'इसराइल मासूम लोगों का क़ातिल है'

तलत हुसैन
Image caption तलत हुसैन उस समुद्री बेड़े पर सवार थे जिस पर इसराइल ने हमले किए थे

"उन जहाज़ों में मौजूद तमाम लोग अपना लिखित साक्ष्य तैयार करेंगे. पांच सौ प्रत्यक्षदर्शियों की ओर से अलग-अलग तरह की सच्चाइयां सामने आएंगी. लेकिन वो सब यही कहेंगे कि इसराइल ने आक्रामकता दिखाई, अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों को तोड़ा और वो मासूम लोगों का हत्यारा है."

ये शब्द हैं पाकिस्तान में एक निजी टेलीविज़न चैनल 'आज न्यूज़' के कार्यकारी निदेशक और जानेमाने एंकर तलत हुसैन के. वे फ़लस्तीनियों के लिए राहत सामग्री ले जाने वाले उस समुद्री बेड़े पर सवार थे जिसपर इसराइल ने हमले किए थे. इस हमले में नौ लोग मारे गए थे. इसराइली हमले की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निंदा हुई थी और इसके ख़िलाफ़ विश्वव्यापी प्रदर्शन हुए थे.

गुरुवार को पाकिस्तान लौटने के बाद तलत हुसैन ने बीबीसी संवाददाता ज़हीर बाबर को टेलीफ़ोन पर बताया कि वो इसराइल के ख़िलाफ़ लिखित साक्ष्य तैयार कर रहे हैं और उसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों (आईसीसीआर, संयुक्त राष्ट्र या किसी स्वतंत्र आयोग) के सामने पेश करेंगे.

बदसुलूकी

तलत हुसैन अपने अनुभव बाँटते हुए बताते हैं, "इसराइली जहाज़ों ने सोमवार को तड़के क़रीब साढ़े चार बजे बेड़े का घिराव किया, जिसके बाद हेलीकॉप्टर से एक सौ से अधिक कमांडो जहाज़ पर उतरे. कमांडो ने नीचे उतरने से पहले गोलियां बरसाईं और सटन ग्रेनेड (स्थिर करने वाले हथगोले) फेंके.हेलीकॉप्टर से नीचे उतरने से पहले इसराइली फ़ौजियों ने नावों से जहाज़ों पर चढ़ने की कोशिश की, लेकिन जहाज़ से पानी फेंके जाने के कारण उनका पहला मिशन नाकाम हो गया."

उनका कहना था कि जहाज़ में सवार लोग निहत्थे थे और आक्रामकता इसराइल की ओर से थी और एकतरफ़ा थी.

तलत हुसैन कहते हैं, "गिरफ़्तारी के बाद हम लोगों को समुद्री तट से दो घंटे की दूरी पर अशदूद में स्थित इसराइली फ़ौज की जेल में रखा गया. जेल में हुए व्यवहार को बदसुलूकी कहा जाए तो अच्छा होगा."

पाकिस्तान में स्वागत

तलत हुसैन जब इस्लामाबाद हवाई अड्डे पर पहुंचे तो उनके स्वागत के लिए गृह मंत्री रहमान मलिक और पाकिस्तानी मीडिया के प्रतिनिधियों की बड़ी तादाद मौजूद थी.

इस्लामाबाद आने से पहले तलत हुसैन का हवाई जहाज़ लाहौर में रुका तो उन्होंने वहां मीडिया से बताया वो अंतरराष्ट्रीय राहत कर्मी के जहाज़ पर एक पत्रकार की हैसियत से सवार थे.

हुसैन का कहना था कि उन्हें मौक़ा मिला था कि वो मध्य पूर्व को बाहर से देखने की बजाए वहां जा कर देखें.

पाकिस्तान इसराइल को एक देश के रुप में मान्यता नहीं देता है और ऐसे में उसके नागरिक इसराइल नहीं जा सकते.

तलत हुसैन ने बताया कि उस समुद्री बेड़े पर कई देशों के नागरिक और धर्मों के लोग सवार थे जो ग़ज़ा के शहरियों के लिए बैट्री से चलने वाले विशेष कुर्सियां, सीमेंट, लोहा और दवाइयां ले जा रहे थे.

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