कराची और मुंबई से शांति मार्च

पाकिस्तान और भारत के बीच शांति के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं ने 'अमन के बढ़ते हुए क़दम' के नाम से शांति मार्च शुरु करने की घोषणा की है.

इसकी शुरुआत जुलाई के अंतिम सप्ताह में पाकिस्तान के शहर कराची और भारत के शहर मुंबई से एक ही समय होगी.

दोनों देशों में शांति के लिए काम करने वाली संस्थाएँ इस मार्च की तैयारी में व्यस्त हैं और लोगों की अधिक से अधिक भागेदारी के लिए बैठकें हो रही हैं.

पाकिस्तान इंस्टिट्यूट ऑफ़ लेबर एजूकेशन एंड रिसर्च यानी 'पाईलर' के निदेशक करामत अली ने बीबीसी को बताया, “जो कारवाँ मुंबई से चलेगा वो 13 अगस्त को अमृतसर पहुँचेगा और कराची का कारवाँ लाहौर पहुँचेगा जहाँ सभाएँ अयोजित की जाएँगी.”

उनके अनुसार पाकिस्तान के कुछ लोग अमृतसर के कार्यक्रम में भाग लेंगे और दूसरे दिन भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ पाकिस्तान पहुँचेगें.

कार्यक्रम के मुताबिक़ सीमा के दोनों ओर ये कारवाँ शहरों में पैदल मार्च करेगा जबकि शहरों के बीच का फ़ासला ग़ाड़ियों में तय किया जाएगा.

'लोग शांति चाहते हैं'

बड़े बड़े शहरों में शांति कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएँगे जिसमें भारत और पाकिस्तान के बीच शांति की ज़रूरत पर प्रकाश डाला जाएगा.

भारत से ग़ैर सरकारी संस्था आशा परिवार के डॉक्टर संदीप पांडे और वरिष्ठ स्तंभकार कुलदीप नैयर जबकि पाकिस्तान से पाईलर संस्था के करामत अली और डॉक्टर टीपू सुल्तान इस कारवाँ के नेतृत्व करेंगे.

ग़ौरतलब है कि 2005 में भी शांति के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं ने दिल्ली से मुल्तान तक अमन मार्च किया था. भारत से इस मार्च ने पैदल पाकिस्तानी सीमा में प्रवेश किया था लेकिन दोनों देशों के बीच संबंधों में तनाव के कारण वह मार्च जारी नहीं रह सका था.

2008 में मुंबई हमलों के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों में काफी तनाव हो गया था लेकिन पिछले दिनों सार्क शिखर सम्मेलन में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच मुलाक़ात के बाद संबंधों में कुछ बेहतरी हुई है.

करामत अली ने बताया कि मौजूदा स्थिति के कारण ही मार्च का कार्यक्रम बनाया गया है क्योंकि लोग अमन चाहते हैं.

उन्होंने कहा कि अजमल कसाब को पाकिस्तान के लोगों ने नहीं भेजा था बल्कि कुछ चरमपंथी गुटों का यह काम था.

दोनों देशों के शांति कार्यकर्ताओं ने अपने संयुक्त वक्तव्य में कहा कि भारत और पाकिस्तान के लोगों की भावनाओं को देखते हुए दोनों देशों की सरकार संबंधों में बेहतरी के लिए अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करें.

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