बीबीसी ने महारानी से माफ़ी माँगी

  • 25 सितंबर 2012

इस्लामी चरमपंथी अबू हमज़ा के नफ़रत भरे संदेशों के खुलेआम प्रचार से ब्रिटेन की महारानी एलिज़ाबेथ इतनी नाराज़ थीं कि उन्होंने तत्कालीन गृह मंत्री से पूछ लिया कि अबू हमज़ा आज़ाद कैसे घूम रहा है.

ये जानकारी बीबीसी संवाददाता फ्रैंक गार्डनर ने बीबीसी रेडियो 4 के टुडे कार्यक्रम में दी. महारानी इस बात को लेकर परेशान थीं कि कैसे इस्लामी चरमपंथी अबू हमज़ा बिना किसी रोकटोक के घृणा संदेश प्रचारित कर रहे हैं.

हालांकि ये जानकारी सार्वजनिक होने के बाद बीबीसी ने औपचारिक तौर पर महारानी से माफी मांगी है.

ये माफ़ी बीबीसी संवाददाता फ्रैंक गार्डनर के उस बयान के बाद माँगी गई है जिममें उन्होंने महारानी के साथ हुई निजी बातचीत को सार्वजनिक कर दिया था.

बकिंघम पैलेस को भेजे गए पत्र में बीबीसी ने कहा है कि ये बातचीत निजी रहनी चाहिए थी और बीबीसी और गार्डनर को विश्वास तोड़ने के लिए बेहद अफसोस है.

फ्रैंक गार्डनर ने बीबीसी रेडियो 4 के टुडे क्रार्यक्रम में कहा, "महारानी इस बात को लेकर नाराज़ थीं कि हमज़ा को गिरफ़्तार नहीं किया जा सकता. महारानी का कहना था कि कोई तो कानून होगा जिसे हमज़ा ने तोड़ा हो."

फ्रैंक गॉर्डनर के अनुसार महारानी ने उस समय के गृह मंत्री से बात की और कहा, "हमज़ा ने कोई तो कानून तोड़ा होगा. हे भगवान वो आज़ाद क्यों है? वो चरमपंथी गतिविधियाँ चला रहा है, उसने ब्रिटेन को शौचालय कहा है, वो बेहद ब्रिटेन विरोधी है और फिर भी वो इस देश से पैसा चूस रहा है. वो मुसलमानों के लिए भी शर्मिंदग़ी का विषय है और मुसलमान हमज़ा की निंदा करते हैं."

जब फ्रैंक गार्डनर से इस जानकारी का स्त्रोत पूछा गया तो गार्डनर ने कहा, "महारानी ने मुझे बताया."

अबू हमज़ा के प्रत्यर्पण को हरी झंडी

इससे पहले हमज़ा और चार अन्य चरमपंथियों के अमरीका प्रत्यर्पण का रास्ता साफ हो गया.

यूरोप की मानवाधिकार अदालत ने अबू हमज़ा और चार अन्य चरमपंथियों को ब्रिटेन से अमरीका प्रत्यर्पित ना किए जाने की अपील ठुकरा दी है.

इस फैसले का मतलब ये होगा कि अबू हमज़ा, कंप्यूटर विशेषज्ञ बाबर अहमद और तीन अन्य आतंकवादियों को अगले कुछ हफ़्तों में ब्रिटेन से अमरीका प्रत्यर्पित किया जा सकता है.

अमरीका में अबू हमज़ा पर आतकंवादी ट्रेनिंग कैंप चलाने और यमन में हुए अपहरण के मामले में सहयोग करने का आरोप है.

ब्रिटेन में अबू हमज़ा को 2006 में हत्या के लिए उकसाने और नस्ल आधारित घृणा फैलाने के आरोप में सात साल की सज़ा सुनाई गई है और वो इस मामले में सज़ा काट रहे हैं.

अमरीका ने यूरोप की मानवाधिकार आदालत के इस फैसले का स्वागत किया है.

अमरीका के न्याय विभाग के प्रवक्ता डीन बॉंड ने कहा, “हमें ये जानकर खुशी हुई कि यूरोप की मानवाधिकार अदालत में चल रहा मामला समाप्त हो गया है. हम ब्रितानी अधिकारियों के साथ मिलकर इनके प्रत्यर्पण का बंदोबस्त कर रहे हैं ताकि इन पर अमरीका में मुकदमा चलाया जा सके.”

अमरीकी अधिकारी काफी लंबे समय से अबू हमज़ा के प्रत्यर्पण की मांग कर रहे थे, लेकिन अबू हमज़ा और बाकी चरमपंथियों ने मानवाधिकार के आधार पर इसका विरोध किया था.

इनका कहना था कि अमरीका में इन्हें अमानवीय व्यवहार का सामना करना पड़ सकता है.

अबू हमज़ा और अहमद 2004 से हिरासत में हैं और एक और चरमपंथी हसन 2006 से हिरासत में है जबकि बाकी बचे दोनों चरमपंथी 1998 से हिरासत में हैं, जो कि ब्रिटेन में बिना मुकदमा चले सबसे ज्यादा समय हिरासत में समय बिताने वाले बन गए हैं.

ब्रितानी नागरिक

मिस्र में पैदा हुए 47 वर्षीय अबू हमजा अल मसरी एक ब्रितानी महिला से शादी के बाद 1981 में ब्रिटेन के नागरिक बन गए थे.

वे लंदन के उत्तरी हिस्से फ़िंसबरी पार्क की मस्जिद के इमाम थे मगर उन पर राजनीतिक भाषण देने का आरोप लगाया गया और 2003 में उनके भाषण देने पर पाबंदी लगा दी गई थी.

वर्ष 2004 में अमरीका ने उन पर 'आतंकवाद' से जुड़े 11 आरोप लगाए. अमरीका चाहता है कि ब्रिटेन उन्हें प्रत्यर्पित करे.

हत्या और नस्लीय नफरत फैलाने के आरोप में अबू हमजा ब्रिटेन में सात साल की जेल की सज़ा काट रहे हैं.

वहीं एक दूसरे कैदी बाबर अहमद को करीब आठ साल से बिना सुनवाई के कैद में रखा गया है.

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