मुश्किलों में डूबता 'अफ्रीका का वेनिस'

 शनिवार, 18 अगस्त, 2012 को 20:59 IST तक के समाचार
गांवी

पश्चिम अफ्रीकी देश बेनिन के दक्षिण में गांवी इस क्षेत्र का सबसे बड़ा झील समुदाय है जहां लोग पानी पर बसे हैं.

नोकोउए नदी पर बने इस गांव में लगभग 45 हजार लोग रहते हैं और उनकी जिंदगी पानी पर लकड़ी के मचान पर बने मकानों और तैरती हुई नौकाओं पर गुजरती है.

कभी ये मनोरम नजारा बहुत से सैलानियों को अपनी तरफ खींचा करता था. लेकिन हाल के वर्षों में वहां जाने वाले पर्यटकों की संख्या में गिरावट आई हैं और वहां का बुनियादी ढांचा भी दरक रहा है.

गांवी में न तो वेनिस की विश्व प्रसिद्ध नहरों में चलने वाली नावें यानी गोंडोला हैं और न हर तरफ गूंजता हुआ इतालवी संगीत. वहां तो बस नोकोउए नदी पर तैरता हुआ एक गांव है.

छोटी छोटी पारंपरिक नौकाएं हैं जो लकड़ी के मचान पर पानी से कुछ फुट ऊंचाई पर बने मकानों के इर्द-गिर्द धूमती रहती हैं.

पानी पर तैरती जिंदगी

"पीने के पानी की हमें बहुत ज्यादा समस्या है. पहले हमें पानी को निकालने के लिए जेनरेटर की जरूरत नहीं पड़ती थी. लेकिन अब पड़ती है और इसके लिए हमारे पास पर्याप्त ईंधन भी नहीं है और कुछ लोगों को पानी लिए बिना ही घर जाना पड़ता है."

लोकोसो अकपालिला

स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र को छोड़ कर बाकी सब चीजें पानी के ही बीचोंबीच हैं. पानी पर तैरते बाजार में आप फल और सब्जियां खरीद सकते हैं. सिकिला अकपाकदा का कारोबार भी नाव पर ही चलता है.

रोजाना वो पड़ोसी गांव से माल लेकर गांवी पहुंचती हैं. वो बताती हैं, “मैं ईंधन और तेल बेचती हूं. कभी कभी लोग आते हैं, तेल और ईंधन ले जाते हैं, पैसे बाद में देते हैं. इसी से मेरा और मेरे परिवार का गुजारा चलता है.”

एक दंतकथा के अनुसार इस गांव की स्थापना टोफीनू कबीले के लोगों ने की जो पूर्व औपनिवेशक में काल में अलग अलग राज्यों से बीच छिड़ी लड़ाई से बचने के लिए एक विशाल पक्षी के पंखों पर बैठ कर इस इलाके में आए थे. उन्होंने इस गांव को बसाना शुरू किया और इसे गांवी नाम दिया, जिसका मतलब एक ऐसी जगह जहां शांति कायम की गई हो.

ये कहानी यहां आने वाले पर्यटकों को अकसर सुनाई जाती है. ये बात अलग है कि अब यहां बहुत कम पर्यटक आते हैं.

सरकार से निराश

एक गेस्ट हाउस की मैनेजर आंद्रेया ओनिकपो कहती हैं, "तीन चार साल से पर्यटन में बहुत गिरावट आई है. पर्यटकों की संख्या घटती ही जा रही है." पर्यटकों की घटती संख्या की वजह गांवी में घूमने के लिए नौका के बढ़ते हुए दाम हैं.

"पहले एक और कुआं होता था, लेकिन वो टूट गया. इसलिए बहुत सारे लोग यहां आए, जिनमें आसपास के गांवों के लोग भी हैं. कभी कभी तो इनती भीड़ हो जाती है कि उसे संभालना मुश्किल होता है. लोगों को पानी मिलने में तीन तीन दिन लग जाते हैं."

लोकोसो अकपालिला

साथ ही आंद्रेया इसकी वजह हाल में आई कुछ प्राकृतिक आपदाओं को भी बताती हैं.

वो कहती हैं, “2010 के आखिरी दिनों में यहां बड़ी बाढ़ आई. ये पूरा गांव और आसपास झील में बसे दूसरे गांव पूरी तरह जलमग्न हो गए. जो लोग जा सकते थे, वे सूखी जगहों पर चले गए, और जिनके लिए ऐसा मुमकिन नहीं था, वे यहीं रहे. यहां तक कि गेस्ट हाउस में भी बुरी तरह पानी भर गया. लोगों को खुद ही कर सब कुछ करना और संभालना पड़ा. सरकार हम लोगों के लिए कुछ नहीं करती है.”

नदी के दूसरी तरफ भी स्थिति बहुत अच्छी नहीं है. इकलौते कुएं के पास नौकाओं की लंबी कतार खड़ी है. उन पर बैठी महिलाएं और बच्चे चिल्ला रहे हैं और उनके हाथों में पानी के बर्तन हैं.

पानी की किल्लत

कुएं से पानी निकालने वाले जनरेटर की व्यवस्था और रख रखाव की जिम्मेदारी इन लोगों को खुद ही निभानी होती है. पानी के बंटवारे का काम भी उन्हें ही देखना होता है.

स्थानीय जल संघ के सदस्य लोकोसो अकपालिला बताते हैं, "पीने के पानी की हमें बहुत ज्यादा समस्या है. पहले हमें पानी को निकालने के लिए जेनरेटर की जरूरत नहीं पड़ती थी. लेकिन अब पड़ती है और इसके लिए हमारे पास पर्याप्त ईंधन भी नहीं है और कुछ लोगों को पानी लिए बिना ही घर जाना पड़ता है."

बड़े से हैट के नीचे उनके चेहरे पर चिंता साफ झलकती है. वो कहते हैं, "पहले एक और कुआं होता था, लेकिन वो टूट गया. इसलिए बहुत सारे लोग यहां आए, जिनमें आसपास के गांवों के लोग भी हैं. कभी कभी तो इनती भीड़ हो जाती है कि उसे संभालना मुश्किल होता है. लोगों को पानी मिलने में तीन तीन दिन लग जाते हैं."

बेशक अफ्रीका के इस छोटे से वेनिस के पास उतने संसाधन तो नहीं हो सकते जितने इटली के विश्व प्रसिद्ध वेनिस के पास हैं. लेकिन उम्मीद है कि गांवी में रहने वाले लोगों की मेहनत और रचनात्मकता के साथ ये गांव यूं ही पानी पर तैरता रहेगा.

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.