उम्र - 11 साल; काम - धर्म पर उपदेश देना

 रविवार, 2 सितंबर, 2012 को 03:10 IST तक के समाचार
ऐज़िकल स्टोडार्ड

अमरीका में एक 11 साल के बच्चे को उसके पारिवारिक चर्च का पादरी नियुक्त किया गया है इतना ही नहीं, ऐज़िकल स्टोडार्ड नाम का ये बच्चा कई स्थानीय चर्चों में धार्मिक प्रवचन करता है.

आप कह सकते हैं कि अमरीका में बाल- उपदेशकों का लंबा इतिहास रहा है तो फिर ऐज़िकल स्टोडार्ड में ऐसा क्या ख़ास है, क्या अलग है?

ऐज़िकल महज़ 11 साल का है लेकिन किसी व्यस्क की तरह कपड़े पहनता है. जब वो धर्मोपदेश दे रहा होता है, तब उसका सिर पोडियम के पीछे से थोड़ा बहुत ही दिख पाता है.

धर्मोपदेश ख़त्म होने के बाद ऐज़िकल अपने भाई-बहनों के पास जाता है. उसकी दो बहने हैं, 15-वर्षीय कोरीन और सात साल की जैस्मीन और दो भाई, 13 साल के हेज़ेकियाह और सात साल का मिकाह. इन सब ने मिलकर एक गॉस्पेल ग्रुप बनाया है.

लंबाई के क्रम से एक पंक्ति में खड़े होकर ये लोग धार्मिक गीत गाते हैं. ये संगीत हल्का-फुल्का है और वॉशिंगटन डीसी के क्राइस्ट सेंटर्ड मिशनरी बैपटिस्ट चर्च के लोग इसका मज़ा ले रहे हैं.

आशीर्वाद देने का सिलसिला

फिर शुरु होता है आशीर्वाद देने का सिलसिला. एक-एक करके के लोग ऐज़िकल के पास आते हैं और ऐज़िकल कभी शैतान को भागने का आदेश देता है तो कभी उपचार की बात करता है. आशीर्वाद लेने वाले कई लोग ऐसे भी हैं जो उम्र में ऐज़िकल से बहुत बड़े हैं.

अमरीकी बाल उपदेशक ऐज़िकल स्टोडार्ड

अमरीका में बाल धर्मोपदेशकों का लंबा इतिहास है.

इस चर्च में ऐज़िकल में धर्मोपदेश देने के लिए आमंत्रित करने वाले पादरी, रेवरेंड हर्क्युलिस एस जोन्स कहते हैं, "ऐज़िकल एक असाधरण बच्चा है. उसका धर्मोपदेश बहुत प्रेरणादायक होता है."

और ऐज़िकल का धर्मोपदेश सुनने बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी आते हैं.

ऐज़िकल की मां और सौतेले पिता, दोंनो ही पादरी हैं.

दो साल पहले उन्होंने अपना चर्च स्थापित किया था और मैरीलैंड के कैपिटल हाइट्स इलाके में उनके फ़ुलनेस ऑफ़ टाइम चर्च में इस साल की शुरुआत में ऐज़िकल को पादरी और उसके भाई हेज़ेकिआह को डीकन नियुक्त किया गया.

ऐज़िकल के सात-वर्षीय भाई मिकाह भी अपने बड़े भाईयों की ही तरह पादरी बनना चाहता है.

बाल उपदेशकों का 'बाज़ार'

वैसे अमरीका अकेला देश नहीं है जहां बाल उपदेशक हैं.

ब्राज़ील में भी बाल धर्मोपदेशकों का फलता-फूलता बाज़ार है और इंडोनेशिया में तो एक विवादित टीवी शो भी है जिसमें कम उम्र के इस्लामिक उपदेशक एक दूसरे से होड़ लगाते हैं.

"मैं मानता हूं कि एक बाल उपदेशक की लोकप्रियता की वजह उसके नयेपन में है."

रैंडल बाल्मर, अध्यक्ष, धर्म विभाग, डार्टमाउथ कॉलेज

इलियनोइस के व्हीटन कॉलेज में ईसाई धर्म की विशेषज्ञ इडिथ ब्लूमहोफ़र कहती हैं कि उन पंथों में बाल उपदेशकों की प्रथा ज़्यादा लोकप्रिय होने की संभावना होती है जहां श्रद्धालुओं को शामिल करने पर ज़ोर दिया जाता है. ख़ासकर आबादी के उन वर्गों में जो आमतौर पर समाज के हाशिये पर माने जाते हैं.

बालोपदेशकों के विषय में किताब लिख रहे रिटायर्ड पादरी टेड लाविन्ये कहते हैं कि वैसे तो 1920 और तीस के दशक में बाल उपदेशक बहुत लोकप्रिय थे और उस हिसाब से तो अब इस प्रथा में 'थोड़ा ठहराव' आ गया है.

टेड के मुताबिक हालांकि ब्रिटेन में भी बाल उपदेशकों का इतिहास है लेकिन अधिकतर अमरीकी ही है.

इसकी वजह बताते हुए डार्टमाउथ कॉलेज में धर्म विभाग के प्रमुख रैंडल बाल्मर कहते हैं, "अमरीका में धर्म में एक जोश है, उत्साह है, जो दुनिया में कहीं और नहीं दिखता. हम बहुत धार्मिक लोग हैं. मैं मानता हूं कि एक बाल उपदेशक की लोकप्रियता की वजह उसके नएपन में है."

बाल्मर के मुताबिक अमरीका में संविधान के तहत सरकार धर्म में हस्तक्षेप नहीं कर सकती जिसकी वजह से वहां एक तरह का "धर्म का बाज़ार" पैदा हो गया है जो लोकप्रियता और उद्यम को बढ़ावा देता है.

वे कहते हैं, "अगर आपके पास कोई स्टंट या तिकड़म है तो आपको फ़ायदा होगा."

ऐज़िकल स्टोडार्ड की मां एड्रियन ख़ुद भी एक पादरी हैं और उन्होंने अपने पति के साथ दो साल पहले चर्च की स्थापना की

अमरीका में चर्च पर बहुत कम नियंत्रण है, वहां कोई भी चर्च स्थापित कर सकता है और अपने नियम बना सकता है.

आलोचना

लेकिन बालोपदेशकों की प्रथा की आलोचना करने वाले कहते हैं कि ऐज़िकल जितनी उम्र के बच्चे पादरी बनने या धार्मिक उपदेश देने के लिए बहुत छोटे हैं. अपनी बात का साबित करने के लिए ये लोग कुछ पुराने उदाहरण भी देते हैं.

शायद इनमें से सबसे ज़्यादा मशहूर किस्सा मार्जो गोर्टनर का है जो एक समय में बाल उपदेशक थे. लेकिन दशकों बाद उन्होंने बताया था कि उन्हें धर्म के प्रचार में कभी यक़ीन नहीं था और ये काम उन्होंने पहले मां-बाप के दबाव में और फिर पैसा बनाने के लिए किया.

ऐज़िकल स्टोडार्ड का परिवार भी इस तरह की आलोचनाएं सुननी पड़ती हैं.

लेकिन अपना पक्ष रखते हुए उसकी मां, एड्रियन स्मिथ, कहती हैं कि ऐज़िकल और उनके बाकी बच्चे भी, बाकी बच्चों की तरह तैराकी, टैनिस, घुड़सवारी जैसी गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं. ऐज़िकल को बाग में छिपकलियों और टिड्डों के पीछे भागना बहुत पसंद है लेकिन साथ ही वो दिन में दो घंटे बाइबल भी पढ़ता है.

ऐज़िकल ने अभी ये तय नहीं किया है कि बड़े होकर वो क्या काम करना चाहता है. वो कहता है कि ये तय करने के लिए अभी बहुत वक्त है लेकिन उसने अभी से तय कर लिया है कि वो कौन सी गाड़ी चलाना चाहेगा.

लेकिन अभी के लिए ऐज़िकल कहता है कि वो धर्मोपदेश करते रहना चाहता है.

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