कब-कब हुआ इस्लाम का 'अपमान'?

 बुधवार, 12 सितंबर, 2012 को 17:40 IST तक के समाचार

कुरान की प्रतियां जलाए जाने का इस्लामी देशों में काफी विरोध हुआ.

एक कथित 'इस्लाम-विरोधी' अमरीकी फिल्म के इंटरनेट पर आने के बाद मिस्र ओर लीबिया के दूतावासों पर विरोध में प्रदर्शनकारियों ने हमला कर दिया. लीबिया में अमरीकी राजदूत क्रिस्टोफर स्टीवन्स हमले के कारण ही मारे गए.

लेकिन इस्लाम की धार्मिक किताब कुरान और इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद का अपमान किए जाने की घटनाएं पहले भी हुई हैं. आइए इन पर नज़र डालें.

अफगानिस्तान में अमरीकी सैनिकों ने कुरान जलाया

इसी वर्ष फरवरी में फरवरी में अफगानिस्तान के बग्राम हवाई अड्डे में अमरीकी सैनिकों ने कुरान की प्रतियां जला दीं.

इस घटना के बाद दंगे भड़क गए थे जिनमें दो अमरीकी सैनिकों समेत 30 लोगों की मौत हो गई थी.

घटना की तहकीकात के बाद छपी रिपोर्ट के मुताबिक कुरान की 53 प्रतियां और 162 अन्य धार्मिक किताबों को एक भट्टी में जला दिया गया था.

रिपोर्ट के मुताबिक, ये शंका थी कि हिरासत में रखे गए कैदी इन किताबों का उपयोग गुप्त संदेश भेजने के लिए कर रहे हैं, इसलिए उन्हें वहां से हटाया गया.

रिपोर्ट ने छह अमरीकी सैनिकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की जिसके तहत सैनिकों का पद कम करने, तन्ख्वाह कम करने या ज़्यादा काम करवाने जैसे दंड दिए जा सकते हैं.

हालांकि इस घटना के बाद अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने इन सैनिकों पर जनता के सामने सुनवाई करने की मांग की थी.

अमरीका में क़ुरान की प्रतियां जलाई गईं

अमरीकी पादरी टेरी जोन्स ने वर्ष 2010 में वर्ल्ड ट्रेड टावर पर हुए हमले की बरसी के मौके पर क़ुरान की प्रतियाँ जलाने की घोषणा की थी

20 मार्च 2011 को फ़्लोरिडा की एक चर्च में अमरीकी पैस्टर वेन सैप ने क़ुरान की एक प्रति को आग लगा दी थी.

अफ़ग़ानिस्तान में इसका विरोध हुआ और उन प्रदर्शनों के दौरान कंधार शहर में पाँच लोग मारे गए और 40 से ज़्यादा लोग घायल हुए.

क़ुरान जलने के वक़्त एक दूसरे विवादित पादरी टेरी जोन्स वहां मौजूद थे.

जोन्स ने वर्ष 2010 में वर्ल्ड ट्रेड टावर पर हुए हमले की बरसी के मौके पर क़ुरान की प्रतियाँ जलाने की घोषणा की थी.

इस पर उनकी घोर निंदा हुई थी लेकिन वे लगातार, पश्चिमी समाज में इस्लाम की भूमिका के खिलाफ़ बोलते रहे हैं.

अमरीकी दूतावासों पर हुए ताज़ा हमले के पीछे बताई जा रही अमरीकी फिल्म का प्रचार भी वो कर रहे हैं.

पैगंबर मोहम्मद का मजाक उड़ाते कार्टून

वर्ष 2005 में डेनमार्क के एक अखबार ने पैगंबर मोहम्मद को दर्शाते कार्टून प्रकाशित किए.

अख़बार युलांस पोस्टन ने 12 कार्टूनों की सिरीज़ प्रकाशित की जिनमें से कई कार्टूनों में पैगंबर को इस्लामी चरमपंथी के रूप में प्रदर्शित किया गया था.

इसका विरोध होने पर अख़बार ने कार्टून से मुसलमानों की भावनाएँ आहत होने पर माफ़ी माँग ली, लेकिन साथ ही कहा कि उसे अभिव्यक्ति की आज़ादी है और वो जो चाहे प्रकाशित कर सकता है.

फिर वर्ष 2006 में एक फ़्रांसीसी पत्रिका ने दोबारा इन कार्टूनों को छापा, जिसके बाद दुनिया भर में मुसलमानों की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई.

चार्ली एबडो नाम की इस पत्रिका में इस्लाम के अलावा दूसरे धर्मों पर भी टिप्पणी की गई.

इसके बाद भारत और पाकिस्तान समेत कई इस्लामी देशों में विरोध प्रदर्शन हुए जिनमें से कुछ हिंसक भी हुए और कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई.

पाकिस्तान, सीरिया, ईरान, लेबनान और इंडोनेशिया में डेनमार्क के दूतावास अस्थाई तौर पर बंद भी किए गए.

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