ओबामा के सामने लीबिया की चुनौती

लीबिया पर ओबामा की चुनौती
Image caption ओबामा ने कहा है कि हमले के बाजवदू अमरीका और लीबिया के रिश्ते प्रभावित नहीं होंगे.

राष्ट्रपति बराक ओबामा ने लीबिया में हुए “चौंकाने वाले हमले” की निंदा की है. इसमें अमरीकी राजदूत समेत तीन अन्य लोग मारे गए हैं.

उनका कहना है, “मारे गए लोगों का काम, आज़ादी, न्याय और दुनिया के लोगों तथा देशों के साथ जुड़ने के अमरीका के विश्वास को दर्शाता है. ये उन लोगों के बिल्कुल विपरीत है जिन्होंने बेदर्दी से इनकी जान ली.”

बेनगाजी में अमरीकी वाणिज्य दूतावास पर हमला कर राजदूत जे क्रिस्टोफर स्टीवेंस और तीन अन्य लोगों की जान लेने वाले चरमपंथियों ने अपने हमले की वजह एक अमरीकी फिल्म को बताया जिसमें उनके मुताबिक इस्लाम का अपमान हुआ है.

इस हमले के बाद राष्ट्रपति ओबामा ने दुनिया भर में सुरक्षा बंदोबस्त बढ़ाने के आदेश देते हुए कहा, “जहां अमरीका किसी भी धर्म को नीचा दिखाने की कोशिशों को ग़लत बताता है, वहीं सरकारी मुलाज़िमों की बेवजह हत्या करने की भी घोर निंदा करता है.”

ज़ाहिर है कि इस हमले के बाद राष्ट्रपति ओबामा की विदेश नीति फिलहाल के लिए, उनके चुनाव प्रचार के केंद्र में आ जाएगी.

‘माफी मांगने को तत्पर ओबामा’

राष्ट्रपति ओबामा के प्रतिद्वंदियों के मुताबिक वे दुनिया भर के सामने अमरीका की ओर से माफी मांगने को हमेशा तत्पर रहते हैं. उनकी छवि इस्लाम के प्रति हमदर्दी रखने वाले की है.

वहीं अन्य लोगों का मानना है कि अरब क्रांति को मिले समर्थन ने अमरीका-विरोधी लोगों को बहुत ताकत दे दी है.

रिपब्लिकन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार मिट रोमनी ने काहिरा के अमरीकी दूतावास के उस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है जिसमें मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की कोशिशों की निंदा की गई थी.

Image caption लीबिया में क्रांति के बाद नई सरकार बनने के बावजूद सुरक्षा हालात अस्थिरता का शिकार हैं.

उस दूतावास को भी हमलों का निशाना बनाया गया.

विपक्ष के तीखे तेवर

रोमनी ने कहा, “ये शर्मनाक है कि ओबामा प्रशासन का पहला बयान हमलों की निंदा करना नहीं, बल्कि हमलावरों के साथ हमदर्दी प्रकट करने के बारे में था”

व्हाइट हाउस का कहना है कि ये पहला बयान उनकी अनुमति से जारी नहीं किया था.

हमलों के बाद नेटो के सैन्य अभियान को राष्ट्रपति ओबामा की ओर से दिए समर्थन पर भी बहस छिड़ सकती है.

मुआम्मर गद्दाफी के पतन में इस अभियान ने अहम भूमिका निभाई थी.

हालांकि उस वक्त मिट रोमनी ने राष्ट्रपति की अनिश्चितता की आलोचना की थी, लेकिन ये साफ नहीं किया था कि वे ज़रूरत से कम कर रहे हैं या ज़्यादा.

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