अमरीका विरोधी प्रदर्शनों के पीछे ईरान: इसराइल

इसराइली प्रधानमंत्री नेतान्याहू
Image caption नेतान्याहू ने फिर साधा ईरान पर निशाना.

इसराइली प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतान्याहू ने मध्यपूर्व में अमरीका और पश्चिम जगत के खिलाफ भड़के गुस्से के पीछे ईरान का हाथ बताया है.

अमरीकी टीवी चैनल एनबीसी को दिए इंटरव्यू में नेतान्याहू ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम की एक बार फिर कड़ी आलोचना की और उसके खिलाफ कार्रवाई करने की जरूरत पर जोर दिया दिया.

उन्होंने कहा, “ये वही कट्टरपंथ है जो आज आपके दूतावासों को निशाना बना रहा है. आप चाहते हैं कि इन लोगों को पास परमाणु हथियार आ जाएं?”

अमरीकी में बनी इस्लाम विरोधी फिल्म के कारण मध्यपूर्व के कई देशों में अमरीका और ब्रिटेन समेत कुछ अन्य यूरोपीय देशों के दूतावासों को प्रदर्शनों के दौरान निशाना बनाया गया है.

लीबिया में अमरीकी वाणिज्य दूतावास पर हुए हमले में अमरीकी राजदूत क्रिस्टोफर स्टीवेंस समेत चार अमरीकी नागरिक मारे गए.

ईरान पर बरसे नेतान्याहू

नेतान्याहू ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर उसे फिर कड़ी चेतावनी दी है. उनके मुताबिक ईरान का 'कट्टरपंथी रवैया बर्दाश्त से बाहर' हो रहा है.

उन्होंने इन सुझावों को खारिज कर दिया कि ईरान से भी वैसे ही निपटा जा सकता है जैसे शीत युद्ध के दौर में पूर्व सोवियत संघ से निपटा गया था.

इसराइली प्रधानमंत्री ने कहा कि ईरान कट्टरपंथ को अपने अस्तित्व से भी ज्यादा अहमियत दे रहा है. नेतान्याहू ने ये बात ऐसे समय में कही है जब लगातार ऐसी अटकलें जारी हैं कि इसराएल ईरान को कथित रूप से परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है.

दूसरी तरफ ईरान इसराइल और पश्चिम देशों से आरोपों से इनकार करते हुए अपने परमाणु कार्यक्रम का उद्देश्य शांतिपूर्ण तरीके से ऊर्जा जरूरतों को पूरी करना बताता है.

राजनयिक कोशिशों पर जोर

धुर दक्षिणपंथी समझे जाने वाले नेतान्याहू ने अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से फिर अपील की है कि वो ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर स्पष्ट 'लाल रेखाएं' खींचें.

उन्होंने ईरान के संभावित परमाणु इरादों के बारे में कहा, “परमाणु हथियारों के आविष्कार के बाद से कई ऐसे देश हैं जिनकी परमाणु हथियारों तक पहुंच हैं और वे हमेशा सावधानी पूर्वक ये गणना करते रहते हैं कि उन पर कितनी लागत आएगी और उनसे कितना फायदा होगा. लेकिन ईरान असहनीय कट्टपरंथी नजरिए वाले नेतृत्व से निर्देशित है.”

दूसरी तरफ अमरीका अभी ईरान के मुद्दे पर राजनयिक कोशिशों के ही हक में दिखाई देता है. उनका कहना है कि अभी परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान पर हमला करने का वक्त नहीं आया है.

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