सईद की रिहाई के ख़िलाफ़ याचिका ख़ारिज

हाफ़िज़ सईद
Image caption भारत सरकार का कहना है कि उसने पाकिस्तान को सईद के ख़िलाफ़ पर्याप्त सबूत दिए हैं

पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफ़िज़ सईद को रिहा किए जाने के ख़िलाफ़ दायर सरकार की याचिकाओं को ख़ारिज कर दिया है.

लाहौर हाईकोर्ट ने गत वर्ष जून में हाफ़िज़ सईद के ख़िलाफ़ पुख़्ता सबूत न होने को कारण बताते हुए उनकी नज़रबंदी ख़त्म करने के आदेश दिए थे.

पंजाब प्रांत की सरकार और केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ पिछले साल ही याचिका दायर की थी लेकिन कुछ कारणों से इन याचिकाओं पर सुनवाई नहीं हो सकी थी.

भारत सरकार का आरोप है कि हाफ़िज़ सईद वर्ष 2008 में मुंबई में हुए चरमपंथी हमलों की षडयंत्र रचने वालों में से एक थे और भारत के पास उनके ख़िलाफ़ पर्याप्त सबूत भी हैं जो उन्होंने पाकिस्तान सरकार को सौंप दिए हैं.

लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फ़ैसले को बरक़रार रखते हुए हाईकोर्ट के इस फ़ैसले की पुष्टि की है कि हाफ़िज़ सईद के ख़िलाफ़ पर्याप्त सबूत नहीं हैं.

पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भारत ने निराशा जताई है और कहा है कि वह उम्मीद करता है कि पाकिस्तान सरकार हाफ़िज़ सईद के ख़िलाफ़ कुछ सार्थक क़दम उठाएगी.

फ़ैसला

मंगलवार को जब यह मामला जस्टिस नासिरुल मुल्क की अध्यक्षता वाले पाँच सदस्यीय पीठ के सामने आया तो उन्होंने दोनों सरकारों की याचिकाओं को ख़ारिज कर दिया.

हाफ़िज़ सईद के वकील एके डोगर ने अदालत से कहा कि लाहौर हाईकोर्ट का फैसला सही है और उनके मुवक्किल के ख़िलाफ़ मुंबई हमलों में लिप्त होने का कोई सबूत पेश नहीं किया गया है.

उल्लेखनीय है कि मुंबई में नवंबर, 2008 में हुए चरमपंथी हमलों के बाद 12 दिसंबर 2008 को पाकिस्तान सरकार ने हाफिज़ सईद को लाहौर में उन के घर में नज़रबंद किया था.

हाफ़िज़ सईद की ओर से सरकार के इस फ़ैसले को चुनौती दी गई थी और लाहौर हाईकोर्ट ने दो जून, 2009 को हाफ़िज़ मोहम्मद सईद को रिहा करने का आदेश दिया था.

लाहौर हाईकोर्ट के बाहर हाफ़िज़ सईद के वकील एके डोगर ने पत्रकारों को बताया था कि अदालत ने हाफ़िज़ सईद की नज़रबंदी संविधान और क़ानून का उल्लंघन बताया है.

ध्यान रहे कि पिछले साल अक्तूबर में लाहौर हाईकोर्ट ने लश्करे तैबा के पूर्व प्रमुख और कट्टरपंथी इस्लामी नेता हाफिज़ सईद के ख़िलाफ़ दायर किए गए दो और मुक़दमों को ख़ारिज कर दिया था.

इनमें आरोप लगाया गया था कि हाफ़िज़ सईद ने जेहाद को लेकर भड़काउ भाषण दिया था.

भारत की प्रतिक्रिया

भारत की विदेश सचिव निरूपमा राव ने कहा है कि पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से निराशा हुई है.

उन्होंने कहा, "हम समझते हैं कि भारत में हर किसी को इसी तरह की निराशा हुई होगी."

निरुपमा राव का कहना था कि हाफ़िज़ सईद को मुंबई के चरमपंथी हमलों का षडयंत्र रचने वालों में से एक हैं और उन्होंने सार्वजनिक तौर पर भारत के ख़िलाफ़ जेहाद की अपील की थी.

उन्होंने कहा, लश्करे तैबा और जमात-उद-दावा नाम के जिन दो संगठनों का हाफ़िज़ सईद नेतृत्व करते रहे हैं वे दोनों संयुक्त राष्ट्र की सूची में आतंकवादी संस्था के रूप में दर्ज है.

विदेश सचिव ने कहा कि भारत ने पाकिस्तान को हाफ़िज़ सईद के ख़िलाफ़ पर्याप्त सबूत दिए हैं.

उनका कहना था, "पाकिस्तान ने आश्वासन दिया है कि वह अपनी ज़मीन का उपयोग किसी आतंकवादी गतिविधियों के लिए नहीं होने देगा इसलिए भारत उम्मीद करता है कि पाकिस्तान सरकार इस व्यक्ति (हाफ़िज़ सईद) के ख़िलाफ़ सार्थक क़दम उठाएगी."

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