दवा से नहीं दुआ से ठीक होगा एड्स?

दुआओं से इलाज
Image caption कम से कम 7 समूहों के सामने दुआओं से इलाज करने के मामले सामने आए हैं.

क्या एचआईवी पॉज़िटिव या कैंसर से पीड़ित मरीज़ बिना इलाज के ठीक हो सकते हैं?

ये बात भले ही आपके या हमारे गले से नीचे ना उतरे, लेकिन इंग्लैंड में कुछ धर्मगुरु ऐसी ही बातें प्रचारित कर रहे हैं.

इन कथित धर्मगुरुओं की पहचान अफ्रीकी मूल के कुछ सामुदायिक समूहों ने इग्लैंड के कई जगहों पर की है.

एएचपीएन यानी अफ्रीकन हेल्थ पॉलिसी नेटवर्क के अनुसार, ''कम से कम ऐसे सात समूह हैं, जिनके सामने ऐसे मामले आए हैं, जिसमें बीमार मरीज़ों से कहा गया है कि वे प्रार्थना से ठीक हो जाएंगे और फिर उन लोगों ने एंटीरेट्रोवाइरल दवाइयां लेनी बंद कर दीं.''

ऐसे मामले लंदन के फिंसबरी पार्क, टोटेनहैम और वुलिच के अलावा मैनचेस्टर, लीड्स और उत्तर-पूर्व के कई चर्च में हुए हैं.

बीबीसी लंदन को भी पिछले साल ऐसे तीन लोगों को बारे में पता चला था जिन्होंने इवैंजेलिकल ईसाई पादरियों के कहने पर एंटीरेट्रोवाइरल दवाइयां लेनी बंद कर दी थी.

ब्रिटेन में रह रहे अफ्रीकी मूल के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दिलवाने के लिए काम करने वाली संस्था एएचपीएन ने सराकर से आग्रह किया है कि वे इसे रोकने के कदम उठाए.

एएचपीएन प्रमुख जैकलिन स्टीवेन्सन ने कहा, ''सरकार, स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग तीनों इसे रोकने के लिए ज्यादा कुछ नहीं कर रहे हैं.''

कई मामले

एएचपीएन के अनुसार उनके सामने जो मामले लाए गए हैं उनमें कुछ बातें सामान्य थीं.

ज्यादातर मामलों में मरीज़ पादरी के दावों को सच मानते हैं और इस तरह के दावों के बारे में उन्हें पहले से पता होता है.

इन मामलों में अक्सर इवैंजेलिकल या पेंटिकोस्टल पादरियों की सहभागिता सामने आई है.

एएचपीएन के अनुसार प्रभावित लोग चर्च या पादरी का नाम नहीं लेना चाहते थे.

इलाज

एएचपीएन का मानना है कि इस पूरे प्रकरण में साइनागॉग चर्च ऑफ ऑल नेशंस (एससीओएन) शामिल है. इस चर्च का मुख्यालय दक्षिणी लंदन के साउदर्क में है.

इस चर्च की अगुवाई टीबी जोशुआ नाम के पादरी करते हैं, जिन्हें फोर्ब्स पत्रिका ने नाइजीरिया का तीसरा सबसे धनी धर्मगुरु बताया है.

एससीओएन की आधिकारिक वेबसाइट में टीबी जोशुआ को एचआईवी पॉज़िटिव मरीज़ों को कहते हुए दिखाया गया है कि प्रार्थना से हर बीमारी ठीक हो जाती है.

अभिषेक यात्रा

Image caption कई मामलों में पवित्र जल के छिड़काव से ठीक होने का दावा किया गया है.

चर्च की ब्रिटिश वेबसाइट में अब उनलोगों के बारे में बताया जा रहा है जो कथित रुप से आर्थराइटिस और फेफड़ों में खून जमने की बीमारी से पीड़ित थे.

ऐसे लोगों के बारे में दावा किया गया है कि ये लोग सिर्फ पवित्र जल के छिड़काव से ठीक हो गए हैं.

इस वेबसाइट मुताबिक महीने में एक बार किसी भी बीमारी से पीड़ित मरीज़ों के लिए 'पवित्र जलाभिषेक' का आयोजन किया जाता है.

अगले एक महीने के लिए ये जलाभिषेक यात्रा ब्रिटेन और आयरलैंड के कई शहरों में किया जाएगा.

पिछले साल बीबीसी ने जब इन पादरियों से इस चमत्कारिक इलाज के बारे में पूछा, तब एससीओएएन ने कहा था, ''हम किसी का इलाज नहीं कर सकते हैं. ईश्वर कल्याण करता है. ऐसी कोई बीमारी नहीं है जिसे भगवान ठीक नहीं कर सकता. हम लोगों से ये नहीं कहते कि वो दवा ना खाएं, डॉक्टर दवा देते हैं और ईश्वर उन्हें ठीक करता है.''

लेकिन एएचपीएन की जैकलिन स्टीवेन्सन आगाह करते हुए कहती हैं, ''अक्सर इस तरह के धार्मिक गुट कई जगहों पर पनपना शुरू कर देते हैं और हमें उनके बारे में पता भी नहीं चलता. इसकी राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर पर जांच होनी चाहिए.''

जैकलिन कहती हैं, ''ऐसे समूहों के खिलाफ़ आपराधिक प्रतिबंध लगाना भी सही नहीं होगा क्योंकि उससे ये समस्या जड़ से खत्म नहीं होगी. हम चाहते हैं कि स्थानीय प्रशासन इन धार्मिक समूहों के साथ मिलकर काम करे और लोगों में गलत संदेश ना जाए.''

एएचपीएन के इस टिप्पणी पर स्थानीय प्रशासन और डिपार्टमेंट ऑफ कम्यूनिटीज़ ने कुछ भी कहने से मना कर दिया है.

लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने अपने एक वक्तव्य में कहा है, ''इस तरह के धार्मिक समूह एचआईवी की जांच के लिए किए जाने वाले परीक्षणों और एंटीरेट्रोवाइरल दवाइयां के बारे सही जानकारी देकर लोगों को जागरुक करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.''

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