28 सालों से भागते रहने का दर्द...

 मंगलवार, 4 सितंबर, 2012 को 07:51 IST तक के समाचार
डेविड

डेविड ने 28 साल पहले अमरीकी वायुसेना की नौकरी छोड़ दी थी और पिछले 28 सालों से वे अमरीकी वायुसेना के मोस्ट वॉन्टेड के लिस्ट में है.

ये कहानी है एक ऐसे शख्स़ की है जिसका अचानक हृदय परिवर्तन होता है और वो अपनी फौज की नौकरी छोड़कर शांतिपूर्ण जीवन जीना चाहता है.

ऐसा जीवन जीने की लालसा में वो हर वो चीज़ कर जाता है जिसे सामान्य भाषा में अपराध कहा जाता है.

डेविड हेमलर ने 28 साल पहले अमरीकी वायुसेना को छोड़ दिया था और वे इस दौरान अमरीकी वायुसेना की दस 'मोस्ट वॉन्टेड' भगोड़ों की सूची में हैं.

इन 28 सालों तक हेमलर एक छद्म नाम के सहारे स्वीडन में रह रहे हैं. इन सालों में उन्हें स्वीडन की नागरिकता भी मिल गई, उनकी शादी भी हो गई और वे दो बच्चों के पिता भी बन गए.

लेकिन सच्चाई अब सामने आ ही गई है.

1984 में जब दुनिया शीतयुद्ध के घेरे में थी और अमरीकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन पश्चिमी जर्मनी में पर्शिंग-2 मिसाइल तैनात करने तैयारी कर रहे थे, तब 21 साल के डेविड हेमलर डिप्रेशन यानी अवसाद में थे.

मोहभंग

डेविड हेमलर अमरीकी वायुसेना में पश्चिमी जर्मनी के बवेरिया राज्य की ऑग्सबर्ग यूनिट में भाषाविद् के तौर पर काम करते थे.

"मुझे नहीं लगता कि शांतिप्रिय होने का मतलब दिमाग़ी तौर पर बीमार होना है. मैं बुरा महसूस कर रहा हूं, रात-रात भर सो नहीं पाता, खाना नहीं खा पाता."

डेविड हेमलर

डेविड ने अपने अधिकारियों के पास जाकर कहा कि वो शांति के समर्थक हो गए हैं और इस आधार पर उन्हें नौकरी छोड़ने की अनुमति दी जाए. लेकिन अधिकारियों ने नौकरी छोड़ने की अनुमति देने के बजाए उन्हें मनोचिकित्सक के पास भेजने की सलाह दे डाली.

डेविड हेमलर ने अपने अधिकारियों के सामने कहा, ''मुझे नहीं लगता कि शांति समर्थक होने का अर्थ दिमाग़ी तौर पर बीमार होना है. मैं अच्छा महसूस नहीं कर रहा हूं, रात-रात भर सो नहीं पाता, खाना नहीं खा पाता. ''

इसके बावजूद वायुसेना ने डेविड हेमलर को नौकरी छोड़कर जाने की मंज़ूरी नहीं दी, बल्कि उनका ओहदा घटा कर उन्हें सफ़ाई के काम में लगा दिया.

उन्हें ये समझ में आ गया कि वायुसेना उन्हें आसानी से छोड़ने वाली नहीं है. उनकी नौकरी के तीन साल और बाक़ी थे और उनके लिए वहां रहना असंभव सा हो गया था.

उन्होंने बिना तनख़्वाह के छुट्टी पर जाने की बात सोची. वो तो बस थोड़े समय के ग़ायब होना चाहते थे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

डेविड हेमलर ने स्वीडन जाने का फैसला किया. उस समय स्वीडन ने उन अमरीकी सैनिकों को शरण दे रखी थी, जिन्होंने वियतनाम के साथ हुई लड़ाई के दौरान देश छोड़ने का फैसला किया था.

नई पहचान

डेविड हेमलर ने स्वीडन पहुंचकर अपना नया नाम हैंस शवार्ज़ रखा और कहा कि उनके पूर्वज 35 देशों में घूमने वाले पर्यटकों में से एक थे. पुलिस को उन पर शक था और वे डेविड का प्रत्यर्पित करना चाहती थी लेकिन हेमलर के अनुसार, ''उन्हें ये पता नहीं था कि आखिर मुझे वापस भेजें तो कहां?''

अंत में जब पुलिस को उनके बारे में ज्य़ादा पता नहीं चल सका तो उन्हें छोड़ दिया गया और डेढ़ साल बाद उन्हें स्वीडन में रहने की अनुमति मिल गई. हालांकि इस दौरान हेमलर हमेशा एक अघोषित डर में जीते रहे.

उन्हें पता था कि स्वीडन में रहने का परमिट उन्होंने झूठी पहचान के आधार पर हासिल किया है.

हेमलर कहते हैं, ''जब भी मेरे कानों में पुलिस के सायरन की आवाज़ आती थी, मुझे ऐसा लगता था कि वो मुझे पकड़ने आ रही हैं.''

अमरीकी वायुसेना ने उनका नाम अपने 10 प्रमुख वांछित भगोड़ों की सूची में शामिल कर रखा था. इस फेहरिस्त में कई हत्यारों और बलात्कारियों के नाम शामिल थे.

डेविड

डेविड हेमलर दो बच्चों के पिता हैं, इसके बावजूद उन्हें अपने देश को छोड़ने का पछतावा है.

उनकी तस्वीर भी हमेशा उनकी वेबसाइट पर अपलोड की जाती रही, और उसे कुछ दिनों पहले ही हटाया गया था.

गिरफ्तारी से बचने के लिए हेमलर ने स्वीडन में रहते हुए अपनी पहचान छिपाए रखी. उन्होंने स्वीडिश भाषा सीखी और अपना हुलिया बदल लिया.

इन सालों में उन्होंने कई अलग-अलग काम किए. इनमें वृद्धाश्रम में नर्स की नौकरी भी शामिल थी. उन्होंने विश्वविद्यालय जाकर सांख्यिकी की पढा़ई भी की.

फिलहाल वो यूपसला में सरकारी नौकरी करते हैं.

अपनों की याद

पिछले 28 सालों में हेमलर ने किसी को अपनी असलियत नहीं बताई. यहां तक कि अपनी पहली गर्लफ्रेंड को भी नहीं जिनसे उनकी एक बेटी है और उनकी पत्नी को भी नहीं जिनसे उनके दो और बच्चे हैं.

हेमलर ने इस दौरान अपने परिजनों से मिलने की कोशिश भी नहीं की. हेमलर कहते हैं, ''मैं काफी डरा हुआ था. अगर मैं अपने माता-पिता से मिलने की कोशिश करता तो मुझे वापस भेज दिया जाता और मैं फिर कभी अपनी बेटी से नहीं मिल पाता.''

लेकिन जैसे-जैसे उनकी बेटी बड़ी होती गई, वो अपने माता-पिता से जुदाई बर्दाश्त करने में नाकाम होते गए. और अंत में एक दिन उन्होंने अपनी एक आंटी को फोन किया. उनकी आंटी ने हेमलर की बात उनके भाई से करवाने में उनकी मदद की.

"हेमलर के भाई ने बचपन में पेनिसिलवेनिया में बिताए गए समय के बारे में उनसे कुछ जानकारी मांगी और सही जवाब देने पर वे पहचान गए कि डेविन हेमलर ही उनके बचपन में बिछड़े हुए भाई हैं."

हेमलर के भाई ने बचपन में पेन्सिलवेनिया में बिताए गए समय के बारे में उनसे कुछ जानकारी मांगी और सही जवाब देने पर वे पहचान गए कि डेविड हेमलर ही उनके बचपन में बिछड़े हुए भाई हैं.

हेमलर के भाई ने उनसे पिछले 30 सालों की सभी बातें साझा कीं और अपने माता-पिता से हेमलर की बात करवाई.

हेमलर कहते हैं, "मुझे लगा वे सब मुझ पर नाराज़ होंगे और मुझे डाँटेंगे, लेकिन सभी इतने खुश थे कि किसी ने मुझसे कुछ भी नहीं पूछा. वे सब बस मेरे ज़िंदा रहने की खबर पर बेहद खुश थे. ''

टूटी 28 साल की चुप्पी

अपने घरवालों के बाद डेविड हेमलर ने अपनी पत्नी को इस बारे में जानकारी दी.

हेमलर कहते हैं, ''मेरी पत्नी समझ नहीं पा रहीं थीं कि वे किस बात पर विश्वास करे या नहीं. फिर मैंने उनको अमरीकी वायुसेना की वेबसाइट पर लगी अपनी तस्वीर दिखाई.''

हेमलर कहते हैं कि उनकी पत्नी उन्हें धोखेबाज़ नहीं मानतीं और समझती हैं कि वे क्यों हैंस शवार्ज़ बन कर रहे. उन्हें उम्मीद है कि डेविड जल्द ही थाईलैंड की यात्रा कर अपने माता-पिता से मुलाकात करेंगे.

हेमलर अपने माता-पिता से मिलना चाहते हैं, लेकिन उन पर अब भी अमरीकी एजेंसियों की जांच चल रही है. अगर वो वहां गए तो डर है कि कम से कम 30 साल तक जेल में बंद किए जा सकते हैं.

हालांकि उनके वकील कहते हैं कि वो अब स्वीडन के नागरिक हैं और उन्हें अमरीका प्रत्यर्पित नहीं किया जा सकता है.

डेविड हेमलर शादीशुदा और दो बच्चों के पिता हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अपना देश छोड़ने का पछतावा है.

डेविड के शब्दों में, ''ये सब कुछ बस होता चला गया था. मैंने खुद को जानबूझ कर एक ऐसे झमेले में डाल लिया था जिससे बाहर निकलना मुमकिन नहीं था.''

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