जमात-उद-दावा प्रतिबंधित है या नहीं?

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में जमात-उद-दावा के लिए बजट में करीब आठ करोड़ रुपए जारी करने के सरकारी क़दम ने उसकी क़ानूनी हैसियत पर प्रश्न चिह्न लगा दिया है.

इस ख़बर के प्रकाशित होने के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या जमात-उद-दावा पर पाकिस्तान में प्रतिबंध है या नहीं.

जमात-उद-दावा के वकील एके डोगर का कहना है कि पाकिस्तान में इस संगठन पर कोई प्रतिबंध नहीं है.

उन्होंने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि लाहौर हाई कोर्ट के समक्ष दो बार यह सवाल उठा है कि क्या जमात-उद-दावा एक प्रतिबंधित संगठन है या नहीं.

पाकिस्तान सरकार का कहना है कि जमात-उद-दावा प्रतिबंधित संगठन है और पंजाब प्रांत के क़ानून मंत्री राणा सनाऊल्लाह के अनुसार बजट में जो राशि रखी गई है वह जमात-उल-दावा के स्कूलों और अस्पतालों के लिए है जिसका नियंत्रण अब पंजाब सरकार के हाथ में है.

जमात-उद-दावा ने उस समय काम करना शुरु किया था जब सरकार ने जेहादी गुट लश्करे तैबा पर प्रतिबंध लगाया था.पाबंदी के बाद लश्करे तैबा के प्रमुख हाफिज़ सईद जमात-उद-दावा के प्रमुख के तौर पर सामने आए.

'पाबंदी नहीं लगी है'

एके डोगर के अनुसार अदालत के समक्ष सरकार ने यह जवाब दिया है कि जमात-उल-दावा पर कोई प्रतिबंध नहीं है.

उन्होंने कहा कि केंद्र और प्रांतीय दोनों सरकारें की यह बात अदालत के रिकॉर्ड पर मौजूद हैं कि जमात-उल-दावा पर किसी प्रकार की कोई पांबदी नहीं है. वकील के मुताबिक जमात-उल-दावा प्रतिबंधित संगठन नहीं बल्कि एक कल्याणकारी संस्था है.

एके डोगर का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र या अमरीका के कहने पर किसी गुट या संगठन पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता क्योंकि संयुक्त राष्ट्र विभिन्न देशों का एक क्लब है और उसके बनाए हुए क़ानून किसी दूसरे देश पर लागू नहीं है.

उन्होंने बताया कि यदि किसी संगठन या गुट पर पाबंदी लगानी हो तो उसके लिए पाकिस्तान का अपना क़ानून है.

ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान में जब भी किसी गुट या संगठन पर प्रतिबंध लगाया जाता है तो उसके लिए अधिसूचना जारी की जाती है लेकिन जमात-उल-दावा के बारे में ऐसी कोई अधिसूचना जारी नहीं हुई.

वकील ने डोगर ने बताया कि एक स्थानीय अख़बार ने जमात-उद-दावा को प्रतिबंधित लिखा था जिस पर उसके पदाधिकारों ने अख़बार के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के लिए कहा है.

संयुक्त राष्ट्र और अमरीका के दस्तावेज़ों में जमात-उद-दावा पर प्रतिबंधहै लेकिन पाकिस्तान में अब भी इस संगठन पर कोई प्रतिबंध नहीं है जो जानकारों के अनुसार चिंता का विषय है.

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