गद्दाफी को 'पकड़ने वाले' लड़ाकू की मौत

लीबिया
Image caption सरकार का कहना है कि वो बेन शाबान का सम्मान किसी हीरो की तरह ही करेगी

लीबिया के पूर्व तानाशाह शासक कर्नल गद्दाफ़ी को पिछले साल पकड़ने वालों में से एक ओमरान बेन शाबान की मौत पर 10,000 से ज्यादा लोगों ने इकट्ठा होकर दुख व्यक्त किया है.

गद्दाफी के समर्थकों से मिली चोटों के बाद मंगलवार को शाबान ने दम तोड़ दिया था. उन्हें अगवा किया गया, यातनाएँ दी गईं और बाद में गोली मार दी गई.

22 साल के शाबान के शरीर को उनके शहर मिसराता ले जाया गया जहाँ बड़ी संख्या में लोगों ने शोक जताया. मिसराता पश्चिमी लीबिया में है.

सरकार का कहना है कि वो बेन शाबान का सम्मान किसी हीरो की तरह ही करेगी.

लीबिया की राजधानी त्रिपोली में प्रदर्शनकारियों ने सरकार से शाबान की मौत का बदला लेने की मांग की.

जुलाई में बंदूकधारियों ने शाबान का अपहरण कर लिया था और उन्हें गद्दाफी के गढ़ बनी वलीद शहर में 50 दिनों तक रखा गया.

बनी वलीद त्रिपोली के दक्षिण-पूर्व में स्थित है.

सम्मान

लीबिया के अंतरिम नेता और जनरल नेशनल कांग्रेस (जीएनसी) पार्टी अध्यक्ष मोहम्मद मागारीफ की कोशिशों के कारण शाबान को पिछले हफ्ते छोड़ दिया गया था.

रिपोर्टों के मुताबिक शाबान पिछले हफ्ते जब मिसराता पहुँचे तो उनके शरीर पर घोर यातनाओं के निशान थे. साथ ही उनकी रीढ़ के पास गोली की चोट का निशान भी था.

उन्हें इलाज के लिए पेरिस ले जाया गया लेकिन मंगलवार को उनकी मौत हो गई.

शाबान का नाम पिछले वर्ष 20 अक्तूबर को उस वक्त उभर कर आया था जब उनकी तस्वीर गद्दाफी को पकड़े जाने वाली जगह ली गई थी.

लीबिया के इलाके सियर्त में एक नाली में छिपे गद्दाफी को निकालकर घसीटे जाने की तस्वीरें दुनिया भर में देखीं गई थी.

जीएनसी की ओर से जारी एक वक्तव्य में शाबान को एक बहादुर हीरो बताया गया और कहा गया कि सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी.

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