ख़तना से नुकसान कम, फ़ायदे ज्यादा होने का दावा

 सोमवार, 27 अगस्त, 2012 को 17:34 IST तक के समाचार
ख़तना

पूरी दुनिया में बसे मुसलमानों और यहूदियों में ख़तना एक सामान्य धार्मिक प्रथा है.

अमरीका के शिकागो स्थित बालरोग पर शोध करने वाली संस्था द अमरीकन एकेडेमी ऑफ पीडीऐट्रिक्स ने अपने ताज़ा बयान में कहा है कि नवजात बच्चों में किये जाने वाली ख़तना या सुन्नत प्रक्रिया से होने वाले फायदे, इस सर्जिकल प्रक्रिया के दौरान उठाए जाने वाले खतरे से कहीं ज्यादा है.

हालांकि इन चिकित्सकों के समूह ने व्यापक तौर पर नवजात बच्चों में सुन्नत या ख़तना करने की सिफ़ारिश करने से इंकार करते हुए इसका अंतिम फैसला बच्चों के माता-पिता पर छोड़ दिया है.

चिकित्सकों के इस नज़रिए पर बदलाव की वजह कुछ वैज्ञानिक सबूत हैं जिनके आधार पर यह साफतौर पर कहा जा सकता है कि जो बच्चे ख़तने की प्रक्रिया से गु़जरते हैं, उनमें कई तरह की बीमारियां होने की संभावना कम हो जाती है.

इनमें ख़ासतौर पर छोटे बच्चों के यूरिनरी ट्रैक्ट में होने वाले इंफेक्शन, पुरुषों के गुप्तांग संबंधी कैंसर, यौनसंबंधों के कारण होने वाली बीमारियां, एचआईवी और सर्वाइकल कैंसर का कारक ह्युमन पैपिलोमावायरसर यानि एचपीवी शामिल है.

इससे पहले 1999 में एकेडेमी ऑफ पीडीऐट्रिक्स द्वारा जारी किया गया वक्तव्य पूरी तरह से निष्पक्ष रहा था लेकिन इस नए वक्तव्य में संस्था ने इस शारीरिक प्रक्रिया के फायदे बताए हैं.

एकेडेमी का ये कदम उन अभिभावकों का समर्थन करता है जो अपने बच्चे का ख़तना करवाते हैं.

सिडार्स-सिनाई मेडिकल सेंटर के बालरोग विशेषज्ञ और खतना पर शोध करने वाले चिकित्सक दल के नेता डॉ. एंड्रयु फ्रीडमैन कहते हैं कि, ''हम किसी को ऐसा करने के लिए बाध्य नहीं कर रहे हैं. हम सिर्फ ये कहना चाहते हैं कि अगर कोई अभिभावक अपने बच्चे के हित में ऐसा करना चाहते हैं तो उसके फायदे काफी हैं.''

एक हज़ार से भी ज्य़ादा विज्ञान संबंधी लेखों पर आधारित इस पत्रिका में कहा गया है कि ऐसा नहीं लगता कि ख़तना या सुन्नत का असर पुरुषों की यौन क्रिया क्षमता, लिंग की संवेदनशीलता या यौन संतुष्टि पर पड़ता है.

एकेडेमी ने कहा कि नवजात बच्चों के माता-पिता को इस बारे में निष्पक्ष जानकारी दी जानी चाहिए ताकि वे मुक्त होकर फैसला ले सकें.

हालांकि चिकित्सकों के दल ने इस बात पर ज़रुर ज़ोर दिया है कि ये पूरी प्रक्रिया प्रशिक्षित लोगों द्वारा ही होना चाहिए जो साफ-सफाई के साथ-साथ इस प्रक्रिया के दौरान बच्चों को कम से कम तकलीफ़ होने पर ध्यान दें.

बहस

"एकेडेमी औपचारिक तौर पर अब तक इस प्रथा का विरोध करता रहा है लेकिन अगर इससे हम एचआईवी और एचपीवी के मामलों पर रोक लगा सकते हैं तो हम इसका समर्थन करेंगे. "

डॉ. पीटर रिशेल, प्रमुख, नॉर्दन वेस्टचेस्टर हॉस्पिटल, माउंट किस्को

ख़तना एक शारीरिक शल्यक्रिया है जिसमें आमतौर पर मुसलमान और यहूदी नवजात बच्चों के लिंग के उपर की चमड़ी काट कर अलग की जाती है.

अमरीकी समाज का एक बड़ा वर्ग बेहतर स्वास्थ्य के लिए इस प्रथा को मानने लगा है, लेकिन अब इस पर एक बहस शुरु हो गई है.

इतना ही नहीं सान-फ्रांसिसको और जर्मनी में तो इस पर प्रतिबंध लगाए जाने की भी मांग होने लगी है.

पिछले हफ्ते ही जर्मनी में एक डॉक्टर ने नवजात बच्चों का खतना करने के आरोप में एक दूसरे यहूदी धर्मगुरु के खिलाफ़ अदालत में केस दर्ज किया है.

इससे पहले कलोन प्रांत की अदालत ने ऐसा ही एक फैसला सुनाते हुए ख़तना पर रोक लगा दी थी.

इस नए दिशा-निर्देश के साथ ही अमरीका में नवजात बच्चों के ख़तना संबंधी विवाद को एक बार फिर से हवा मिल सकती है जिसको पिछले कुछ सालों में सही चिकित्सीय तर्क के अभाव में टाला जा रहा था.

न्यूयॉर्क के माउंट किस्को स्थित नॉर्दन वेस्टचेस्टर हॉस्पिटल के प्रमुख डॉ. पीटर रिशेल के अनुसार, ''एकेडेमी औपचारिक तौर पर अब तक इस प्रथा का विरोध करता रहा है लेकिन अगर इससे हम एचआईवी और एचपीवी के मामलों पर रोक लगा सकते हैं तो हम इसका समर्थन करेंगे.''

विरोध

इस वक्तव्य के आने से दो दिन पहले ही ख़तना का विरोध करने वाले समूह 'इंटैक्ट-अमरीका' ने अपने तर्क में कहा है कि ये दिशा-निर्देश, बड़ी उम्र के अफ्रीकी पुरुषों पर किए गए शोध पर आधारित है.''

ख़तना

ये पहली बार जब ख़तना के फायदे बताए गए हैं, इससे पहले के सभी वक्तव्यों में ख़तना के संबंध में निष्पक्ष राय दी गई थी.

इंटैक्ट अमरीका के प्रबंध निदेशक जॉर्जगैन चैपिन के अनुसार, ''जांच समूह विकसित देशों से मिले व्यापक सबूतों को नज़रअंदाज़ कर रहा है जिसमें साफ-साफ कहा गया है कि इसका कोई फायदा नहीं है. पूरी तरह से ना नकारे जाने के बावजूद एक नवजात बच्चे की मर्जी जाने बगैर उसके शरीर के अंग को अलग करना नैतिक तौर पर गलत है.''

एकेडेमी के जांच दल के सदस्य डॉ. डगलस डाईकीमा के अनुसार, ''समूह ने इस मुद्दे पर बच्चे को होनी वाली तकलीफ के अलावा माता-पिता के अधिकारों पर सोच-विचार किया है. ख़तना का फैसला टाले जाने पर इससे जुड़े खतरे भी बढ़ जाते हैं, और मुझे नहीं लगता कि इसका कोई आसान जवाब है.''

जबकि यहूदी धर्मगुरु रब्बी श्मुएल का कहना है कि वे लोग सदियों से ख़तना करते आ रहे हैं और ये काफी सफल भी रहा है.

वे कहते हैं कि, ''ख़तना या सुन्नत करने की प्रक्रिया हमारी धार्मिक भावनाओं से इस कदर जुड़ा हुआ है कि उसे पूरी तरह से खत्म करना एक तरह से हमारे धर्म को मिटाने जैसा है. जर्मनी में जो हो रहा है उससे हम पहले से ही काफी दुखी हैं.''

इससे जुड़ी और सामग्रियाँ

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.