सीआईए ने इराक युद्ध पर मानी नाकामी

 गुरुवार, 6 सितंबर, 2012 को 12:08 IST तक के समाचार
सीआईए का लोगो

इराक युद्ध को लेकर सीआईए पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं.

अमरीकी खुफिया एजेंसी सीआईए की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इराक युद्व से पहले अमरीकी एजेंटों ने खुफिया जानकारी का गलत आकलन किया. इसी कारण व्यापक विनाश के हथियारों के दावों को बढ़ा चढ़ा कर पेश किया गया.

रिपोर्ट में कहा गया है कि अमरीकी एजेंट यह मानकर चल रहे थे कि इराक के पूर्व शासक सद्दाम हुसैन हथियारों के बारे में झूठ बोल रहे थे.

सीआईए की यह रिपोर्ट 2006 में तैयार की गई थी लेकिन इसे अब सार्वजनिक किया गया है.

यह रिपोर्ट अमरीका के गैर सरकारी शोध संस्थान राष्ट्रीय सुरक्षा आर्काइव ने प्रकाशित की है जिसमें इराक युद्व से पहले की खुफिया जानकारी के आकलन में होने वाली गलतियों का कच्चा चिठ्ठा बयान किया गया है.

हथियारों का हौवा

इराक में युद्ध

अमरीकी सेनाएं इराक में लगभग एक दशक तक रहीं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि अमरीकी खुफिया एजेंट इराक युद्व से पहले खुफिया जानकारी का सही आकलन करने में नाकाम रहे थे.

रिपोर्ट को मुताबिक वो बस इराक में महाविनाश के हथियारों की मौजूदगी से जुड़े पहलू पर अधिक ध्यान दे रहे थे और उन्होंने तत्कालीन इराकी शासक सद्दाम हुसैन के बयानों पर उतना ध्यान नहीं दिया जिसमें वो कहते रहे कि इराक में महाविनाश के हथियार नहीं हैं.

सीआईए की इस रिपोर्ट में लिखा है, “चूंकि इराकी सरकार का धोखा देने का पुराना इतिहास रहा है और उनके रवैए में मामूली बदलाव ही दिख रहे थे, तो खुफिया एजेंटों ने इराकियों के रवैए में आए बदलाव के अध्य्यन में अधिक समय नहीं लगाया और इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि वर्ष 1995 के खत्म होने तक इराकी जो कह रहे थे वो काफी हद तक सही था.”

रिपोर्ट में तर्क दिया गया, “इराक ने 1991 और 2003 में संयुक्त राष्ट्र की जांच के दौरान कई मामलों में धोखा देने की कोशिश की और कई बार कुछ दस्तावेज़ नष्ट करके जांच में बाधा डालने की कोशिश की थी. इससे विश्व के कई देशों की सरकारों और गुप्तचर सेवाओं ने भी ये अंदाजा लगाया था कि इराक के पास महाविनाश के हथियार हैं.”

आकलन में खामी

"इराक ने 1991 और 2003 में संयुक्त राष्ट्र की जांच के दौरान कई मामलों में धोखा देने की कोशिश की और कई बार कुछ दस्तावेज़ नष्ट करके जांच में बाधा डालने की कोशिश की थी. इससे विश्व के कई देशों की सरकारों और गुप्तचर सेवाओं ने भी ये अंदाजा लगाया था कि इराक के पास महाविनाश के हथियार हैं."

सीआईए की रिपोर्ट

सार्वजनिक की गई इस खुफिया रिपोर्ट में कई जगह पर काली स्याही से खुफ़िया जानकारियों को छुपा दिया गया है. इनमें कुछ कोड शब्द, कुछ अहम स्रोतों के नाम और वो खुफिया रिपोर्टें भी शामिल हैं जो अभी भी गुप्त रखी गई हैं.

सन 2005 में इराकी सर्वे ग्रुप ने सीआईए को दी गई अपनी रिपोर्ट में खुफिया एजेंटों के आकलन में कई खामियों का जिक्र किया था. वो रिपोर्ट अब भी गुप्त रखी गई है.

सीआईआए की ये रिपोर्ट इसलिए तैयार की गई थी ताकि इराक युद्व के बाद इराकी नेताओं के कदमों और खुफिया एजेंटों के आकलन के तालमेल का अध्य्यन किया जा सके.

2003 में अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने ये कहते हुए इराक पर हमला कर दिया था कि उसके पास व्यापक विनाश के हथियार हैं जिनसे उस क्षेत्र और विश्व के लिए खतरा हैं.

'देर न हो जाए'

सद्दाम हुसैन

सीआईए ने नहीं सुनी सद्दाम हुसैन की बात.

इस सिलसिले में बुश प्रशासन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सामने भी सीआईए की खुफिया रिपोर्ट के आधार पर दावा किया कि अब अगर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इराक में इस खतरे से निपटने में देर की तो बहुत देर हो जाएगी.

वैसे इस हमले के मुद्दे पर विश्व के अधिकतर देश अमरीका के साथ नहीं थे और कुछ समय बाद ये साफ हो गया था कि इराक में महाविनाश के हथियार मौजूद नहीं थे.

मौजूदा अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने पिछले साल दिसंबर में इराक से अमरीकी फौजें निकाल लीं.

इससे जुड़ी और सामग्रियाँ

इसी विषय पर और पढ़ें

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.