पुर्तगाल के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी में 1.2 फीसदी की कमी आई है, तो साइप्रस में गिरावट का प्रतिशत 0.8 और इटली में 0.7 रहा.

ऑयरलैंड और ग्रीस पर आंकड़े अभी जारी नहीं हुए हैं. ग्रीस में दूसरी तिमाही में गिरावट 6.2 फीसदी थी.

डांवाडोल हालात

इस तिमाही में यूरोपीय संघ में भी अर्थव्यवस्था में 0.2 फीसदी गिरावट दर्ज की गई है. यूरोपीय संघ में कुल 27 सदस्य देश हैं.

पहली तिमाही के दौरान विकास दर से ये तो साबित नहीं होता कि यूरोज़ोन में मंदी का दौर शुरू हो गया है लेकिन ये तय है कि स्थिति पूरे साल डांवाडोल रहेगी.

एक बैंकर का कहना था कि इसका नतीजा ये होगा आने वाले दिनों में बजट में कटौती होगी जबकि ऋण दर और सरकार पर कर्ज का बोझ बढ़ेगा.

उनके मुताबिक साल की तीसरी तिमाही यानी अक्तूबर से दिसंबर के बीच अर्थव्यवस्था में सिकुडा़व आएगा.

यूरोज़ोन के कई सदस्य देश पहले से ही क़र्ज़ संकट के बोझ से जूझ रहे हैं. इस स्थिति में अर्थव्यवस्था में गिरावट दिक्क़तों को और बढ़ाएगी.

मदद से इनकार

बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि जर्मनी में अर्थव्यवस्था की पतली हालत जनता को सोचने पर मजबूर कर देगी कि उन्हें सरकार को कर्ज संकट झेल रहे मुल्कों जैसे ग्रीस और स्पेन वगैरह की मदद करने की छूट दी जाए या नहीं.

यूरो मुद्रा

यूरोप के 17 देश यूरो मुद्रा का इस्तेमाल करते हैं.

वो ये भी सोच सकते हैं कि अभी तक दी गई मदद ने खुद उन पर संकट के बादल ला दिए हैं और इस पर लगाम लगाने की ज़रूरत है.

हालांकि फ्रांस लगातार दो बार नकारात्मक विकास दर दर्ज करने के बाद मंदी में नहीं फंसा जैसा कि काफी हल्कों में कहा जा रहा था, लेकिन देश में पिछले 14 महीनों से बरोज़गारी की दर में इज़ाफा हो रहा है और कहा जा रहा है कि जल्द ही कई कंपनियां बड़ी कटौतियों की घोषणा करने वाली हैं.

कुल मिलाकर यूरोज़ोन क्षेत्र की अर्थव्यवस्था नीचे की तरफ भाग रही है जिसका असर ब्रिटेन और जर्मनी को मुसीबत में डाल सकता है.

फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा है कि अर्थव्यवस्था को और अधिक सहारा देने की ज़रूरत है लेकिन ठीक उसी समय व्यवसाय जगत ने चेतावनी दी है कि मुल्क में आर्थिक नीतियों में बदलाव लाए जाएं ताकि सरकार पर पड़ रहे ख़र्च में कटौती हो और देश में निवेश के लिए बेहतर माहौल तैयार किया जा सके.

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