'सूडान और ट्यूनिशिया छोड़ने का आदेश'

हिशम क़ानदिल
Image caption हिशम क़ानदिल ने फिल्म के विरोध को सही लेकिन हिंसा को गलत ठहराया है

पैग़ंबर मोहम्मद के कथित अपमान से जुड़ी एक इस्लाम विरोधी फ़िल्म के विरोध में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच अमरीका ने ट्यूनिशिया और सूडान में अपने दूतावास में काम कर रहे अधिकारियों के परिवारों और गैर जरूरी कर्मचारियों को देश छोड़ने का आदेश दिया है.

माना जा रहा है कि अमरीका ने ये आदेश मध्य पूर्व में अशांति के लंबे समय तक चलने की आशंका को देखते हुए दिया है.

ट्यूनिस और खार्तूम के अमरीकी दूतावास उन कई अमरीकी राजनयिक मिशन में से हैं जिन्हें अमरीकी फिल्म विरोधी प्रदर्शनकारी निशाना बना सकते हैं.

अमरीकी विदेश मंत्रालय की एक प्रवक्ता विक्टोरिया न्यूलैंड ने कहा है कि अमरीकी नागरिकों को यात्रा संबंधी चेतावनी भी जारी की गई है.

सूडान का इनकार

इससे पहले सूडान ने अमरीकी मैरीन की एक यूनिट को राजधानी खार्तूम स्थित अमरीकी दूतावास की सुरक्षा के लिए देश में दाखिल होने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था.

सूडान के विदेशमंत्री ने सरकारी समाचार एजेंसी को बताया कि सूडान अपने देश में स्थित तमाम राजनयिक मिशनों की सुरक्षा करने में सक्षम है.

सूडान स्थित विदेशी दूतावासों की सुरक्षा का सवाल तब उठा जब शुक्रवार को अमरीकी फिल्म से गुस्साई भीड़ ने राजधानी खार्तूम में जर्मनी और ब्रिटेन के दूतावासों पर हमला कर दिया और अमरीकी दूतावास के परिसर में दाखिल होने की कोशिश की.

मिस्र की अपील

इससे पहले मध्यपूर्व में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच मिस्र के प्रधानमंत्री हिशम क़ानदिल ने कहा है कि इस्लाम का अपमान रोकने के लिए अमरीका को हर संभव कदम उठाना चाहिए.

बीबीसी की अरबी सेवा को दिए एक साक्षात्कार में हिशम क़ानदिल ने कहा कि 'हमारे पैगम्बर का अपमान बर्दाश्त से बाहर है' लेकिन शांतिपूर्ण प्रदर्शनों का हिंसक हो जाना भी सही नहीं है.

उनकी ये टिप्पणी ऐसे समय आई है जब मध्य-पूर्व और उत्तरी अफ्रीका में अमरीका में बनी इस्लाम विरोधी फिल्म के खिलाफ विरोध-प्रदर्शनों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है.

मुट्ठीभर लोगों का काम

Image caption शुक्रवार को खार्तूम में अमरीकी दूतावास को प्रदर्शनकारियों ने निशाना बनाया था

मिस्र के प्रधानमंत्री हिशम क़ानदिल ने कहा कि अधिकारियों ने विदेशी राजनयिक मिशनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उपाए किए हैं, लेकिन अब सभी पक्षों को एक-दूसरे के प्रति राय बेहतर करने की जरूरत है.

ये पूछे जाने पर कि क्या अमरीका को अपनी अभिव्यक्ति की आजादी संबंधी क़ानूनों को बदलने की जरूरत है, हिशम क़ानदिल ने कहा, ''मैं सोचता हूं कि हमें इस बारे में कुछ तो करने की जरूरत है क्योंकि हम इंतज़ार नहीं कर सकते और ऐसी घटनाओं को दोबारा होते नहीं देख सकते हैं.''

उन्होंने कहा, ''कुछ मुट्ठीभर लोग हैं जो गैर-जिम्मेदाराना कार्य कर रहे हैं और इसकी क़ीमत हर किसी को चुकानी पड़ रही है.''

तालिबान का घातक हमला

इस बीच उसी अमरीकी फिल्म के विरोध में तालिबान ने दक्षिणी अफगानिस्तान के हेलमंद प्रांत में नैटो के एक बेहद मजबूत कैंप पर हमला किया है जिसमें कम से कम दो अमरीकी सैनिकों की मौत हो गई है.

इस हमले में कई विदेशी सैनिकों के घायल होने की भी खबर है. बीबीसी को भेजे संदेश में तालिबान ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है. तालिबान ने कहा है कि इस हमले का मकसद उस अमरीकी फिल्म का विरोध करना है जिसमें इस्लाम का मजाक उड़ाया गया है.

इस हमले में कई जहाजों और इमारतों को नुकसान पहुंचा है. नैटो के जिस बस्तियोन शिविर पर ये हमला हुआ है उसकी जबर्दस्त किलेबंदी की गई है और वो बेहद सुरक्षित माना जाता है.

Image caption बस्तियोन शिविर को अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता था

इसलिए ये सवाल भी उठाए जा रहे हैं कि चरमपंथी वहां तक पहुंचने में सफल कैसे हो गए. ब्रिटेन के राजकुमार प्रिंस हैरी भी अफगानिस्तान की अपनी दूसरी यात्रा पर पिछले हफ्ते ही आए हैं.

हालांकि प्रिंस हैरी बिल्कुल सुरक्षित हैं. नैटो अधिकारियों का कहना है कि इस हमले में चरमपंथियों ने छोटे हथियारों, रॉकेट और मोर्टार का इस्तेमाल किया.

इस शिविर में कई देशों के सैनिक रहते हैं और शुक्रवार को हुए हमले में खासकर अमरीकी परिसर को निशाना बनाया गया था. हेलमंद प्रांत के गवर्नर का कहना है कि इस हमले में कम से कम 18 तालिबान लड़ाके भी मारे गए.

तालिबान के प्रवक्ता करी यूसुफ अहमदी ने बीबीसी को बताया कि उनके निशाने पर अमरीकी और ब्रितानी सैनिक थे.

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