आंग सान सू ची अमरीका रवाना

Image caption दो दशक में सू ची की ये पहली अमरीका यात्रा है

बर्मा की लोकतंत्र समर्थक नेता आंग सान सू ची अमरीका की यात्रा पर जा रही हैं. पिछले दो दशकों में ये उनकी पहली अमरीका यात्रा है.

अपने 18 दिन की यात्रा में सू ची को अमरीका के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'कॉन्ग्रेशनल मेडल ऑफ़ ऑनर' से सम्मानित किया जाएगा.

इस दौरान सू ची अमरीका में राष्ट्रपति बराक ओबामा और बर्मा के अन्य समूहों से मुलाक़ात करेंगी.

नज़रबंद

आंग सान सू ची को कई वर्षों तक बर्मा की सरकार ने उनके ही घर में नज़रबंद रखा था.

इसी साल अप्रैल में चुनाव जीतने के बाद उन्हें संसद की सदस्यता हासिल हो गई है.

बर्मा की सेना समर्थित नई नागरिक ने हाल ही में कई राजनीतिक और सामाजिक सुधार किए हैं जिनमें मीडिया क़ानून को उदार बनाना, प्रदर्शन को क़ानूनी दर्जा देना और सैकड़ों राजनीतिक बंदियों की रिहाई शामिल है.

बर्मा सरकार के इन क़दमों के बाद अमरीका समेत कई पश्चिमी देशों ने सैन्य शासन के दौरान लगाए गए प्रतिबंधों को हटा लिया है.

सू ची से सवाल

Image caption जातीय संघर्ष के बाद हज़ारों रोहिंग्या मुसलमानों को विस्थापित होना पड़ा था

अमरीका यात्रा के दौरान नोबेल शांति पुरस्कार विजेता सू ची से पश्चिमी रखाइन प्रांत में इस साल हुए नस्ली संघर्ष पर सवाल पूछे जा सकते हैं.

इस संघर्ष की शुरुआत एक युवा बौद्ध महिला के साथ बलात्कार से हुई थी जिसमें बहुसंख्यक बौद्धों ने अल्पसंख्यक मुसलमानों पर हमले किए थे.

इस संघर्ष में दर्जनों लोग मारे गए थे और हज़ारों विस्थापित हो गए थे.

मानवाधिकार संगठनों ने इन अल्पसंख्यक रोहिंग्या मुसलमानों की दशा को लेकर चिंता जताई थी.

रोहिंग्या मुसलमानों को बर्मा की सरकार देश का नागरिक नहीं मानती है और पड़ोसी देशों में भी कई बार उन्हें शरण नहीं मिलती है.

इस मसले पर आंस सान सू ची आमतौर पर खामोश रही हैं लेकिन संसद में उन्होंने ज़रूर कहा था कि इन अल्पसंख्यक मुसलमानों के अधिकारों की रक्षा के लिए संसद को क़ानून बनाना चाहिए.

जून महीने में जब उनसे पूछा गया था कि रोहिंग्या मुसलमानों को क्या बर्मा का नागरिक माना जाना चाहिए तो उन्होंने कहा था, "मैं नहीं जानती." साथ ही उन्होंने ये भी कहा था कि बर्मा की सरकार को नागरिक क़ानून के बारे में स्पष्टीकरण देना चाहिए.

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