चिंटू ने 'वॉल ' की जगह ली

 शुक्रवार, 24 अगस्त, 2012 को 14:48 IST तक के समाचार

चेतेश्वर पुजारा ने अपने चौथे टेस्ट में 159 रन बनाए

वैसे तो दो साल पहले ही अपने पहले टेस्ट में जिस तरह से चेतेश्वर पुजारा ने चौथी पारी में 72 रन बना कर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत को जीत दिलाई थी, उससे उनकी प्रतिभा की थोड़ी सी झलक तो क्रिकेट प्रेमियों को मिल ही गई थी.

पिछले दिनों इंडिया के वेस्ट इंडीज दौरे में जिस तरह से उन्होंने बल्लेबाजी की उससे यह तय हो गया कि भारतीय टीम में उनकी वापसी अब कुछ ही दिनों की बात है.

न्यूज़ीलैंड के खिलाफ हैदराबाद टेस्ट में उन्होंने जिस तरह की बल्लेबाज़ी की उससे तो यही लगा है कि राहुल द्रविड़ और लक्ष्मण के जाने के बाद भी भारत के पास उनका अच्छा विकल्प मौजूद है.

एक छोर संभाले रखा

पुजारा ने इस पारी में बड़े शॉट्स के लालच को दबा कर रखा और पूरी पारी में धैर्य और एकाग्रता की प्रतिमूर्ति बने रहे. क्रीज़ का एक छोर संभाल कर उन्होंने गेंदबाजों को थकाने की रणनीति अपनाई जिसका कि भारतीय बैटिंग ऑर्डर में अब नामोनिशान नहीं दिखाई देता.

उनकी इस पारी को तीन भागों में बाँटा जा सकता है. एक तो चाय से पहले का समय जब उन्होंने सिर्फ इस बात पर जोर दिया कि आउट नहीं होना है और सिर्फ 54 रन बनाए.

चाय के बाद उन्होंने न्यूज़ीलैंड की गेंदबाज़ी की धज्जियां उड़ाने पर जोर दिया और बातों ही बातों में 90 पर पहुँच गए. इसी दौरान उन्होंने आठ चौके लगाए और केन विलियम्सन की गेंद पर छक्का भी मारा.

शतक मारने के बाद वह फिर चुप हो गए और सात ओवर खेल कर न सिर्फ उन्होंने दूसरी नई गेंद की चमक को कम किया बल्कि नाबाद पवेलियन भी लौटे. दूसरे दिन वह दोहरे शतक के लिए खेल रहे थे लेकिन 159 के स्कोर पर वह अपना धैर्य खो बैठे और कैच आउट हो गए.

तिहरे शतक के स्पेशलिस्ट

पूर्व रंजी खिलाड़ी अरविंद पुजारा के पुत्र चेतेश्वर ने घरेलू क्रिकेट में रनों का अंबार लगा दिया है. चौदह वर्ष से कम उम्र के वर्ग में बड़ौदा के खिलाफ तिहरा शतक लगा कर वह पहली बार सुर्खियों में आए.

अंडर 19 क्रिकेट में उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ दोहरा शतक जड़ा और अपने दूसरे ही प्रथम श्रेणी मैच में उन्होंने सौराष्ट्र के खिलाफ सैकड़ा जड़ दिया.

2007-8 के रंजी सत्र में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले पाँच बल्लेबाजों में उन्होंने अपने आप को दर्ज कराया. अगले साल उन्होंने सौराष्ट्र के लिए फिर दो तिहरे शतक लगाए.

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बंगलोर टेस्ट में उन्हें भारत की तरफ से खेलने का पहला मौका मिला. उनको यह पता ही नही था कि जिस दिन वह अपना पहला टेस्ट खेल रहे थे उसी दिन उनकी माँ की पाँचवी बरसी थी.

इस पारी के दौरान पुजारा उन पाँच भारतीय बल्लेबाज़ों में शामिल हो गए जिन्होंने अपने पहले टेस्ट की चौथी पारी में अर्धशतक लगाया है.

बहुत चुपचाप रहने वाले चेतेश्वर पुजारा को उनके नजदीकी लोग चिंटू के नाम से पुकारते हैं. राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर और रिकी पौन्टिंग उनके पसंदीदा खिलाड़ी हैं.

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