नकली डॉलर, नकली यूरो सब छपता है पेरू में

 रविवार, 26 अगस्त, 2012 को 08:41 IST तक के समाचार

बडी़ संख्या में नकली अमरीकी डॉलर बाज़ार में हैं

दुकानदार आपसे हज़ार या पाँच सौ का एक नोट लेकर उसके असली होने की पहचना ढूँढ़ने लगता है तो आपको लगता होगा कि नकली नोट की समस्या सिर्फ़ भारत की समस्या है.

लेकिन ऐसा नहीं है. इस समस्या से अमरीका जैसा शक्तिशाली देश भी पीड़ित है.

अधिकारी कहते हैं कि अमरीका में जितने भी नकली नोट चल रहे हैं उसमें से क़रीब 17 प्रतिशत दक्षिण अमरीकी देश पेरु से बनकर आते हैं.

वैसे पेरू में कितने नकली नोट बनते हैं और बाहर भेजे जाते हैं इसका अभी कोई हिसाब नहीं है.

नकली नोटों का कोराबार भी संगठित अपराध की तरह चलता है और इसके पीछे बड़े गिरो हैं.

ग़रीबों की मुसीबत

वैसे तो ये चिंता की बात लगती है लेकिन पेरू के केंद्रीय रिज़र्व बैंक का मानना है कि इससे अर्थव्यवस्था को कोई ख़तरा नहीं है. इससे घाटा निम्न आय वाले वर्ग को होता है जिनके पास नकली नोट जाने का मतलब होता है कि वे इस पैसे से हाथ खो सकते हैं.

"अधिकारी एयरपोर्ट से पैसे ले जानेवाले को तो पकड़ रहे हैं मगर उसे नहीं जो ये पैसे भेज रहा था"

जॉर्ज गोन्ज़ाल्वेज़, पूर्व मंत्री

बैंक के एक अधिकारी ने कहा कि इसी कारण से लोगों को असली और नकली नोटों की पहचान करने के लिए जागरूक बनाया जा रहा है.

पेरूवासी भी इस समस्या को समझ रहे हैं और वे ख़ासतौर पर बड़ी रकम वाले नोटों को लेकर सतर्क रहते हैं.

वहाँ दूकानों और होटलों में नकली नोटों को पकड़ने वाले साधन लगाए जा रहे हैं, जैसे कि अल्ट्रावायलेट रोशनी और विशेष तरह के कलम. टैक्सी ड्राईवर तो जिन नोटों पर संदेह होता है उन्हें हवा में खड़काकर उसकी जाँच करते हैं.

पेरू की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा अनौपचारिक अर्थव्यवस्था है जहाँ कि नकली पहचान पत्र और कागज़ात काले बाज़ार में ख़रीदे जा सकते हैं.

पेरू के रास्ते नशीले पदार्थों, सामानों और मानवों की भी तस्करी होती है.

मगर अभी ये कहना मुश्किल है कि नकली नोटों का इन अवैध कारोबारों से कोई संबंध है कि नहीं.

दस नकली के बदले एक असली डॉलर

तस्कर नकली नोटों को बाहर निकालने के लिए तरह-तरह के तरीके आज़माते हैं

पेरू सरकार नकली नोट को समस्या मानकर इसपर रोक लगाने के लिए क़दम उठा रही है. जालसाज़ों को 12 साल तक की जेल हो सकती है. सीमा सुरक्षा को भी चुस्त किया जा रहा है.

मगर पेरू के एक अर्थशास्त्री और पूर्व मंत्री प्रोफ़ेसर जॉर्ज गोन्ज़ाल्वेज़ कहते हैं कि दिक्कत ये है कि अधिकारी छोटी मछलियों को पकड़ रहे हैं सरगनाओं को नहीं जो पेरू में भी हैं और विदेशों में भी.

वे कहते हैं,"अधिकारी एयरपोर्ट से पैसे ले जानेवाले को तो पकड़ रहे हैं मगर उसे नहीं जो ये पैसे भेज रहा था."

वैसे अंतरराष्ट्रीय सहयोग और खुफ़िया जानकारियों के आदान-प्रदान का असर पड़ रहा है और अमरीकी ख़ुफ़िया सेवा के अनुसार इस वर्ष पेरू से नक़ली नोटों की तादाद में चार प्रतिशत की गिरावट आई है.

लेकिन प्रोफ़ेसर गोन्ज़ाल्वेज़ का कहना है, जबतक ये कारोबार फायदा देनेवाला बना रहेगा, ये बंद नहीं होगा.

उनके हिसाब से पेरू से हर 10 नकली नोट को बाहर पहुँचानेवाले को बदले में एक असली डॉलर मिलता है. और लाखों-करोड़ों की संख्या में नोटों को बाहर पहुँचाने पर लाभ बहुत बड़ा हो सकता है.

उनका कहना है कि मुनाफ़ा इतना अधिक है कि यदि पुलिस ने पेरू में इस पर रोक लगाई तो वो कहीं और चले जाएँगे. और यदि नकली डॉलर पर लगाम लगाई गई तो जालसाज़ यूरो या दूसरी मुद्राएँ छापने लग जाएँगे.

नशीली दवा की तरह तस्करी

हाल ही में पुलिस ने एक गिरोह के दो सदस्यों को पकड़ा है जिसे पुलिस रोड्रिगेज़ परिवार के नाम से पुकारती है.

"ऐसे नोटबुक मिले हैं जिनके कवर पर पेरू की पारंपरिक चित्रकला छपी है जिससे कि वो कोई संग्रहणीय कलाकृति जैसी लगे. इन नोटबुकों के भीतर ऐसे खाँचे हैं जहाँ डॉलर छिपाए जा सकते हैं और वे सब के सब कार्बन पेपर में रखे हैं जिससे कि वे एक्स-रे जाँच में ना पकड़े जा सकें"

एक अधिकारी

वर्ष 2009 में इस परिवार के दो सदस्यों की गिरफ़्तारी के बाद मान लिया गया था कि अब ये गिरोह ख़त्म हो गया लेकिन ऐसा था नहीं.

पुलिस का कहना है कि कई महीनों तक चले अभियान के बाद इस परिवार के दो और सदस्यों को पकड़ा गया है और साथ ही लगभग 70 लाख डॉलर के बराबर नकली नोट बरामद किए गए हैं जिनमें यूरो भी हैं और पेरू की मुद्रा सोल भी.

पेरू पुलिस की अपराध जाँच शाखा के निदेशक सीज़र कोर्टिजो बताते हैं कि इन नोटों में से अधिकतर नोटों को विदेशों में भेजने की तैयारी थी, ठीक उसी तरह से जैसे कि नशीले पदार्थों का कारोबार करनेवाले गिरोह करते हैं.

अधिकारी ने बीबीसी को बताया, "ऐसे नोटबुक मिले हैं जिनके कवर पर पेरू की पारंपरिक चित्रकला छपी है जिससे कि वो कोई संग्रहणीय कलाकृति जैसी लगे. इन नोटबुकों के भीतर ऐसे खाँचे हैं जहाँ डॉलर छिपाए जा सकते हैं और वे सब के सब कार्बन पेपर में रखे हैं जिससे कि वे एक्स-रे जाँच में ना पकड़े जा सकें."

पुलिस का कहना है कि इस वर्ष अभी तक एक करोड़ 70 लाख डॉलर के नकली नोट ज़ब्त किए जा चुके हैं जिनमें से अधिकतर नोट अमरीका और ऐसे देशों में भेजे जानेवाले थे जहाँ डॉलर चलता है, जैसे कि इक्वाडोर.

अमरीकी अधिकारी मानते हैं कि पेरू विदेशों में नकली डॉलरों को बनाने का एक बड़ा केंद्र है जहाँ के नोट अमरीका में चलन में हैं.

अमरीकी ख़ुफ़िया सेवा के एक प्रवक्ता ब्रायन लीयरी ने कहा, "हमने पहली बार पेरू में बना नोट 2003 में पकड़ा. ये लगातार बढ़ रहे हैं और अभी अमरीका में बाज़ार में मौजूद नकली नोटों में से 17% नोट पेरू से बनकर आए हैं."

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