ख़तने का ख़ून मुँह से साफ़ करने पर विवाद

 बुधवार, 19 सितंबर, 2012 को 10:40 IST तक के समाचार
खतना

शिशुओं में खतना की प्रक्रिया बेहद विवादित विषय है.

मेटज़िटज़ाह ख़तना करने का एक प्राचीन यहूदी तरीका है जिसमें ख़तना करने वाला यानि मोहेल अपने मुंह से बच्चे का ख़ून वगैरह साफ़ करता है. न्यूयॉर्क के करीब दस लाख यहूदियों के लिए ये आम बात है लेकिन इस प्राचीन रिवाज़ की वैज्ञानिक समुदाय में बहुत आलोचना हुई है.

अब न्यूयॉर्क के स्वास्थ्य बोर्ड ने काफ़ी सोच-विचार के बाद नियम बनाया है कि अपने बच्चों का इस विवादित और प्राचीन विधि से ख़तना करवाने के लिए मां-बाप को स्पष्ट सहमति देनी पड़ेगी.

विशेषज्ञ कहते हैं कि मेटज़िटज़ाह से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं और यहां तक कि बच्चे की मृत्यु भी हो सकती है. न्यूयॉर्क के स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि इस तरीके से खतना होने वाले शिशुओं में हर्पीस के 11 मामले और दो मौतें भी हुई हैं.

मगर कट्टरपंथी यहूदी समुदाय अपने दायरे में सीमित रहता है, इसलिए मेटज़िटज़ाह की वजह से संक्रमित शिशुओं की संख्या का ठीक-ठीक पता लगाना बहुत मुश्किल है.

"मुझे समझ नहीं आता कि मां-बाप की सहमति उस बच्चे की कैसे मदद कर सकती है जिसकी मौत इस प्रक्रिया की वजह से हुई है."

जोशिए बर्जर, मेटज़िटज़ाह रिवाज़ के विरोधी

इसराइल के बाहर इस वक्त सबसे ज़्यादा यहूदी न्यूयॉर्क शहर में रहते हैं जिनमें से 40 प्रतिशत ख़ुद को कट्टरपंथी यहूदी मानते हैं. इनमें से 66 प्रतिशत दंपती शिशुओं का मेटज़िटज़ाह तरीके से ख़तना कराते हैं.

विवाद

खतना की प्रक्रिया के लिए मां-बाप की सहमति होना वैसे तो साधारण बात लगती है लेकिन अब ये भी विवाद का विषय बन गया है.

जोशीए बर्गर, हासिदिक समुदाय के एक पूर्व सदस्य हैं और अब वो मेटज़िटज़ाह रिवाज़ के खिलाफ़ एक कार्यकर्ता हैं. जोशिए कहते हैं, “मुझे समझ नहीं आता कि मां-बाप की सहमति उस बच्चे की कैसे मदद कर सकती है जिसकी मौत इस प्रक्रिया की वजह से हुई है.”

जहां अमरीका के सेंटर फॉर डिसीज़ कंट्रोल, सीडीसी, ने मेटज़िटज़ाह खतना की प्रक्रिया को असुरक्षित घोषित किया है, वहीं इसके समर्थक कहते हैं कि वे न्यूयॉर्क स्वास्थ्य विभाग के नियम को नज़र अंदाज़ करेंगे.

शहर के ब्रुकलिन इलाके में कट्टरपंथी यहूदियों की सबसे ज़्यादा आबादी है और वहां के रब्बी विलियम हैंडलर के मुताबिक यह तीन हज़ार वर्ष पुराना रिवाज़ स्वास्थ्य के लिए ख़तरनाक नहीं है.

एक और रब्बी, एलियाहू फ़िंक, इस रीति के पक्ष में नहीं हैं लेकिन वो कहते हैं कि कई रब्बी सहमति लेने के नियम का विरोध करेंगे.

खतना सही या ग़लत?

मेनोराह

कट्टरपंथी यहूदियों में खतना की एक प्राचीन धार्मिक रीति का वैज्ञानिक समुदाय विरोध करता रहा है.

इससे पहले भी खतने को लेकर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में विवाद हुए हैं.

कुछ महीने पहले जर्मनी की एक अदालत ने कोलोन प्रांत में नाबालिगों के ख़तने को असंवैधानिक करार दिया था. लेकिन इस फ़ैसले का यहूदी, मुस्लिम और ईसाई नेताओं ने ये कह कर विरोध किया था कि इससे भेदभाव पैदा होता है.

वहीं, हाल ही में अमरीकन एकेडेमी ऑफ़ पीडियाट्रिक्स ने एक वक्तव्य जारी किया जिसमें बालकों में खतने के फ़ायदों की बात कही. लेकिन बच्चों में खतने का विरोध करने वाली सिएटल-स्थित एक संस्था, डॉक्टर्स अपोज़िंग सर्कमसिज़न, ने इस वक्तव्य का तुरंत कड़े शब्दों में विरोध किया.

स्वास्थ्य अनुसंधान के क्षेत्र में एक जानी-मानी संस्था, जॉन हॉपकिंस मेडिसिन के मुताबिक मौजूदा समय में अमरीका में हर साल पैदा होने वाले बीस लाख बालकों में से लगभग 55 प्रतिशत का खतना होता है. ये आंकड़ा सत्तर और अस्सी के दशक की तुलना में काफ़ी कम है जब 79 प्रतिशत से ज़्यादा बच्चों का खतना होता था.

जॉन हॉपकिंस संस्था के अनुसार बालकों में खतना के स्वास्थ्य के लिहाज़ से फ़ायदे हैं. इसलिए इसके नंबरों में कमी का असर लोगों के स्वास्थ्य के साथ ही देश की स्वास्थ्य सेवाओं को हज़ारों डॉलरों का नुक्सान होगा.

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