फ्रांसीसी पत्रिका ने छापे मोहम्मद के कार्टून

 गुरुवार, 20 सितंबर, 2012 को 02:13 IST तक के समाचार
पत्रिका

हिंसा की आशंका के बीच इस्लामी देशों में फ्रांसीसी दूतावासों को बंद करने का कदम उठाया गया है

अमरीका में बनी एक इस्लाम विरोधी फिल्म पर जारी उग्र प्रदर्शनों के बीच फ्रांस में एक पत्रिका ने पैगंबर मोहम्मद का मजाक उड़ाने वाले कार्टून छापे हैं. तनाव बढ़ने की आशंका को देखते हुए फ्रांस ने अपने दूतावासों की सुरक्षा बढ़ा दी है.

लगभग बीस देशों में शुक्रवार को एहतियात के तौर पर फ्रांसीसी दूतावास, वाणिज्य दूतावास और अंतरराष्ट्रीय फ्रांसीसी स्कूल बंद रहेंगे.

फ्रांसीसी पत्रिका में कार्टून छपने के बाद तनाव और बढ़ने की आशंका को देखते हुए ये कदम उठाया गया है. ये कार्टून चार्ली हेबदो' नाम की पत्रिका ने छापे हैं.

हालांकि सरकार के मंत्रियों ने इस पत्रिका में छपे कार्टून को लेकर चिंता जताई है लेकिन उन्होंने प्रेस की स्वतंत्रता का भी बचाव किया.

इस पत्रिका के दफ्तर के बाहर पुलिस को तैनात कर दिया गया है. पत्रिका ने स्वीकार किया है उसकी वेबसाइट पर हमला हुआ है.

बचाव

पत्रिका के एक कार्टूनिस्ट ने पैगंबर मोहम्मद पर छपे इन कार्टूनों का बचाव करते हुए बीबीसी को बताया कि ये विशेष संस्करण हिंसक प्रतिक्रिया को उकसाने के लिए नहीं निकाला गया था.

"अभिव्यक्ति की आज़ादी फ्रांस का मौलिक सिदांत है, वैसे ही इसमें धर्मनिरपेक्षता और सभी धर्मों का आदर करना शामिल है."

ज़्यौं मार्क एराउल, फ्रांस के प्रधानमंत्री

उनका कहना था जिस तरह एक न्यूज़ स्टोरी को कवर किया जाता है वैसे ही हमने विवादास्पद फिल्म, फ्रांसीसी राजनीतिज्ञों और पर्यावरण की खबर को कलाकृतियों के मेलजोल से पेश किया.

फ्रांस के विदेश मंत्री लॉरैं फाबियास ने पत्रिका में छपी उन 20 तस्वीरों पर चिंता जताई है जिनमें पैगंबर मोहम्मद पर बनी विवादित अमरीकी फिल्म के खिलाफ़ अमरीका विरोधी प्रदर्शनों का मज़ाक उड़ाया गया था.

इस फिल्म के विरोध में पिछले हफ्ते से हिंसक प्रदर्शनों में 30 लोग मारे जा चुके है. मारे गए लोगों में लीबिया में अमरीकी राजदूत क्रिस्टोफ़र स्टीवन्स और तीन अन्य अमरीकी शामिल भी थे.

इंटरनेट पर इस विवादित फिल्म के कुछ अंश जारी होने के बाद से ही मुस्लिम देशों में अमरीकी और पश्चिमी देशों के दूतावास को निशाना बनाया जा रहा है.

सुरक्षा कड़ी

मुस्लिम और अरब जगत ने कहा है कि ये कार्टून उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं लेकिन उन्होंने लोगों से हिंसक न होने की अपील भी की है.

प्रदर्शन

फिल्म के विरोध में हुए हिंसक प्रदर्शनों में 30 लोग मारे जा चुके है.

जुमे की नमाज़ के बाद होने वाले प्रदर्शनों की आशंका के चलते ये फ्रांसीसी दूतावासों और अन्य इमारतों को बंद करने का कदम उठाया गया है.

मिस्र की राजधानी काहिरा में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और फ्रांसीसी स्कूल और सांस्कृतिक केंद्रों को गुरुवार को बंद करने का फैसला लिया गया है.

इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में फ्रांसीसी दूतावास को शुक्रवार को बंद रखने की घोषणा वेबसाइट पर की गई है.

ट्यूनीशिया में भी फ्रांसीसी स्कूल बुधवार से सोमवार तक बंद रहेंगे और वहां फ्रांसीसी दूतावास को शुक्रवार को बंद रखा जाएगा.

इन कार्टूनों पर फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर प्रधानमंत्री ज़्यौ मार्क एराउल का वक्तव्य छापा गया है जिसमें लिखा है, ''अभिव्यक्ति की आज़ादी फ्रांस का मौलिक सिदांत है, वैसे ही इसमें धर्मनिरपेक्षता और सभी धर्मों का आदर करना शामिल है.''

साथ ही इसमें कहा गया है कि ताज़ा हालात में प्रधानमंत्री भी नहीं चाहेंगे कि ऐसा कदम उठाया जाए जिससे तनाव और बढ़े.

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