महँगाई पर अख़बारों में चीख़ती हुई हेडलाइनें

Image caption शुक्रवार को ज्यादातर अखबारों में डीजल की बढ़ी कीमतों की खबर प्रमुखता से छाई रही

डीज़ल की कीमतों में पांच रुपये प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी और रसोई गैस पर सब्सिडी में कटौती की खबर शुक्रवार को सभी अखबारों की हेडलाइन है.

दैनिक भास्कर लिखता है- डीजल पांच रुपए महंगा, सिर्फ 6 सस्ते सिलिंडर.

नवभारत टाइम्स ने शीर्षक दिया है- पांच रुपए महंगा हुआ डीजल, सस्ते सिलिंडर साल में सिर्फ 6. अखबार ने ग्राफिक बनाकर बताया है कि देश के विभिन्न शहरों में डीजल की कीमतें अब कितनी हो जाएंगी.

पंजाब केसरी लिखता है- डीजल भड़का, रसोई में आग

जनसत्ता की भी लीड खबर है- डीजल पांच रुपए लीटर महंगा, रसोई गैस सब्सिडी सालाना छह सिलिंडर तक सिमटी.

दैनिक जागरण ने सिलिंडर की महंगाई को ज्यादा अहमियत दी है- अब साल में सिर्फ छह सिलिंडर, डीजल हुआ 5 रुपए महंगा.

हिन्दुस्तान लिखता है- महंगाई की बड़ी मार, सीसीपीए की बैठक में लिया गया फैसला, रसोई गैस पर भी कोटा सिस्टम लागू.

वहीं अंग्रेजी अखबार द इकोनॉमिक टाइम्स ने सरकार के फैसले की प्रशंसा करते हुए इसे वापस न लेने की सलाह दी है. अखबार ने शीर्षक दिया है- ‘ए गुड बेगिनिंग. बट डोन्ट रोल बैक नाउ.’

अमर उजाला की लीड खबर है- महंगाई डायन, मार डालेगी, जीना हुआ मुहाल

राष्ट्रीय सहारा लिखता है- चूल्हा-चक्का, सबको झटका.

अखबार लिखता है कि डीजल में कीमतों में वृद्धि सभी जरूरी चीजों के दाम बढ़ा देगी और महंगाई की पार से पहले से ही जूझ रही जनता को अब और पिसना पड़ेगा.

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